नई दिल्ली: भारतीय नौसेना समुद्र में अपनी ताकत बढ़ाने के लिए बड़े स्तर पर तैयारी कर रही है. इसके तहत नए युद्धपोत, इंटरसेप्टर बोट और दूसरे सैन्य प्लेटफॉर्म शामिल किए जाएंगे. नौसेना के 42 प्लेटफॉर्म बनाने के ऑर्डर पहले ही दिए जा चुके हैं, जबकि 78 अन्य प्लेटफॉर्म और 120 फास्ट इंटरसेप्टर क्राफ्ट की खरीद की प्रक्रिया चल रही है. इन परियोजनाओं पर कुल 2.41 लाख करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है.
नौसेना के उप प्रमुख वाइस एडमिरल अजय कोचर ने सोमवार को 'स्वावलंबन 2026' से जुड़ी प्रेस वार्ता में यह जानकारी दी. उन्होंने बताया कि नौसेना हवाई, समुद्र, पानी के भीतर, साइबर और अंतरिक्ष जैसे क्षेत्रों में अपनी क्षमता बढ़ा रही है. इसके अलावा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), ड्रोन और क्वांटम तकनीक पर भी काम किया जा रहा है.
चार नए लैंडिंग प्लेटफॉर्म डॉक बनाने की तैयारी
वाइस एडमिरल अजय कोचर ने बताया कि नौसेना नए लैंडिंग प्लेटफॉर्म डॉक (LPD) और एम्फीबियस युद्धपोतों को शामिल करने की दिशा में आगे बढ़ रही है. पिछले हफ्ते चार LPD बनाने के लिए चुनी गईं शिपयार्ड कंपनियों को प्रस्ताव देने के लिए कहा गया है. वहीं, अगली पीढ़ी के फ्रिगेट बनाने के लिए भी कुछ हफ्ते पहले प्रस्ताव जारी किया गया था.
नौसेना स्वदेशी डीजल इंजन विकसित करने पर भी काम कर रही है. इसके साथ ही 24 से 28 मेगावाट क्षमता वाले मरीन गैस टर्बाइन को विकसित करने के लिए सरकार से मंजूरी मिल गई है. इन योजनाओं का मकसद देश में ही रक्षा उपकरण बनाने की क्षमता को मजबूत करना है.
ऑपरेशन ऊर्जा सुरक्षा में कार्गो को सुरक्षा
वाइस एडमिरल कोचर ने बताया कि भारतीय नौसेना ने 'ऑपरेशन ऊर्जा सुरक्षा' के तहत 1.7 अरब डॉलर के कार्गो की सुरक्षित आवाजाही में मदद की. इस अभियान के दौरान होर्मुज जलडमरूमध्य से भारत आने वाले तेल और गैस के जहाजों को सुरक्षा देने पर जोर दिया गया.
नौसेना की इन योजनाओं से समुद्र में भारत की सैन्य क्षमता बढ़ाने में मदद मिलेगी. साथ ही, तेल और गैस की आपूर्ति करने वाले अहम समुद्री रास्तों की सुरक्षा भी मजबूत होगी.