India Russia Oil Trade: भारत ने हाल ही में अमेरिका द्वारा रूस से तेल खरीद पर प्रस्तावित नए बिल के संबंध में कड़ा रुख अपनाया है. अमेरिका की तरफ से यह बिल तैयार किया गया है, जिसमें उन देशों पर 500% तक जुर्माना लगाने की बात कही गई है जो रूस से तेल खरीदते हैं. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने शुक्रवार को साप्ताहिक प्रेस ब्रीफिंग में कहा कि भारत अपनी ऊर्जा नीति किसी भी बाहरी दबाव में बदलने वाला नहीं है.
उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत अपने 140 करोड़ लोगों के हितों की रक्षा के लिए सस्ते और भरोसेमंद ईंधन के स्रोत तलाशता रहेगा. जायसवाल ने कहा, “हमारी प्राथमिकता हमेशा देश की ऊर्जा सुरक्षा रही है. किसी भी देश से तेल खरीदने का निर्णय भारत अपनी जरूरतों और ग्लोबल मार्केट की परिस्थितियों के हिसाब से स्वतंत्र रूप से करता है. अमेरिका के किसी भी दबाव से हम अपनी नीति नहीं बदलेंगे.”
अमेरिका के ‘सैंक्शनिंग रूस एक्ट 2025’ पर भारत की प्रतिक्रिया
विदेश मंत्रालय ने अमेरिका के ‘सैंक्शनिंग रशिया एक्ट 2025’ पर लगातार नजर बनाए रखी है. रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत की ऊर्जा खरीद की रणनीति स्पष्ट और पारदर्शी है. उन्होंने बताया कि भारत दुनिया के हर ऊर्जा बाजार को देख रहा है और किसी भी स्थिति में 1.4 अरब लोगों की ऊर्जा सुरक्षा से समझौता नहीं करेगा.
अमेरिका के मंत्री के बयानों पर भारत का पलटवार
विदेश मंत्रालय ने अमेरिकी कॉमर्स सेक्रेटरी के हालिया बयानों को भी खारिज कर दिया है. रणधीर जायसवाल ने बताया कि अमेरिकी पक्ष की जानकारी सटीक नहीं है. भारत ने याद दिलाया कि दोनों देशों के बीच 13 फरवरी 2025 से व्यापारिक समझौते को लेकर गंभीर चर्चा चल रही है.
विदेश मंत्रालय ने कहा कि कई दौर की बातचीत में दोनों पक्ष समझौते के काफी करीब पहुंचे थे. भारत का रुख है कि किसी भी समझौते में दोनों देशों के हितों का संतुलन होना चाहिए और बातचीत जारी रहेगी.
पीएम मोदी और ट्रंप के बीच 8 बार हुई बातचीत
भारत ने साल 2025 के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच 8 बार फोन पर बातचीत की जानकारी भी साझा की. इन वार्ताओं में द्विपक्षीय साझेदारी, व्यापारिक मुद्दे और रणनीतिक सहयोग जैसे अहम विषय शामिल थे. इससे यह स्पष्ट होता है कि दोनों देशों के नेतृत्व के बीच सीधा संवाद और रणनीतिक संपर्क बना हुआ है.
बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हमले: भारत ने जताई चिंता
भारत ने बांग्लादेश में लगातार बढ़ रहे सांप्रदायिक हमलों पर गहरी चिंता व्यक्त की है. प्रवक्ता ने कहा कि वहाँ हिंदुओं के घर और व्यवसाय लक्षित हो रहे हैं और ये घटनाएं अक्सर राजनीतिक या निजी मामलों के पीछे छुपाई जाती हैं.
विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि दोषियों को बचाना और घटनाओं को नजरअंदाज करना खतरनाक संकेत है और बांग्लादेश प्रशासन को तुरंत कठोर कार्रवाई करनी चाहिए. भारत ने कहा कि अल्पसंख्यक समुदाय में भय और असुरक्षा बढ़ रही है और यह स्थिति स्थायी तौर पर नहीं रह सकती.
शक्सगाम घाटी में चीन और पाकिस्तान पर भारत का रुख
भारत ने पीओके के शक्सगाम घाटी क्षेत्र में चीन की बढ़ती घुसपैठ और अवैध निर्माण को लेकर भी स्पष्ट रुख अपनाया है. विदेश मंत्रालय ने कहा कि यह पूरा क्षेत्र भारत का अखंड हिस्सा है और 1963 में चीन और पाकिस्तान के बीच हुआ समझौता अवैध और अमान्य है. भारत ने स्पष्ट किया कि CPEC (चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा) को भी मान्यता नहीं दी जाएगी, क्योंकि यह भारत की संप्रभुता का उल्लंघन करता है.
मंत्रालय ने चेतावनी दी कि जमीन पर किसी भी बदलाव को भारत बर्दाश्त नहीं करेगा और सुरक्षा व हितों की रक्षा के लिए हर कदम उठाने का अधिकार सुरक्षित रखता है.विदेश मंत्रालय ने कहा कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के केंद्र शासित प्रदेश भारत के अभिन्न अंग हैं और किसी भी तरह के विदेशी हस्तक्षेप को स्वीकार नहीं किया जाएगा.
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