2020 के दिल्ली दंगों से जुड़े षड्यंत्र के आरोपी उमर खालिद को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आई एक टिप्पणी ने नया विवाद खड़ा कर दिया है. न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी की ओर से उमर खालिद के समर्थन में कही गई बातों पर भारत सरकार ने कड़ा और स्पष्ट रुख अपनाया है. भारत ने दो टूक कहा है कि विदेशी जनप्रतिनिधियों को भारत के आंतरिक मामलों पर टिप्पणी करने से बचना चाहिए और उन्हें अपने मतदाताओं द्वारा सौंपी गई जिम्मेदारियों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए.
यह विवाद उस समय सामने आया जब न्यूयॉर्क के मेयर बनने के बाद जोहरान ममदानी की एक पुरानी चिट्ठी सार्वजनिक हुई. इस पत्र में उन्होंने तिहाड़ जेल में बंद उमर खालिद के प्रति सहानुभूति जताई थी और भारत की न्यायिक प्रक्रिया को लेकर सवाल खड़े करने की कोशिश की थी. इस चिट्ठी में खालिद पर लगे गंभीर आरोपों का कोई उल्लेख नहीं था, बल्कि भारतीय न्यायपालिका को लेकर अप्रत्यक्ष टिप्पणी की गई थी, जिसे भारत में अनुचित और पक्षपातपूर्ण माना गया.
भारत सरकार की सख्त प्रतिक्रिया
इस पूरे घटनाक्रम पर भारत के विदेश मंत्रालय ने कड़ा रुख अपनाया. शुक्रवार को विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बिना किसी का नाम लिए कहा कि लोकतांत्रिक देशों के जनप्रतिनिधियों से यह अपेक्षा की जाती है कि वे दूसरे देशों की न्यायपालिका की स्वतंत्रता का सम्मान करें. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों को ऐसे विषयों पर टिप्पणी करते समय संयम और मर्यादा बरतनी चाहिए.
विदेश मंत्रालय के अनुसार, भारत की न्यायिक प्रणाली स्वतंत्र है और संवैधानिक ढांचे के भीतर काम करती है. ऐसे में बाहरी हस्तक्षेप या पूर्वाग्रह पर आधारित टिप्पणियां न केवल अनुचित हैं, बल्कि द्विपक्षीय संबंधों के लिहाज से भी सही नहीं मानी जा सकतीं.
“अपने कार्यक्षेत्र पर ध्यान दें”
मंत्रालय ने यह भी कहा कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर बैठे नेताओं को अपने व्यक्तिगत विचारों या पूर्वाग्रहों को सार्वजनिक करने से बचना चाहिए. भारत का स्पष्ट संदेश था कि जो जिम्मेदारियां किसी नेता को उसके नागरिकों ने सौंपी हैं, उसी पर उसका फोकस होना चाहिए, न कि किसी अन्य देश की आंतरिक न्यायिक प्रक्रिया पर टिप्पणी करना.
पहले भी हो चुका है विवाद
गौरतलब है कि यह पहला मौका नहीं है जब यह मामला चर्चा में आया हो. पिछले साल दिसंबर में उमर खालिद के पिता की न्यूयॉर्क में जोहरान ममदानी से मुलाकात हुई थी. उस दौरान एक नोट सौंपे जाने की बात सामने आई थी, जिसे लेकर पहले भी विवाद खड़ा हो चुका था. अब मेयर बनने के बाद उस पुराने नोट के सार्वजनिक होने से मामला फिर तूल पकड़ गया है.
उमर खालिद पर लगे गंभीर आरोप
उमर खालिद 2020 के दिल्ली दंगों की साजिश से जुड़े मामले में आरोपी हैं और इस समय तिहाड़ जेल में बंद हैं. हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें जमानत देने से साफ इनकार कर दिया था. हालांकि, इसी मामले में अन्य पांच आरोपियों को लगभग पांच साल बाद कठोर शर्तों के साथ जमानत दी गई है, लेकिन अदालत ने उमर खालिद और उनके कथित सहयोगी शरजील इमाम को फिलहाल जेल से बाहर रखने को उचित नहीं माना.
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