Indore News: इंदौर प्रशासन ने हाल ही में भिक्षावृत्ति उन्मूलन अभियान चलाया, जिसके तहत शहर के एक कुष्ठ रोगी भिखारी को भी मुक्त कराया गया. यह मामला इसलिए खास है क्योंकि यह व्यक्ति, जिसे भिक्षावृत्ति के आरोप में पकड़ा गया था, असल में कई संपत्तियों का मालिक था. एक ऐसी सच्चाई, जो भिक्षावृत्ति और उसके असल कारणों पर सवाल खड़ा करती है.
कुष्ठ रोग से जूझते हुए भीख मांगता था व्यक्ति
इंदौर के सर्राफा क्षेत्र से प्रशासन ने एक कुष्ठ रोगी भिखारी को पकड़ा, जिसे भिक्षावृत्ति से मुक्त किया गया. अधिकारियों के अनुसार, यह व्यक्ति काफी समय से भीख मांगने का काम कर रहा था, लेकिन यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि वह खुद कई संपत्तियों का मालिक था. तीन मकान, एक कार, तीन ऑटो रिक्शा और लाखों की संपत्ति के बावजूद यह व्यक्ति भीख मांगने के लिए सड़क पर था.
संपत्तियों के बावजूद क्यों मांगता था भीख?
जब प्रशासन ने इस व्यक्ति के बारे में जानकारी जुटाई, तो सामने आया कि उसके पास तीन पक्के मकान, एक कार और तीन ऑटो रिक्शा हैं, जिन्हें उसने किराए पर दे रखा था. इस व्यक्ति के पास इतनी संपत्ति होने के बावजूद वह सड़क पर भीख मांगने क्यों जाता था? इसका जवाब तब मिला जब अधिकारियों ने बताया कि वह एक चालक रखकर कार में बैठकर भीख मांगता था. यह भिखारी हर दिन लगभग 1000 से 2000 रुपये ब्याज के रूप में वसूलता था, जिसे उसने सर्राफा क्षेत्र में उधार दिया था. इसके अलावा उसे रोजाना 400 से 500 रुपये भीख के रूप में मिलते थे.
इंदौर का भिक्षुकमुक्त अभियान
इंदौर को भिक्षुकमुक्त शहर बनाने का प्रशासन का दावा सही साबित हो रहा है, क्योंकि इस अभियान के तहत भिखारियों का पुनर्वास किया जा रहा है और उन्हें जीवन जीने के नए अवसर दिए जा रहे हैं. इस व्यक्ति के मामले में प्रशासन ने बताया कि जब उसकी संपत्तियों की जानकारी मिली, तो जांच के बाद उचित कानूनी कदम उठाए जाएंगे.
इस व्यक्ति के बारे में जो जानकारी मिली, वह बेहद दुखद है. प्रशासन और एक गैर सरकारी संगठन ‘प्रवेश’ की अध्यक्ष रूपाली जैन के अनुसार, इस व्यक्ति ने लाखों रुपये की संपत्ति भीख से नहीं कमाई थी. कुछ साल पहले यह व्यक्ति एक मिस्त्री का काम करता था, लेकिन कुष्ठ रोग के कारण उसकी उंगलियां और पैर बुरी तरह से प्रभावित हो गए, जिससे वह अपने काम को जारी नहीं रख सका. समाज में भेदभाव और परिवार से अलगाव के बाद, उसने भिक्षावृत्ति का रास्ता अपनाया.
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