चीन और भारत, दोनों ही एशिया के बड़े सैन्य ताकतों में गिने जाते हैं. इन दोनों देशों ने पिछले कुछ दशकों में परमाणु हथियारों और मिसाइल तकनीक के क्षेत्र में जबरदस्त प्रगति की है. चीन की डोंगफेंग-5सी (DF-5C) और भारत की अग्नि-V (Agni-V) इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइलें (ICBM) दोनों ही अपने-अपने देशों की सबसे उन्नत परमाणु हथियार डिलीवरी सिस्टम मानी जाती हैं.
जहां DF-5C को चीन की लंबी दूरी की मिसाइलों में सबसे घातक माना जाता है, वहीं अग्नि-V भारत की रणनीतिक परमाणु नीति की रीढ़ बन चुकी है. लेकिन सवाल ये उठता है कि क्या DF-5C भारत के लिए खतरा है? और क्या भारत की अग्नि-V इसका जवाब देने में सक्षम है?
आइए, इन दोनों मिसाइलों की ताकत, तकनीक और रणनीतिक भूमिका का विस्तार से विश्लेषण करते हैं.
DF-5C मिसाइल: चीन की इंटरकॉन्टिनेंटल शक्ति
डोंगफेंग-5सी (DF-5C) चीन की सबसे अत्याधुनिक ICBM में से एक है, जिसे विशेष रूप से लंबे दूरी के परमाणु हमले के लिए डिज़ाइन किया गया है.
मुख्य तकनीकी विशेषताएं:
रेंज: लगभग 13,000 से 16,000 किलोमीटर
ईंधन प्रकार: लिक्विड-फ्यूल आधारित
पेलोड क्षमता: लगभग 3,900 किलोग्राम (1 से 3 मेगाटन तक का न्यूक्लियर वॉरहेड)
लंबाई: लगभग 32.6 मीटर
वजन: लगभग 183 टन
सटीकता (CEP): लगभग 800 मीटर
MIRV क्षमता: हां, DF-5C में MIRV (Multiple Independently targetable Reentry Vehicles) तकनीक है, जिससे यह एक ही लॉन्च में कई वॉरहेड्स को अलग-अलग लक्ष्यों पर दाग सकती है.
रणनीतिक महत्व:
DF-5C की लंबी दूरी और भारी पेलोड इसे अमेरिका, यूरोप और भारत जैसे देशों के खिलाफ एक गंभीर परमाणु हथियार बनाती है. MIRV तकनीक के चलते यह मिसाइल दुश्मन की एयर डिफेंस प्रणाली को भेदने में सक्षम है.
अग्नि-V मिसाइल: भारत की स्ट्रैटेजिक रीढ़
अग्नि-V भारत की सबसे शक्तिशाली बैलिस्टिक मिसाइल है, जिसे DRDO (रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन) ने विकसित किया है. यह मिसाइल भारत की न्यूनतम परमाणु प्रतिरोध नीति (Minimum Credible Deterrence) और No First Use सिद्धांत के तहत देश की सुरक्षा के लिए बहुत महत्वपूर्ण है.
मुख्य तकनीकी विशेषताएं:
रेंज: 5,000 से 8,000 किलोमीटर तक
ईंधन प्रकार: सॉलिड-फ्यूल आधारित
पेलोड क्षमता: 1,000–1,500 किलोग्राम (एक न्यूक्लियर वॉरहेड)
लंबाई: लगभग 17 मीटर
वजन: लगभग 50 टन
सटीकता (CEP): 10 से 100 मीटर
मोबिलिटी: रोड-मोबाइल और कैनिस्टर-लॉन्च्ड सिस्टम, जिससे यह मिसाइल कहीं भी आसानी से तैनात की जा सकती है और लॉन्च की जा सकती है.
रणनीतिक महत्व:
अग्नि-V की सबसे बड़ी ताकत इसकी मोबाइल तैनाती है. इसके कैनिस्टर सिस्टम के कारण दुश्मन को इसकी लॉन्चिंग लोकेशन का पता लगाना बेहद मुश्किल होता है. यह मिसाइल भारत को अपनी सीमाओं के बाहर रणनीतिक प्रतिक्रिया देने की ताकत देती है चाहे वो चीन हो या अन्य देश.
DF-5C बनाम अग्नि-V: पावरफुल कौन?

मुख्य अंतर:
क्या DF-5C भारत के लिए खतरा है?
तकनीकी रूप से, हाँ. DF-5C भारत के किसी भी क्षेत्र को निशाना बना सकती है. इसकी MIRV क्षमता के कारण यह एक ही समय में कई शहरों या ठिकानों पर हमला करने में सक्षम है. लेकिन केवल मिसाइल की शक्ति ही युद्ध की दिशा तय नहीं करती.
भारत ने पिछले दो दशकों में न्यूक्लियर डिटेरेंस (परमाणु प्रतिरोध) की दिशा में जबरदस्त प्रगति की है. भारत की न्यूक्लियर ट्रायड (थल, वायु और जल से परमाणु हमला करने की क्षमता) अब पूरी तरह से विकसित हो चुकी है. INS अरिहंत और INS अरिघाट जैसे न्यूक्लियर-सबमरीन से लॉन्च होने वाली K-4 जैसी मिसाइलें भारत को "सेकंड स्ट्राइक" की ताकत देती हैं, यानी यदि भारत पर पहले हमला हो, तो भी वह जवाब देने में सक्षम है.
इसके अलावा, भारत का बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस (BMD) सिस्टम जैसे पृथ्वी एयर डिफेंस (PAD) और एडवांस्ड एयर डिफेंस (AAD) भारत को मिसाइल हमलों से सुरक्षा प्रदान करने की दिशा में एक मजबूत कवच बनाता है.
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