India On Palestine: संयुक्त राष्ट्र में भारत ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि वह फिलिस्तीन की संप्रभुता, स्वतंत्रता और आत्मनिर्णय के अधिकार का पुरजोर समर्थन करता है. भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने गुरुवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा में फिलिस्तीन मुद्दे पर हुई बहस के दौरान यह बयान दिया. उन्होंने कहा कि भारत का मानना है कि मध्य-पूर्व में स्थायी शांति और स्थिरता केवल संवाद, कूटनीति और दो-राज्य समाधान के रास्ते से ही हासिल की जा सकती है.
हरीश ने कहा कि भारत फिलिस्तीनी जनता के साथ खड़ा है और एक स्वतंत्र, संप्रभु और आर्थिक रूप से व्यवहार्य फिलिस्तीनी राज्य के गठन का समर्थन करता है, जो इजरायल के साथ शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व में रह सके. यह बयान ऐसे समय में आया है जब इजरायल की संसद (नेसेट) ने वेस्ट बैंक के कुछ हिस्सों पर स्थायी नियंत्रण स्थापित करने के प्रस्ताव पर मतदान किया है, जिसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कड़े विरोध का सामना करना पड़ रहा है.
गाजा के पुनर्निर्माण और मानवीय सहायता पर भारत का जोर
भारतीय प्रतिनिधि ने कहा कि गाजा में जारी मानवीय संकट ने लाखों लोगों के जीवन को प्रभावित किया है और इस स्थिति से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय को तत्काल कदम उठाने की आवश्यकता है. उन्होंने बताया कि भारत ने फिलिस्तीन को अब तक 17 करोड़ डॉलर से अधिक की वित्तीय सहायता प्रदान की है. इसमें लगभग 4 करोड़ डॉलर की विकास परियोजनाएं शामिल हैं, जो स्वास्थ्य, शिक्षा और पुनर्वास से जुड़ी हैं.
हरीश ने कहा कि भारत ने हमेशा मानवीय सहायता को राजनीति से ऊपर रखा है और गाजा के पुनर्निर्माण के लिए अपनी प्रतिबद्धता जारी रखेगा. उन्होंने अंतरराष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि “गाजा के लोग केवल मदद नहीं, बल्कि स्थायी समाधान चाहते हैं, और यह तभी संभव है जब सभी पक्ष कूटनीतिक प्रयासों का सम्मान करें.”
अमेरिका, मिस्र और कतर की भूमिका की सराहना
पी. हरीश ने अपने संबोधन में हाल ही में हुए गाजा शांति समझौते को आगे बढ़ाने में अमेरिका, मिस्र और कतर की मध्यस्थता की भूमिका की सराहना की. उन्होंने विशेष रूप से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उस पहल का ज़िक्र किया, जिसने शांति वार्ताओं को आगे बढ़ाने में एक नई गति प्रदान की थी.
हरीश ने कहा, “अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जो सकारात्मक कूटनीतिक माहौल बना है, उसे बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है. यह वही समय है जब सभी पक्षों को जिम्मेदारी के साथ आगे बढ़ना चाहिए और किसी भी प्रकार के एकतरफा कदमों से बचना चाहिए जो शांति प्रक्रिया को नुकसान पहुंचा सकते हैं.”
“शांति, सह-अस्तित्व और संवाद”
भारतीय प्रतिनिधि ने जोर दिया कि नई दिल्ली हमेशा से यह मानती आई है कि फिलिस्तीन और इजरायल के बीच विवाद का हल केवल शांतिपूर्ण वार्ता से ही संभव है. भारत का यह रुख दशकों से समान बना हुआ है.
हरीश ने कहा, “भारत किसी भी ऐसे कदम का समर्थन नहीं करता जो क्षेत्रीय स्थिरता को खतरे में डाले या शांति प्रक्रिया को पटरी से उतारे. हमें उम्मीद है कि सभी संबंधित पक्ष संवाद और कूटनीति के रास्ते पर वापस लौटेंगे, ताकि क्षेत्र में स्थायी शांति स्थापित हो सके.”
उन्होंने यह भी दोहराया कि भारत दोनों पक्षों, फिलिस्तीन और इजरायल से मित्रवत संबंध रखता है और किसी के भी खिलाफ नहीं है. लेकिन भारत का मानना है कि एक न्यायसंगत और संतुलित समाधान ही मध्य-पूर्व की स्थायी शांति का मार्ग प्रशस्त कर सकता है.
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