नई दिल्ली: दुनिया के कई हिस्सों में आर्थिक गतिविधियां सुस्त पड़ने और भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने के बीच भारत के निर्यात से जुड़ी तस्वीर काफी मजबूत नजर आ रही है. वाणिज्य मंत्रालय के ताजा आंकड़े बताते हैं कि जुलाई में अमेरिका और चीन जैसे बड़े बाजारों में भारतीय सामान की मांग तेजी से बढ़ी है. खास बात यह है कि चीन को भारत का निर्यात करीब 65 फीसदी उछला है, जबकि अमेरिका को भी शिपमेंट में दोहरे अंकों की वृद्धि दर्ज की गई. ऐसे में सवाल उठता है कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारतीय उत्पादों के लिए इन बड़े बाजारों में मांग क्यों बढ़ रही है.
अमेरिका को निर्यात 9 अरब डॉलर के पार
वाणिज्य मंत्रालय के मुताबिक, जुलाई में अमेरिका को भारत का निर्यात सालाना आधार पर 12.85 फीसदी बढ़कर 9.02 अरब डॉलर हो गया. हालांकि, इसी दौरान अमेरिका से भारत का आयात भी 18.11 फीसदी बढ़कर 5.5 अरब डॉलर पहुंच गया. अप्रैल से जुलाई 2026-27 के बीच अमेरिका को भारतीय सामान का निर्यात 3 फीसदी बढ़कर 34.5 अरब डॉलर रहा, जबकि आयात 22.42 फीसदी बढ़कर 22.12 अरब डॉलर हो गया. दोनों देशों के बीच व्यापार समझौते को लेकर बातचीत जारी है और 24 जुलाई से भारत पर अमेरिका ने अतिरिक्त 10 फीसदी शुल्क भी लगाया है.
चीन को भारतीय निर्यात में 64.57 फीसदी उछाल
चीन के मामले में आंकड़े और भी ज्यादा चौंकाने वाले हैं. जुलाई में भारत से चीन को निर्यात 64.57 फीसदी बढ़कर 2.2 अरब डॉलर हो गया. अप्रैल-जुलाई 2026-27 के दौरान भी चीन को निर्यात में 35.97 फीसदी की वृद्धि दर्ज हुई और यह 7.78 अरब डॉलर तक पहुंच गया. हालांकि, चीन के साथ भारत का व्यापार संतुलन अभी भी काफी हद तक आयात के पक्ष में है. जुलाई में चीन से भारत का आयात 34.42 फीसदी बढ़कर 14.67 अरब डॉलर रहा, जबकि अप्रैल-जुलाई के दौरान यह 29.68 फीसदी बढ़कर 52.71 अरब डॉलर पहुंच गया.
सिंगापुर समेत कई बाजारों में बढ़ी भारतीय सामान की मांग
भारत के निर्यात की रफ्तार केवल अमेरिका और चीन तक सीमित नहीं रही. जुलाई में सिंगापुर को निर्यात सालाना आधार पर 83.7 फीसदी बढ़कर 1.6 अरब डॉलर हो गया. वित्त वर्ष 2026-27 के पहले चार महीनों में सिंगापुर को निर्यात 97.11 फीसदी की तेज वृद्धि के साथ 8.1 अरब डॉलर तक पहुंच गया. इसी अवधि में संयुक्त अरब अमीरात, नीदरलैंड, जर्मनी, दक्षिण अफ्रीका, तंजानिया, ऑस्ट्रेलिया, मलेशिया, श्रीलंका, इटली और वियतनाम जैसे देशों को भी भारत के निर्यात में सकारात्मक वृद्धि दर्ज की गई.
कुछ अहम बाजारों में निर्यात में आई गिरावट
जहां कई देशों में भारतीय सामान की मांग बढ़ी, वहीं कुछ बाजारों में निर्यात कमजोर भी पड़ा. जुलाई में ब्रिटेन, बांग्लादेश, सऊदी अरब और नेपाल को भारत के निर्यात में गिरावट दर्ज की गई. दूसरी ओर, रूस, दक्षिण कोरिया, सिंगापुर, जर्मनी, ओमान, मलेशिया, ताइवान और ब्राजील से भारत के आयात में बढ़ोतरी हुई. जून के आंकड़ों में ओमान, ताइवान और ब्राजील से आयात में खासा उछाल देखने को मिला. ओमान से आयात 150.36 फीसदी, ताइवान से 111.3 फीसदी और ब्राजील से 146.73 फीसदी बढ़ा.
निर्यात के मोर्चे पर भारत के लिए क्या संकेत?
इन आंकड़ों से संकेत मिलता है कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बावजूद भारतीय निर्यातकों को दुनिया के बड़े बाजारों में नए अवसर मिल रहे हैं. अमेरिका जैसे प्रमुख बाजार में निर्यात की स्थिर वृद्धि और चीन में तेज उछाल भारत के लिए सकारात्मक संकेत हैं. हालांकि, चीन के साथ बढ़ता आयात व्यापार घाटे की चुनौती को भी रेखांकित करता है. ऐसे में आने वाले महीनों में भारत के लिए निर्यात बढ़ाने के साथ-साथ व्यापार संतुलन को बेहतर करना भी अहम चुनौती होगी.
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