AI सेंसर, 150KG वजन, 900 किलोमीटर की रेंज... भारत बनाएगा स्टील्थ लोइटरिंग ड्रोन, जानें ताकत और खासियत

    भारत ने स्वदेशी रक्षा तकनीक को मजबूत करने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया है.

    Indian Stealth Loitering Drone strength and specialty
    प्रतिकात्मक तस्वीर/ FreePik

    Indian Loitering Drone: भारत ने स्वदेशी रक्षा तकनीक को मजबूत करने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया है. Solar Defence & Aerospace Ltd (SDAL) और CSIR–NAL के बीच एक उन्नत स्टील्थ लोइटरिंग म्यूनिशन ड्रोन के संयुक्त निर्माण को लेकर महत्वपूर्ण समझौता हुआ है. यह UAV न केवल भविष्य के युद्धक्षेत्र की जरूरतों को पूरा करेगा, बल्कि भारत को आत्मनिर्भर रक्षा उत्पादन की दिशा में भी नई ऊंचाई प्रदान करेगा.

    यह समझौता बेंगलुरु में हुआ और इसे भारतीय एयरोस्पेस सेक्टर में नई क्रांति की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है. इस आधुनिक ड्रोन में उन्नत स्टील्थ डिज़ाइन, AI-आधारित सर्विलांस पेलोड और लंबी ऑपरेशनल रेंज जैसी क्षमताएँ शामिल हैं, जो इसे दुश्मन की निगाहों से छिपकर विशाल दूरी तक घुसपैठ करने की ताकत देती हैं.

    विशेषता: लंबी मारक दूरी, अदृश्य उड़ान

    यह नया लोइटरिंग म्यूनिशन UAV लगभग 150 किलोग्राम वजन का है, जो इसे अपने वर्ग में अत्यधिक सक्षम बनाता है. कुछ प्रमुख क्षमताएं जो इसे भविष्य के युद्धों के लिए अनिवार्य बनाती हैं:

    • 900 किलोमीटर तक दुश्मन के क्षेत्र में गहराई तक जाकर ऑपरेशन करने की क्षमता
    • 5 किलोमीटर (5000 मीटर) तक सर्विस सीलिंग
    • 6 से 9 घंटे की लंबी एंड्यूरेंस
    • रडार पर न्यूनतम प्रतिबिंब (Low Radar Cross Section), यानी बेहद ताकतवर स्टील्थ क्षमता
    • AI-आधारित EO-IR सिस्टम, जो लक्ष्य की वास्तविक समय में पहचान करता है

    GPS-डिनाइड वातावरण में भी काम करने की क्षमता, जो आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर के दौर में अत्यंत महत्वपूर्ण है

    स्वदेशी वैंकेल इंजन: भारत की बड़ी उपलब्धि

    इस ड्रोन में लगाया जाने वाला वैंकेल इंजन CSIR–NAL द्वारा विकसित किया गया है, जिसे CEMILAC से विमानन उपयोग के लिए मंजूरी मिल चुकी है. यह इंजन पूरी तरह भारतीय तकनीक पर आधारित है और इससे भारत की एयरोस्पेस निर्माण क्षमता का स्तर वैश्विक प्रतिस्पर्धियों के बराबर पहुंचता है.

    दूसरे देशों पर निर्भरता कम होने के साथ यह इंजन भारतीय रक्षा उद्योग के लिए एक बड़ा माइलस्टोन साबित होगा.

    इस ड्रोन को गेम-चेंजर क्यों माना जा रहा है?

    आधुनिक समय में युद्धों का स्वरूप बदल चुका है. आज संघर्ष केवल सीमावर्ती मुकाबलों तक सीमित नहीं है, बल्कि साइबर, इलेक्ट्रॉनिक और हाइब्रिड वारफेयर में भी शक्ति की जरूरत होती है. ऐसे में यह ड्रोन कई स्तर पर मजबूती देता है.

    1. दुश्मन की सीमा में लंबे समय तक मंडराने की क्षमता

    यह UAV “लोइटरिंग” यानी लक्ष्य क्षेत्र में लंबे समय तक बने रहने में सक्षम है, जिससे यह दुश्मन की गतिविधियों की सटीक निगरानी कर सकता है.

    2. AI आधारित लक्ष्य पहचान

    AI आधारित EOS-IR सेंसर वास्तविक समय में लक्ष्य की पहचान, ट्रैकिंग और विश्लेषण कर सकते हैं.

    3. स्टील्थ डिज़ाइन: रडार की पकड़ से दूर

    कम RCS के साथ यह ड्रोन रडार से पकड़ में नहीं आता. इसका मतलब है कि यह दुश्मन के भीतर गहराई तक बिना किसी अलर्ट के जा सकता है.

    4. GPS जामिंग का असर नहीं

    GPS-डिनाइड क्षेत्रों में भी यह सहजता से काम कर सकता है, जो इसे इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर स्थितियों में भी अत्यधिक सक्षम बनाता है.

    5. स्वदेशी तकनीक और पेलोड

    भारतीय रक्षा जरूरतों के अनुरूप पेलोड कस्टमाइज किए जा सकते हैं, जिससे हथियार प्रणाली किफायती और प्रकारांतरों में विविध हो जाती है.

    प्रतियोगिता में SDAL की बड़ी जीत

    इस प्रोजेक्ट का चयन CTCCBS (Combined Technical-cum-Commercial Bidding System) प्रक्रिया के जरिए किया गया, जिसमें SDAL ने चार बड़ी घरेलू और अंतरराष्ट्रीय कंपनियों को पीछे छोड़ा. इससे साफ होता है कि भारतीय निजी रक्षा कंपनियों की क्षमता निरंतर बढ़ रही है और वे अब अंतरराष्ट्रीय स्तर की तकनीक प्रदान करने में सक्षम हैं.

    केंद्रीय मंत्री डॉक्टर जितेंद्र सिंह ने की तारीफ

    विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने इस प्रोजेक्ट की सराहना करते हुए कहा कि CSIR की यह रणनीति जिसमें उद्योग को शुरुआत से शामिल किया गया है भारत की रक्षा अनुसंधान प्रणाली को मजबूत बनाएगी. उनके अनुसार, यह मॉडल डिजाइन से लेकर निर्माण और परीक्षण तक एक सतत श्रृंखला में कार्य को आगे बढ़ाएगा.

    भारत की रक्षा तैयारियों पर प्रभाव

    इस प्रोजेक्ट से भारत को कई बड़ी रणनीतिक लाभ मिलने वाले हैं:

    • रक्षा तकनीक में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा
    • एयरोस्पेस सेक्टर में देश की इंजीनियरिंग क्षमता में मजबूती
    • भविष्य के युद्धों में लंबी दूरी की स्ट्राइक और निगरानी क्षमताओं में वृद्धि
    • रक्षा निर्यात के नए अवसर
    • वैश्विक ड्रोन बाजार में भारत की नई पहचान

    स्टील्थ, AI और अत्यधिक रेंज से लैस यह ड्रोन भारत को आने वाले दशकों में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत और तकनीकी रूप से उन्नत सैन्य शक्ति के रूप में स्थापित कर सकता है.

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