भारत को अमेरिका से मिला दूसरा GE-404 इंजन, तेजस LCA मार्क-1A में लगाया जाएगा, बढ़ेंगी वायुसेना की ताकत

भारत को अमेरिका से स्वदेशी हल्के लड़ाकू विमान (LCA) तेजस मार्क-1A के लिए दूसरा GE-404 इंजन प्राप्त हुआ है.

India receives second GE-404 engine from America
प्रतीकात्मक तस्वीर/Photo- ANI

नई दिल्ली: भारत को अमेरिका से स्वदेशी हल्के लड़ाकू विमान (LCA) तेजस मार्क-1A के लिए दूसरा GE-404 इंजन प्राप्त हुआ है. यह इंजन हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) को सौंपा गया है और इसका इस्तेमाल अगले चरण में बनने वाले तेजस फाइटर जेट्स में किया जाएगा.

रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, इस साल के अंत तक कुल 12 GE-404 इंजन भारत पहुंचेंगे, जिससे तेजस प्रोग्राम को गति मिलने की उम्मीद है. यह डिलीवरी अमेरिका और भारत के बीच बढ़ती रक्षा साझेदारी का भी संकेत देती है.

83 तेजस मार्क-1A विमानों का ऑर्डर

भारतीय वायुसेना ने HAL को 83 तेजस मार्क-1A विमानों का ऑर्डर दिया है, जिनकी डिलीवरी 2024 से 2028 के बीच की जानी है. इन विमानों के अलावा 97 अतिरिक्त यूनिट्स की खरीद पर भी अंतिम निर्णय प्रक्रिया में है.

HAL पर समयसीमा को लेकर दबाव

HAL ने फरवरी में कहा था कि तेजस डिलीवरी में तकनीकी कारणों से देरी हुई थी, जिसे अब ठीक कर लिया गया है. कंपनी के चेयरमैन डीके सुनील ने भरोसा दिलाया था कि जल्द वायुसेना को जेट्स मिलने शुरू हो जाएंगे. हालांकि, इसी महीने बेंगलुरु एयर शो में वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल वीआर चौधरी ने डिलीवरी में हुई देरी को लेकर सार्वजनिक चिंता जाहिर की थी.

एक रिपोर्ट के अनुसार, वायुसेना प्रमुख ने HAL से साफ कहा था कि भरोसा बहाल करना उनकी प्राथमिकता होनी चाहिए.

LCA मार्क-1A: MiG श्रृंखला का उत्तराधिकारी

LCA मार्क-1A को भारतीय वायुसेना के पुराने MiG-21, MiG-23 और MiG-27 फाइटर जेट्स के प्रतिस्थापन के रूप में देखा जा रहा है. इस विमान की सबसे खास बात यह है कि यह 65% से अधिक स्वदेशी तकनीक से बना है, जो ‘मेक इन इंडिया’ और आत्मनिर्भर भारत अभियानों के तहत देश की रणनीतिक क्षमता को दर्शाता है.

तेजस मार्क-1A को राजस्थान के बीकानेर स्थित नाल एयरबेस पर तैनात करने की योजना है, जिससे पश्चिमी मोर्चे पर भारत की वायुसेना की ताकत और भी मजबूत होगी.

पीएम मोदी भी भर चुके हैं तेजस में उड़ान

नवंबर 2022 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बेंगलुरु में तेजस फाइटर जेट में उड़ान भरी थी. यह पहली बार था जब किसी भारतीय प्रधानमंत्री ने स्वदेशी फाइटर एयरक्राफ्ट में उड़ान भरी. इस प्रतीकात्मक कदम को स्वदेशी रक्षा तकनीक में विश्वास और प्रोत्साहन का संकेत माना गया.

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