ब्रह्मोस और अस्‍त्र मिसाइल, 2200 KMPH की स्‍पीड... भारतीय वायुसेना को मिलेगा तेजस MK-1A फाइटर जेट

भारतीय वायुसेना (IAF) को जल्द ही एक अत्याधुनिक, पूरी तरह स्वदेशी रूप से निर्मित फाइटर जेट मिलने जा रहा है- तेजस MK-1A.

Indian Air Force will get Tejas MK-1A fighter jet
प्रतिकात्मक तस्वीर/ ANI

भारतीय वायुसेना (IAF) को जल्द ही एक अत्याधुनिक, पूरी तरह स्वदेशी रूप से निर्मित फाइटर जेट मिलने जा रहा है- तेजस MK-1A. इस विमान की पहली यूनिट अक्टूबर 2025 के अंतिम सप्ताह में भारतीय वायुसेना को सौंपे जाने की संभावना है. यह एक ऐसा क्षण है जो भारत के एयरोस्पेस क्षेत्र के इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय जोड़ता है.

तेजस MK-1A न केवल एक नया फाइटर जेट है, बल्कि यह भारत के स्वदेशी रक्षा उत्पादन के लिए एक बड़ी उपलब्धि का प्रतीक भी है. इसे 'आसमान का अर्जुन' कहा जा रहा है, जो पूरी तरह से उपयुक्त है, क्योंकि यह विमान आधुनिक युद्धक्षेत्र में दुश्मनों के लिए एक गंभीर चुनौती पेश करेगा.

तेजस MK-1A: लड़ाकू विमान की विशेषताएं

1. अभूतपूर्व गति और युद्ध क्षमता

तेजस MK-1A की अधिकतम गति मैक 1.8 (लगभग 2200 किमी प्रति घंटा) है.

यह जेट सुपरसोनिक श्रेणी का हल्का लड़ाकू विमान है जो बेहद तेज रिएक्शन टाइम और गतिशीलता के लिए डिज़ाइन किया गया है.

2. घातक हथियार प्रणाली

इसमें भारत में विकसित ‘अस्त्र’ एयर-टू-एयर मिसाइल को एकीकृत किया गया है, जो हवा में लंबी दूरी से दुश्मन विमानों को निशाना बना सकती है.

इसके अलावा इसे ब्रह्मोस-NG (न्यू जेनरेशन) मिसाइल से भी लैस किया जाएगा, जो इसे एक रणनीतिक स्ट्राइक प्लेटफॉर्म बना देगा.

इसमें स्मार्ट बम, लेजर गाइडेड हथियार और विविध प्रकार के रॉकेट और गोला-बारूद तैनात किए जा सकते हैं.

3. आधुनिक एवियॉनिक्स और रडार सिस्टम

तेजस MK-1A में Active Electronically Scanned Array (AESA) रडार लगा है जो दुश्मन की गतिविधियों को दूर से ट्रैक करने में सक्षम है.

इसमें जाम-रोधी कम्युनिकेशन सिस्टम, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सूट, और डिजिटल फ्लाई-बाय-वायर सिस्टम जैसी तकनीकें हैं, जो इसे विश्वस्तरीय लड़ाकू जेट के बराबर बनाती हैं.

HAL और तेजस प्रोजेक्ट की भूमिका

तेजस MK-1A को हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) द्वारा डिजाइन और निर्मित किया जा रहा है. HAL को फरवरी 2021 में भारतीय रक्षा मंत्रालय की ओर से 83 तेजस MK-1A लड़ाकू विमानों का ऑर्डर मिला था, जिसकी कुल लागत करीब ₹48,000 करोड़ है.

हालांकि डिलीवरी फरवरी 2024 से शुरू होनी थी, लेकिन अमेरिकी कंपनी GE Aerospace द्वारा इंजन आपूर्ति में हुई देरी के कारण कार्यक्रम में विलंब हुआ. GE कंपनी केवल एक या दो F404-IN20 इंजन ही प्रतिमाह उपलब्ध करा पा रही है, जिससे HAL की प्रोडक्शन रफ्तार प्रभावित हुई है.

अब HAL ने अगले 4 वर्षों में सभी 83 विमानों की आपूर्ति पूरी करने का लक्ष्य रखा है.

रक्षा मंत्री की मौजूदगी में पहली उड़ान

तेजस MK-1A की पहली डिलीवरी से पहले एक विशेष समारोह नासिक में आयोजित किया जाएगा, जिसमें रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के शामिल होने की संभावना है. वह HAL की उत्पादन इकाई का दौरा करेंगे और इस परियोजना में योगदान देने वाले इंजीनियरों तथा तकनीशियनों से बातचीत करेंगे.

वायुसेना के स्क्वाड्रन गैप की भरपाई में मदद

1. स्क्वाड्रन की कमी

भारतीय वायुसेना को अपनी सामरिक जरूरतों को पूरा करने के लिए कम से कम 42 स्क्वाड्रन की आवश्यकता है. फिलहाल वायुसेना के पास सिर्फ 29 स्क्वाड्रन हैं. हाल ही में दो MiG-21 स्क्वाड्रन के सेवानिवृत्त होने के कारण यह अंतर और बढ़ गया है.

2. तेजस की भूमिका

तेजस MK-1A विमानों की तैनाती से इस गैप को तेजी से भरा जा सकेगा. प्रत्येक स्क्वाड्रन में लगभग 18 से 20 विमान होते हैं, और यदि अतिरिक्त 97 तेजस MK-1A का प्रस्ताव भी मंजूर हो जाता है, तो कुल संख्या 180 विमान हो जाएगी. इससे IAF की परिचालन क्षमता में महत्वपूर्ण बढ़त होगी.

भविष्य की योजनाएं: AMCA और MRFA प्रोजेक्ट

1. AMCA: भारत का 5वीं पीढ़ी का फाइटर जेट

  • भारत सरकार ने 15,000 करोड़ रुपये की लागत से Advanced Medium Combat Aircraft (AMCA) प्रोजेक्ट को हरी झंडी दी है.
  • यह एक स्टील्थ फाइटर होगा, जो पूर्ण रूप से स्वदेशी तकनीक से विकसित किया जाएगा.
  • AMCA की पहली उड़ान 2028 तक संभव मानी जा रही है.

2. MRFA प्रोजेक्ट

  • भारतीय वायुसेना का 114 मल्टी रोल फाइटर एयरक्राफ्ट (MRFA) प्रोजेक्ट भी प्रक्रिया में है.
  • इस प्रोजेक्ट के अंतर्गत ‘मेक इन इंडिया’ राफेल विकल्प पर भी विचार किया जा रहा है.

डसॉल्ट एविएशन को अब तक 533 राफेल ऑर्डर मिल चुके हैं और कंपनी हर महीने औसतन चार विमान बना रही है.

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