Asia Power Index 2025: दुनिया की शक्ति राजनीति लगातार बदल रही है, और इस बदलाव की तस्वीर एक बार फिर साफ हो गई है. ऑस्ट्रेलिया के प्रतिष्ठित लोवी इंस्टीट्यूट ने अपना एशिया पावर इंडेक्स 2025 जारी किया है, जिसने एशिया-प्रशांत क्षेत्र की शक्ति संरचना पर नई रोशनी डाली है. इस रिपोर्ट में 27 देशों का सैन्य, आर्थिक, कूटनीतिक और सांस्कृतिक प्रभाव के आधार पर विस्तृत मूल्यांकन किया गया है और नतीजे भारत के लिए खासे सकारात्मक रहे हैं.
भारत ने न केवल अपने प्रभाव को मजबूत किया है, बल्कि आधिकारिक रूप से ‘मेजर पावर’ की श्रेणी में खुद को स्थिर कर लिया है. वहीं पाकिस्तान इस बार भी शीर्ष 10 से बाहर रह गया है, जिससे क्षेत्रीय शक्ति समीकरण में उसका सीमित प्रभाव और स्पष्ट होता है.
सैयद अकबरुद्दीन ने रिपोर्ट को बताया महत्वपूर्ण
रिपोर्ट को शेयर करते हुए भारत के पूर्व राजनयिक सैयद अकबरुद्दीन ने इसे पढ़ने योग्य बताया. संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि रहे अकबरुद्दीन इस क्षेत्रीय शक्ति संतुलन को लंबे समय से करीब से देखते आए हैं. उनकी नजर में यह रिपोर्ट बताती है कि एशिया में शक्ति के मानक कैसे बदल रहे हैं और कौन-सा देश किस दिशा में आगे बढ़ रहा है.
टॉप 10 देशों की सूची: अमेरिका और चीन का दबदबा बरकरार, भारत तीसरे स्थान पर
एशिया पावर इंडेक्स 2025 के टॉप-10 देश इस प्रकार हैं:
भारत लगातार प्रगति कर रहा है और तीन ताकतवर देशों अमेरिका, चीन और भारत की नई त्रिकोणीय शक्ति संरचना में अपनी जगह मजबूत कर रहा है.
भारत की रैंकिंग में जबरदस्त सुधार, पाकिस्तान 16वें स्थान पर
2025 में भारत का स्कोर 0.9 पॉइंट बढ़ा है और उसने ज़रूरी 40-पॉइंट लिमिट फिर से हासिल कर ली है. भारत आर्थिक क्षमता और भविष्य संसाधन क्षमता जैसे दो महत्वपूर्ण क्षेत्रों में तीसरे स्थान पर पहुंच गया है यानी जापान को भी पीछे छोड़ दिया है. इसके मुकाबले पाकिस्तान को 16वां स्थान मिला है. खासतौर पर सांस्कृतिक प्रभाव में वह 22वें नंबर पर रहा है, जो उसके क्षेत्रीय प्रभाव को काफी कम दर्शाता है.
क्यों बढ़ रहा है भारत का प्रभाव?
रिपोर्ट में भारत जिस तेज़ी से आगे बढ़ रहा है, उसके पीछे कई बड़े कारण बताए गए हैं, जैसे अर्थव्यवस्था का तेजी से विस्तार, आंतरिक निवेश में वृद्धि, कूटनीतिक भागीदारी में मजबूती और रक्षा संबंधों और सैन्य क्षमता में स्थिर सुधार. यह पहली बार है जब भारत की इकोनॉमिक रिलेशनशिप रैंकिंग में महत्वपूर्ण उछाल देखने को मिला है.
अमेरिका की पकड़ कमजोर, लेकिन प्रभाव अब भी सबसे ज्यादा
अमेरिका का कुल स्कोर 1.2 पॉइंट घटा है, जो 2018 में इंडेक्स के शुरू होने के बाद से उसका सबसे कम स्कोर है. फिर भी मिलिट्री कैपेबिलिटी, आर्थिक क्षमता , भविष्य संसाधन और डिफेंस नेटवर्क, जैसे छह बड़े क्षेत्रों में अमेरिका की बढ़त कायम है.
लेकिन अमेरिका की सबसे कमजोर कड़ी डिप्लोमैटिक इन्फ्लुएंस रही, जहां उसका स्कोर गिरकर तीसरे स्थान पर आ गया. रिपोर्ट के अनुसार, इसका संबंध पूर्व राष्ट्रपति ट्रंप की वैश्विक नीतिगत छवि से भी जोड़ा गया है.
जापान, ऑस्ट्रेलिया, सिंगापुर जैसे देशों ने भी बढ़ाया प्रभाव
जापान की आर्थिक और तकनीकी क्षमता, ऑस्ट्रेलिया और सिंगापुर की क्षेत्रीय नीतियां, और दक्षिण कोरिया की सैन्य क्षमताएं, इन सबने मिलकर एशिया की शक्ति संरचना को मल्टी-पोलर बना दिया है.
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