अहमदाबाद: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के पूर्व प्रमुख, ए एस किरण कुमार ने हाल ही में भारत के अंतरिक्ष मिशनों के भविष्य को लेकर महत्वपूर्ण घोषणा की. उन्होंने बताया कि भारत केवल चंद्रमा पर मानव भेजने की योजना नहीं बना रहा, बल्कि आने वाले दशकों में अंतरिक्ष में एक स्थायी ठिकाना स्थापित करने की दिशा में भी काम कर रहा है. यह घोषणा एस्ट्रोनॉमिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया (ASI) के 5वें सम्मेलन के उद्घाटन सत्र के दौरान की गई, जहां कुमार ने भारतीय अंतरिक्ष विज्ञान के भविष्य पर अपने विचार साझा किए.
भारत के भविष्य के अंतरिक्ष मिशन
उन्होंने कहा, ‘‘अब से लेकर 2040 तक अंतरिक्ष गतिविधियों में कई मिशन चलाए जाने वाले हैं. 2040 तक ISRO की योजना भारतीयों को चंद्रमा पर भेजने और उन्हें सुरक्षित वापस लाने की है. भारत 2040 तक एक अंतरिक्ष स्टेशन बनाने की दिशा में भी काम कर रहा है.’’
मीडिया से बातचीत में ISRO के पूर्व प्रमुख ने देश के स्पेस रिसर्च के बारे में विस्तार से बताया. उन्होंने कहा कि निकट भविष्य में चंद्रयान से जुड़ा एक मिशन होगा और जापान के साथ लैंडर और रोवर पर काम चल रहा है. कुमार ने कहा, ‘‘हमें चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र में कुछ विशिष्ट जानकारी खोजने का प्रयास करना चाहिए. यह तो आगे की गतिविधियों की बस, शुरुआत होगी.’’
चंद्रयान के नए मिशन और अंतरराष्ट्रीय साझेदारी
कुमार ने चंद्रयान से जुड़ी एक और अहम जानकारी साझा की. उन्होंने बताया कि निकट भविष्य में जापान के साथ मिलकर एक साझा मिशन शुरू किया जाएगा, जिसमें चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव (South Pole) की विशिष्ट जानकारी जुटाने के लिए उन्नत लैंडर और रोवर भेजे जाएंगे.
भविष्य के बड़े लक्ष्य
भारत की योजना साल 2040 तक अपने अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्रमा की सतह पर उतारने और उन्हें सुरक्षित पृथ्वी पर वापस लाने की है. चंद्रमा मिशन के साथ-साथ भारत 2040 तक अपना स्वयं का अंतरिक्ष स्टेशन स्थापित करने के लक्ष्य पर काम कर रहा है.
सामाजिक लाभ हासिल करना मुख्य उद्देश्य
किरण कुमार ने कहा कि शैक्षणिक संस्थानों, इंजीनियरिंग संस्थानों और प्राइवेट कंपनियों के लिए भी भारत के स्पेस रिसर्च में योगदान देने के कई अवसर खुलेंगे. उद्घाटन सत्र के दौरान वैज्ञानिकों और छात्रों की मौजूदगी में अपने संबोधन में किरण कुमार ने कहा कि भारत एकमात्र ऐसा देश है जिसने स्पेस टेक्नोलॉजी का निर्माण मुख्य रूप से सामाजिक लाभ के लिए शुरू किया, न कि सैन्य उद्देश्यों के लिए.
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