IND vs ENG Test: एक पुरानी कहावत है, “टेस्ट मैच बल्लेबाज़ नहीं, गेंदबाज़ जिताते हैं.” गौतम गंभीर ने भी जब-जब क्रिकेट एक्सपर्ट के तौर पर कमेंट्री बॉक्स में बैठकर अपनी राय रखी, तो इस सोच को खुलकर समर्थन दिया. लेकिन अब जब वे टीम इंडिया के हेड कोच हैं, तो लगता है कि उन्होंने खुद ही इस मूल मंत्र को भुला दिया है.
इंग्लैंड के खिलाफ जारी टेस्ट सीरीज़ में गंभीर और कप्तान शुभमन गिल की जोड़ी ने कुछ चौंकाने वाले फैसले लिए हैं, जिनमें सबसे बड़ा फैसला है, कुलदीप यादव को लगातार प्लेइंग इलेवन से बाहर रखना. एक ऐसे दौर में जब टीम इंडिया विकेट के लिए जूझ रही है, कुलदीप जैसे विकेट-टेकिंग बॉलर को नजरअंदाज़ करना कई दिग्गजों को खटक रहा है.
आर अश्विन का तीखा कटाक्ष
आर अश्विन ने इस पर अपनी नाखुशी जताते हुए कहा कि अगर किसी ने उन्हें बताया होता कि कुलदीप शुरुआती चार टेस्ट नहीं खेलेंगे, तो वो चौंक जाते. उन्होंने वॉशिंगटन सुंदर को नंबर 8 पर खिलाने और फिर गेंदबाज़ी ना कराने पर भी सवाल उठाया. अश्विन ने कहा, “20-30 रन ज़्यादा जोड़ने के लिए हम बैटिंग को मज़बूत कर रहे हैं, लेकिन उस चक्कर में मैच जिताने वाले गेंदबाज़ को ही बाहर बिठा रहे हैं। यह मेरे समझ से बाहर है.”
क्यों कमजोर हो रही है भारतीय गेंदबाज़ी?
जसप्रीत बुमराह को छोड़ दें, तो गेंदबाज़ी आक्रमण न के बराबर असरदार लग रहा है. सिराज की लय में कमी है, शार्दुल ठाकुर लगातार रन दे रहे हैं, और युवा गेंदबाज़ जैसे कंबोज या कृष्णा अनुभव की कमी के चलते प्रभावित नहीं कर पा रहे. ऐसे में कुलदीप यादव की अनदेखी, एक रणनीतिक भूल साबित हो रही है.
क्या है गंभीर और गिल की रणनीति?
ऐसा प्रतीत होता है कि गंभीर-गिल की प्राथमिकता ‘बॉलिंग ऑलराउंडर’ को खिलाने की है.शायद उनका मानना है कि बल्लेबाज़ी गहराई मैच में फर्क ला सकती है, लेकिन इसकी कीमत गेंदबाज़ी की धार खोकर चुकाई जा रही है. टेस्ट क्रिकेट में 20 विकेट निकालना ही जीत की गारंटी है, और अगर टीम के पास ऐसा कोई विकल्प है जिसे विकेट लेने की कला आती है, जैसे कुलदीप यादव तो उसे नज़रअंदाज़ करना निश्चित रूप से आत्मघाती फैसला है.
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