MEA On Iran: पश्चिम एशिया में तेजी से बदलते हालात के बीच भारत सरकार ने अपने नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए ईरान को लेकर अब तक का सबसे सख्त अलर्ट जारी किया है. ईरान में जारी राजनीतिक और सामाजिक उथल-पुथल ने अंतरराष्ट्रीय चिंता बढ़ा दी है और इसी के मद्देनज़र भारत ने अपने नागरिकों को लेकर कोई जोखिम न लेने का फैसला किया है.
विदेश मंत्रालय की साप्ताहिक प्रेस ब्रीफिंग में प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने न सिर्फ ईरान में रह रहे भारतीयों की स्थिति पर विस्तार से जानकारी दी, बल्कि चाबहार पोर्ट, भारत-जापान रणनीतिक रिश्तों, ब्रिक्स नौसैनिक अभ्यास, म्यांमार चुनाव और सलमान खान की फिल्म को लेकर चल रहे विवाद पर भी भारत का आधिकारिक रुख साफ किया.
ईरान में रह रहे 9000 भारतीयों को लेकर क्यों बढ़ी चिंता
विदेश मंत्रालय के मुताबिक, इस समय ईरान में करीब 9000 भारतीय नागरिक रह रहे हैं, जिनमें बड़ी संख्या छात्रों की है. मौजूदा हालात को देखते हुए भारत सरकार ने साफ शब्दों में कहा है कि वहां रह रहे सभी भारतीयों की सुरक्षा उसकी पहली जिम्मेदारी है. रणधीर जायसवाल ने बताया कि बीते कुछ दिनों में कई एडवाइजरी जारी की जा चुकी हैं और भारतीय नागरिकों को जल्द से जल्द ईरान छोड़ने की सलाह दी गई है.
सरकार ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि मौजूदा स्थिति में किसी भी भारतीय को ईरान यात्रा की अनुमति नहीं दी जा रही है. भारत का दूतावास वहां मौजूद छात्रों और अन्य नागरिकों के लगातार संपर्क में है और हर स्तर पर हालात पर नजर रखी जा रही है. मंत्रालय ने संकेत दिए हैं कि हालात अगर और बिगड़ते हैं तो अतिरिक्त कदम उठाने से भी सरकार पीछे नहीं हटेगी.
ईरान संकट के बीच भी चाबहार पोर्ट पर भारत को बड़ी राहत
ईरान के अंदरूनी हालात भले ही चिंता बढ़ा रहे हों, लेकिन भारत के लिए एक अहम रणनीतिक मोर्चे पर राहत की खबर भी सामने आई है. विदेश मंत्रालय ने पुष्टि की है कि अमेरिका के ट्रेजरी विभाग ने चाबहार पोर्ट परियोजना को लेकर भारत को बिना शर्त प्रतिबंधों से छूट दे दी है. यह छूट 26 अप्रैल 2026 तक लागू रहेगी.
रणधीर जायसवाल ने बताया कि भारत इस फ्रेमवर्क के तहत अमेरिका के साथ लगातार संवाद में है. चाबहार पोर्ट भारत के लिए सिर्फ एक बंदरगाह नहीं, बल्कि मध्य एशिया और अफगानिस्तान तक व्यापारिक पहुंच का अहम जरिया है. ऐसे समय में अमेरिका द्वारा दी गई यह छूट भारत की कूटनीतिक सफलता के तौर पर देखी जा रही है, खासकर तब जब ईरान को लेकर वैश्विक राजनीति काफी संवेदनशील बनी हुई है.
भारत-जापान रिश्तों में नया अध्याय, AI और डिफेंस पर खास फोकस
भारत और जापान के रणनीतिक संबंधों को लेकर भी विदेश मंत्रालय ने अहम जानकारी साझा की. जापान के विदेश मंत्री 15 से 17 जनवरी तक भारत दौरे पर हैं. इस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की और इसके बाद विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ 18वीं भारत-जापान रणनीतिक वार्ता में हिस्सा लिया.
बैठक में दोनों देशों ने व्यापार, रक्षा सहयोग और सप्लाई चेन को मजबूत करने पर गहन चर्चा की. खास बात यह रही कि भारत और जापान ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर एक नया डायलॉग लॉन्च करने का फैसला किया है. यह पहल भविष्य की तकनीक, इनोवेशन और डिजिटल सहयोग को नई दिशा देने वाली मानी जा रही है. विदेश मंत्रालय ने यह भी बताया कि साल 2027 में भारत और जापान अपने द्विपक्षीय संबंधों के 75 साल पूरे होने का जश्न मनाएंगे.
म्यांमार चुनाव और ब्रिक्स नौसैनिक अभ्यास पर भारत का स्पष्ट रुख
म्यांमार में प्रस्तावित चुनावों को लेकर भारत ने समावेशी और निष्पक्ष प्रक्रिया की मांग दोहराई है. विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत चाहता है कि म्यांमार में सभी वर्गों की भागीदारी के साथ लोकतांत्रिक प्रक्रिया आगे बढ़े.
वहीं दक्षिण अफ्रीका में होने वाले ब्रिक्स नौसैनिक अभ्यास को लेकर भी स्थिति साफ कर दी गई है. विदेश मंत्रालय ने पुष्टि की है कि भारत इस अभ्यास में हिस्सा नहीं लेगा. इसे लेकर पहले चल रही अटकलों पर भी विराम लग गया है.
सलमान खान की फिल्म ‘बैटल ऑफ गलवान’ पर विवाद से MEA ने झाड़ा पल्ला
बॉलीवुड सुपरस्टार सलमान खान की आने वाली फिल्म ‘बैटल ऑफ गलवान’ को लेकर उठ रहे विवाद पर भी विदेश मंत्रालय से सवाल किए गए. इस पर रणधीर जायसवाल ने साफ शब्दों में कहा कि फिल्मों से जुड़े मुद्दे संबंधित विभाग और अधिकारी देखते हैं.
विदेश मंत्रालय की इस फिल्म की योजना या निर्माण में कोई भूमिका नहीं है. उन्होंने यह स्पष्ट कर दिया कि मंत्रालय खुद को इस पूरे विवाद से पूरी तरह अलग रखता है और इस मामले में उसकी कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं है.
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