Shaksgam Valley Conflict: जम्मू-कश्मीर की शक्सगाम घाटी एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय चर्चा में है. चीन ने इस क्षेत्र में अपनी इन्फ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं को लेकर भारत की आपत्तियों को पूरी तरह खारिज कर दिया है. चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) के तहत पाकिस्तान तक सड़क का निर्माण हो रहा है, और इस परियोजना में शक्सगाम घाटी से होकर गुजरने वाली सड़क पर भारत ने सवाल उठाया.
चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने 12 जनवरी 2026 को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में साफ शब्दों में कहा, "जिस इलाके को लेकर सवाल उठ रहे हैं, वह चीन का हिस्सा है. अपने ही इलाके में सड़क और अन्य विकास परियोजनाएं करना हमारा अधिकार है और इसमें कोई बाधा नहीं डाली जा सकती."
BIG BREAKING 🚨 Strong words by India
— News Algebra (@NewsAlgebraIND) January 13, 2026
"We have never recognised the so-called China–Pakistan Boundary Agreement of 1963"
"We also do not recognise the so-called China–Pakistan Economic Corridor, as it passes through Indian territory"
"Shaksgam Valley is an integral part of… https://t.co/WvEMs3H2k5 pic.twitter.com/MjTiLgLzka
माओ ने आगे कहा कि चीन और पाकिस्तान ने 1960 के दशक में इस क्षेत्र में सीमा तय करने के लिए समझौता किया था. उनका कहना था कि यह दो संप्रभु देशों के बीच हुआ फैसला था और इस पर कोई विवाद नहीं होना चाहिए.
CPEC और चीन का आर्थिक दृष्टिकोण
माओ निंग ने CPEC को आर्थिक सहयोग परियोजना बताया, जिसका मकसद स्थानीय लोगों की जीवनशैली और क्षेत्र के आर्थिक विकास को बढ़ाना है. उन्होंने जोर देकर कहा कि CPEC और शक्सगाम क्षेत्र में चल रही गतिविधियां चीन के कश्मीर पर रुख को प्रभावित नहीं करतीं. चीन का कहना है कि कश्मीर मुद्दा ऐतिहासिक और जटिल है, जिसे केवल भारत और पाकिस्तान आपसी बातचीत और शांतिपूर्ण माध्यम से सुलझा सकते हैं.
भारत की आपत्ति और रुख
भारत ने 9 जनवरी 2026 को ही शक्सगाम घाटी पर चीन के दावे को अवैध बताया. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, "शक्सगाम घाटी भारत का अभिन्न हिस्सा है. 1963 में पाकिस्तान और चीन के बीच हुआ सीमा समझौता भारत कभी मान्यता नहीं देगा.
CPEC परियोजना भी अवैध है क्योंकि यह भारत के कब्जे वाले इलाके से होकर गुजरती है." भारत का यह रुख साफ करता है कि शक्सगाम घाटी, गिलगित-बाल्टिस्तान और लद्दाख का भारत के अधिकार क्षेत्र में आना अब भी विवादित मुद्दा है.
शक्सगाम घाटी का ऐतिहासिक महत्व
शक्सगाम घाटी का इतिहास काफी जटिल रहा है. 1948 में पाकिस्तान ने इस क्षेत्र पर कब्जा किया और 1963 में इसे चीन को सौंप दिया. CPEC परियोजना 2013 से चल रही है, जिसमें सड़क, रेलवे, ऊर्जा और ग्वादर पोर्ट जैसी योजनाएं शामिल हैं. कुल मिलाकर इसका बजट करीब 60 बिलियन डॉलर का है.
रणनीतिक दृष्टिकोण से यह क्षेत्र बेहद महत्वपूर्ण है. चीन के लिए यह गलियारा अरब सागर तक सीधे पहुँच प्रदान करता है. भारत लगातार कहता रहा है कि CPEC उसकी संप्रभुता का उल्लंघन है.
तीन देशों के बीच तनाव बढ़ने का खतरा
शक्सगाम घाटी के मुद्दे ने भारत-चीन-पाकिस्तान के बीच रणनीतिक तनाव को फिर से बढ़ा दिया है. चीन का रुख पहले जैसा ही सख्त है, वहीं भारत अपने क्षेत्रीय अधिकारों पर अड़ा हुआ है. इस विवाद का भविष्य केवल राजनयिक वार्ता और अंतरराष्ट्रीय कानून पर निर्भर करेगा.
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