भारत के सामने फिर रोया पाकिस्तान, UN में सिंधु जल संधि पर सुनाया अपना दुखड़ा, कह दी ये बड़ी बात

पाकिस्तान ने एक बार फिर से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में भारत से सिंधु जल संधि को बहाल करने की अपील की है. पाकिस्तान के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत असीम इफ्तिखार अहमद ने भारत पर आरोप लगाए और खुद को पीड़ित बताया.

India Pakistan Indus Water Treaty United Nations
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पाकिस्तान ने एक बार फिर से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में भारत से सिंधु जल संधि को बहाल करने की अपील की है. पाकिस्तान के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत असीम इफ्तिखार अहमद ने भारत पर आरोप लगाए और खुद को पीड़ित बताया. उनका कहना था कि भारत ने एकतरफा तरीके से सिंधु जल संधि को निलंबित किया है, जिससे पाकिस्तान को भारी नुकसान उठाना पड़ा है. इसके साथ ही उन्होंने यह भी दावा किया कि भारत इस संधि का इस्तेमाल अब हथियार के रूप में कर रहा है.

भारत पर बेबुनियाद आरोप और पाकिस्तान की पीड़ा

पाकिस्तानी राजदूत ने संयुक्त राष्ट्र में अपने बयान में भारत पर आरोप लगाया कि भारत ने सिंधु जल संधि के निलंबन के जरिए पाकिस्तान के करोड़ों नागरिकों को संकट में डाल दिया है. उन्होंने कहा, "भारत का यह एकतरफा निर्णय सिंधु जल संधि की मूल भावना को कमजोर कर रहा है. इसके कारण लाखों लोग जिनका जीवन इस पानी पर निर्भर है, उनके जीवन में खतरे का सामना करना पड़ रहा है."

इसके साथ ही इफ्तिखार अहमद ने यह भी कहा कि यह न केवल पाकिस्तान के लिए एक संकट है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय जल कानून को भी कमजोर कर रहा है. उनका कहना था कि भारत द्वारा किया गया यह कदम लंबे समय से चले आ रहे जल बंटवारे की प्रक्रिया को प्रभावित कर रहा है, जिसका प्रभाव केवल पाकिस्तान ही नहीं, बल्कि पूरी अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था पर पड़ेगा.

1960 की सिंधु जल संधि का उल्लंघन

पाकिस्तानी राजदूत ने भारत के इस कदम को 1960 में हुई सिंधु जल संधि का उल्लंघन बताया. यह संधि विश्व बैंक की मध्यस्थता में दोनों देशों के बीच पानी के बंटवारे का एक महत्वपूर्ण दस्तावेज रही है, जिसे पाकिस्तान और भारत ने मिलकर मंजूरी दी थी. इस संधि के तहत पश्चिमी नदियों पर पाकिस्तान का नियंत्रण था और पूर्वी नदियों पर भारत का. इफ्तिखार अहमद ने इस संधि को "वैकल्पिक" और "अपरिवर्तनीय" बताया और कहा कि कोई भी पक्ष इसका एकतरफा निलंबन नहीं कर सकता.

पाकिस्तान की बढ़ती चिंता और याचिका

यह वही समय है जब पाकिस्तान ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि उसे एहसास हुआ है कि सिंधु जल संधि के निलंबन से उसे गंभीर आर्थिक और सामाजिक नुकसान हो सकता है. यह नुकसान विशेष रूप से पाकिस्तान के कृषि क्षेत्र और खाद्य सुरक्षा के लिए एक बड़ा संकट बन सकता है. इसीलिए पाकिस्तान ने विभिन्न मंचों पर इस संधि को फिर से बहाल करने की गुहार लगाई है.

पाकिस्तान के राजदूत ने कहा, "हम उम्मीद करते हैं कि भारत इस संधि का पूरी तरह से सम्मान करेगा और इसमें सामान्य कामकाजी प्रक्रिया को जल्द से जल्द बहाल करेगा." उन्होंने यह भी कहा कि कोई भी प्रावधान एकतरफा निलंबन की अनुमति नहीं देता, और इसलिए पाकिस्तान को संधि की पूर्ण वापसी का भरोसा है.

भारत का रुख और भविष्य में संभावना

भारत ने 2016 में पाकिस्तान पर आतंकी हमले के बाद सिंधु जल संधि को निलंबित करने का निर्णय लिया था. विशेषकर, पठानकोट और उरी हमलों के बाद भारत ने इस संधि के तहत पाकिस्तान के खिलाफ कड़े कदम उठाए थे. हालांकि, अब पाकिस्तान इस फैसले के नतीजों को समझते हुए सिंधु जल संधि की बहाली के लिए विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपील कर रहा है.

भारत के लिए यह एक संवेदनशील मुद्दा है क्योंकि सुरक्षा और जल संसाधनों के संबंध में देश की रणनीति में सिंधु जल संधि का महत्व अत्यधिक है. हालांकि, इसे लेकर दोनों देशों के बीच और कौन से कदम उठाए जाएंगे, यह आने वाले समय में ही स्पष्ट होगा.

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