'कुछ बड़े देश दुनिया नहीं चलाते, भारत अब दबाव में नहीं आएगा...' ट्रंप की टैर‍िफ धमकी पर बोले जयशंकर

आज की वैश्विक राजनीति में भारत अब पहले जैसा नहीं रहा. जहां एक समय था जब कुछ गिने-चुने देशों की मनमानी पूरी दुनिया पर हावी रहती थी, वहीं अब भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि वह न तो किसी के दबाव में आएगा और न ही किसी की धमकी से अपनी नीति बदलेगा.

India will no longer succumb to pressure Jaishankar said on tariff threat
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आज की वैश्विक राजनीति में भारत अब पहले जैसा नहीं रहा. जहां एक समय था जब कुछ गिने-चुने देशों की मनमानी पूरी दुनिया पर हावी रहती थी, वहीं अब भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि वह न तो किसी के दबाव में आएगा और न ही किसी की धमकी से अपनी नीति बदलेगा. इस बात को देश के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने हाल ही में BIMSTEC ट्रेडिशनल म्यूजिक फेस्टिवल के मंच से बेबाकी से रखा.

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत को टैरिफ बढ़ाने और रूस से तेल आयात पर रोक लगाने जैसी धमकियों के बीच जयशंकर का यह बयान बेहद अहम माना जा रहा है. ट्रंप ने हाल ही में एक साक्षात्कार में कहा था कि अगर भारत रूस से तेल खरीदता रहा, तो उसे इसके गंभीर आर्थिक परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं. लेकिन भारत की प्रतिक्रिया से स्पष्ट है कि वह अब दबाव की राजनीति से प्रभावित होने वाला देश नहीं रहा.

कुछ देश तय करते थे कि बाकी क्या करें: जयशंकर

‘सप्तसुर: सेवन नेशंस, वन मेलोडी’ नामक इस सांस्कृतिक आयोजन में बोलते हुए विदेश मंत्री ने कहा, "आज का दौर जटिल और अनिश्चित जरूर है, लेकिन यह भी सच है कि अब दुनिया बदल रही है. अब वह समय नहीं रहा जब कुछ ताकतवर देश अपनी मर्जी पूरी दुनिया पर थोपते थे और बाकी देश केवल तालियां बजाते थे."

उन्होंने यह भी कहा कि आज ज़रूरत इस बात की है कि वैश्विक व्यवस्था समावेशी हो, ऐसी व्यवस्था जिसमें हर देश की बात सुनी जाए, न कि केवल उन देशों की जो सामरिक या आर्थिक रूप से मजबूत हैं.

जयशंकर का यह बयान अमेरिका की उस नीति की तीखी आलोचना मानी जा रही है, जिसमें वह अलग-अलग देशों को चीन, रूस या ईरान जैसे राष्ट्रों से संबंध रखने पर प्रतिबंधों और टैरिफ के जरिए डराने की कोशिश करता है.

परंपरा और संस्कृति की भूमिका पर जोर

जयशंकर ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि वैश्विक संतुलन केवल राजनीतिक या आर्थिक स्तर पर नहीं बनता, बल्कि सांस्कृतिक आधार भी उतना ही महत्वपूर्ण होता है. उन्होंने कहा, "परंपराएं यह तय करती हैं कि हम कौन हैं. जब तक कोई समाज अपनी सांस्कृतिक पहचान को लेकर सजग नहीं होता, तब तक वह अपने भविष्य की दिशा तय नहीं कर सकता."

इस बात को वे सांस्कृतिक कूटनीति से जोड़ते हैं- एक ऐसा तरीका जिससे भारत न केवल अपनी सांस्कृतिक विरासत को दुनिया के सामने रखता है, बल्कि इसके जरिए वह वैश्विक संबंधों में एक सॉफ्ट पावर के रूप में भी उभरता है.

ट्रंप की धमकियों पर भारत का शांत लेकिन दृढ़ जवाब

डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत को रूस से तेल खरीदने पर संभावित कार्रवाई की चेतावनी दिए जाने के बाद यह पहली बार नहीं है जब भारत ने कड़ा रुख दिखाया है. बीते महीनों में भी जब रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद पश्चिमी देशों ने भारत पर दबाव बनाने की कोशिश की थी कि वह रूस से दूरी बनाए, तब भी भारत ने साफ कर दिया था कि उसकी विदेश नीति ‘स्वतंत्र और रणनीतिक स्वायत्तता’ के सिद्धांत पर आधारित है.

जयशंकर पहले भी कह चुके हैं, "भारत अपने राष्ट्रीय हितों को सर्वोपरि रखता है. हम किसी और के एजेंडे पर काम नहीं करेंगे. हमें अपनी ऊर्जा ज़रूरतें पूरी करनी हैं और इसके लिए जो सही विकल्प है, हम वही चुनेंगे."

भारत रूस से सस्ते दामों पर कच्चा तेल खरीदता है जिससे देश की ऊर्जा जरूरतें पूरी होती हैं और घरेलू महंगाई पर भी नियंत्रण बना रहता है. पश्चिमी देशों को यह खटकता जरूर है, लेकिन भारत की प्राथमिकताएं स्पष्ट हैं- देशहित सर्वोपरि.

भारत बदल चुका है: वैश्विक मंच पर नई भूमिका

उन्होंने कहा, "जयशंकर ने इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व को भी रेखांकित किया. उन्होंने कहा कि BIMSTEC सम्मेलन में पीएम मोदी ने जो वादा किया था, एक क्षेत्रीय सांस्कृतिक उत्सव आयोजित करने का उसे निभा दिया गया है. “यह केवल एक सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि एक संदेश है कि भारत अपनी अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं को गंभीरता से लेता है और उन्हें निभाता भी है."

जयशंकर ने अपनी व्यक्तिगत रुचियों का जिक्र करते हुए कहा कि उन्हें दुनिया को समझने की शुरुआत किताबों और संगीत से हुई थी. उन्होंने कहा, "संगीत में वह ताकत होती है जो सीधे समाज की आत्मा से जुड़ती है. संस्कृति और कला के माध्यम से हम देशों के बीच न केवल संवाद बढ़ा सकते हैं, बल्कि स्थायी सहयोग की बुनियाद भी रख सकते हैं."

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