नई दिल्ली: जैसे-जैसे नवरात्रि के बाद देशभर में दिवाली की तैयारियां जोरों पर हैं, इस बार का त्योहारी मौसम एक नया आर्थिक अध्याय लिखता दिखाई दे रहा है. प्रमुख व्यापारिक संगठन कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) के अनुसार, दिवाली 2025 पर देशभर में अनुमानित 4.75 लाख करोड़ रुपये की रिकॉर्डतोड़ खरीदारी हो सकती है, जो अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा माना जा रहा है.
दिल्ली जैसे प्रमुख महानगरों में भी इसी रुझान को देखा जा रहा है. कारोबारियों के अनुसार, केवल राजधानी दिल्ली में त्योहारी खरीदारी 75,000 करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है. खास बात यह है कि इस साल चीनी सामान बाजारों से लगभग गायब हो चुका है और उसकी जगह भारतीय स्वदेशी उत्पादों की मांग में जबरदस्त उछाल देखा गया है.
देसी उत्पादों की लोकप्रियता के पीछे की वजहें
CAIT के राष्ट्रीय महामंत्री और चांदनी चौक से सांसद प्रवीन खंडेलवाल ने बताया कि नवरात्रि के दौरान संगठन ने 35 प्रमुख शहरों में व्यापारियों और उपभोक्ताओं के बीच एक सर्वे कराया. इस सर्वे में दो प्रमुख कारक सामने आए, जो इस बार की बिक्री को नई ऊंचाई देने में सहायक बने हैं:
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का "स्वदेशी अपनाओ" और 'वोकल फॉर लोकल' से लेकर 'लोकल फॉर ग्लोबल' तक का दृष्टिकोण, जिसे देशभर के ग्राहकों ने खुले दिल से अपनाया है.
पिछले कुछ वर्षों में लगातार बढ़ती दिवाली की बिक्री ने भी बाजार में सकारात्मक माहौल बनाया है.
CAIT के अनुसार, पिछली चार दिवालियों में बिक्री इस प्रकार रही:
किन चीजों की हो रही है सबसे ज्यादा मांग?
इस साल त्योहारी बाजार में विभिन्न क्षेत्रों के भारतीय उत्पादों की मांग काफी तेजी से बढ़ी है. चीनी उत्पादों की अनुपस्थिति में घरेलू निर्माताओं और कारीगरों को एक बड़ा मंच मिला है.
जिन उत्पादों की मांग सबसे अधिक है, वे हैं:
देश के अलग-अलग हिस्सों में इन वस्तुओं की बिक्री में 40% से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है. इस उछाल से न केवल खुदरा व्यापारी बल्कि छोटे कारीगर, महिला स्वयं सहायता समूह और स्थानीय निर्माता भी लाभान्वित हो रहे हैं.
देशभर के बाजारों में दिख रही रौनक
चांदनी चौक के कपड़ा व्यापारी अभिषेक गनेड़ीवाला ने कहा कि बाजार में इस बार दिवाली और शादी दोनों का मिलाजुला सीजन है. उन्होंने बताया कि पिछले दो हफ्तों में ग्राहकों की भीड़ में भारी इजाफा हुआ है और आने वाले दिनों में यह रफ्तार और तेज होने की उम्मीद है.
दूसरी ओर, ऑल इंडिया ज्वेलर्स एंड गोल्डस्मिथ फेडरेशन के अध्यक्ष पंकज अरोड़ा का कहना है कि इस बार सोने-चांदी की कीमतों में उछाल के बावजूद ग्राहकों की खरीदारी में कोई कमी नहीं आई है. इसके विपरीत, निवेश के रूप में सोने और चांदी की मांग में वृद्धि देखी जा रही है. विशेषज्ञों का मानना है कि अगले वर्ष तक सोने के दामों में ₹10,000 तक की और बढ़ोतरी हो सकती है.
यह भारत के लिए 'इकोनॉमिक दिवाली'
CAIT के अध्यक्ष विपिन आहूजा ने कहा कि इस बार की दिवाली सिर्फ एक त्यौहार नहीं, बल्कि एक आर्थिक क्रांति बनती जा रही है. नवरात्रि से दशहरा तक के दौरान हुई बिक्री में भी रिकॉर्ड वृद्धि दर्ज की गई है. उन्होंने कहा, "आज देश का उपभोक्ता स्वदेशी उत्पादों के लिए जागरूक और प्रतिबद्ध है. 'वोकल फॉर लोकल' अब केवल एक नारा नहीं रहा, बल्कि यह एक व्यवहारिक आंदोलन बन चुका है."
चीनी उत्पाद क्यों गायब हुए बाजारों से?
इन कारणों से चीनी लाइटें, सजावटी सामान, खिलौने और इलेक्ट्रॉनिक आइटम्स जैसे उत्पाद इस बार बाजारों से गायब हैं, जिनकी पहले दिवाली पर बहुत अधिक बिक्री होती थी.
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