'हमले का प्लान बना रहे इमरान खान...' पाकिस्तानी सरकार का बड़ा आरोप, बताया क्यों नहीं मिलने दे रहे?

पाकिस्तान की राजनीति में पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की हालत को लेकर फिर से तीखी बहस शुरू हो गई है. इमरान की बहन नूरीन नियाजी ने हालात की तुलना सीधे हिटलर के जर्मनी से की और आरोप लगाया कि पाकिस्तान में मीडिया, नागरिक और राजनीतिक नेता डर और सेंसरशिप के दबाव में हैं.

Imran Khan is planning to attack Islamabad Pakistan
प्रतिकात्मक तस्वीर/ ANI

पाकिस्तान की राजनीति में पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की हालत को लेकर फिर से तीखी बहस शुरू हो गई है. इमरान की बहन नूरीन नियाजी ने हालात की तुलना सीधे हिटलर के जर्मनी से की और आरोप लगाया कि पाकिस्तान में मीडिया, नागरिक और राजनीतिक नेता डर और सेंसरशिप के दबाव में हैं.

नूरीन ने कहा कि सरकार ऐसे लोगों को उठाती है जिन्हें वह चाहती है और मीडिया को इस तरह नियंत्रित किया गया है कि सच सामने नहीं आ पा रहा. उन्होंने दावा किया कि कई पत्रकार डर के कारण देश छोड़कर बाहर चले गए हैं, उनके बैंक अकाउंट ब्लॉक किए गए, पासपोर्ट रोके गए और संपत्ति पर कार्रवाई की गई.

नूरीन के अनुसार, पाकिस्तान अब ऐसा माहौल बन गया है जहां जनता की आवाज दबाई जा रही है और लोगों में खुलकर बोलने की हिम्मत ही नहीं बची. उन्होंने कहा कि यह सब लोकतांत्रिक अधिकारों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर बड़ा हमला है.

राणा सनाउल्लाह का विवादित बयान

पूर्व प्रधानमंत्री के स्वास्थ्य और उनके साथ मुलाकात की रोक पर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के सलाहकार राणा सनाउल्लाह ने बड़ा बयान दिया. उन्होंने कहा कि इमरान खान ठीक हैं और उन्हें जेल में सभी सुविधाएं मिल रही हैं- दवाइयां, भोजन, व्यायाम और नियमित डॉक्टर चेकअप.

लेकिन मुलाकात न होने के पीछे उनका कहना है कि इमरान खान राजधानी इस्लामाबाद पर हमले की साजिश रच रहे हैं. राणा सनाउल्लाह ने कहा, “अगर कोई कैदी हमला प्लान कर रहा हो तो उसे मिलने की अनुमति कैसे दी जा सकती है?” उन्होंने इमरान और PTI पर आरोप लगाया कि उन्होंने पहले भी देश को नुकसान पहुंचाया है और इसलिए सख्ती जरूरी है. इस बयान ने इमरान की सुरक्षा, उनकी वास्तविक स्थिति और सरकार की मंशा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.

कासिम खान ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से मांगी मदद

इमरान खान के बेटे कासिम खान ने पाकिस्तान सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से हस्तक्षेप की मांग की है. कासिम ने कहा कि उनके पिता को 845 दिनों से हिरासत में रखा गया है और पिछले छह हफ्तों से उन्हें एकांत कारावास में रखा गया है.

कासिम के अनुसार, अदालत के आदेश के बावजूद उनकी बहनों को इमरान से मिलने की अनुमति नहीं दी जा रही. न तो फोन कॉल की अनुमति है, न ही व्यक्तिगत मुलाकात की. उन्होंने दावा किया कि यह ‘सुरक्षा प्रोटोकॉल’ नहीं बल्कि इमरान की वास्तविक स्थिति छुपाने का प्रयास है. कासिम ने चेतावनी दी कि उनके पिता की सुरक्षा और इस अमानवीय एकांतवास से होने वाले परिणामों के लिए पूरी जिम्मेदारी पाकिस्तान सरकार की होगी.

उन्होंने वैश्विक मानवाधिकार संगठनों, अंतरराष्ट्रीय नेताओं और लोकतांत्रिक देशों से अपील की कि वे हस्तक्षेप करें, इमरान की सुरक्षा की पुष्टि करें, अदालत के आदेश लागू करवाएं और पाकिस्तान के सबसे लोकप्रिय राजनीतिक नेता की रिहाई सुनिश्चित करें.

इमरान की बहनों पर सेना का बल प्रयोग

इमरान की बहनें- अलीमा खान, नूरीन नियाजी और डॉ. उजमा खान अडियाला जेल के बाहर पिछले कई सप्ताह से प्रदर्शन कर रही हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने उनके शांतिपूर्ण धरने के दौरान धक्का-मुक्की और लाठीचार्ज किया.

नूरीन नियाजी ने पाकिस्तान सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर पर सीधे तानाशाही का आरोप लगाया और कहा कि देश में सत्ता का असली फैसला सेना के हाथ में है. उनका दावा है कि प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के सत्ता में आने में भी सेना की भूमिका निर्णायक रही.

देश में बढ़ती राजनीतिक और मीडिया असुरक्षा

इन घटनाओं के बीच पाकिस्तान में राजनीतिक और मीडिया असुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ रही है. इमरान खान के समर्थक सरकार की इस कार्रवाई को लोकतांत्रिक प्रक्रिया और मानवाधिकारों पर हमला मान रहे हैं. दूसरी ओर, सरकार और उसके सलाहकार इमरान पर गंभीर आरोप लगा रहे हैं और सुरक्षा कारणों का हवाला दे रहे हैं.

विशेषज्ञों का कहना है कि पाकिस्तान में राजनीतिक तनाव और बढ़ सकता है. अगर मुलाकात और संवाद पर प्रतिबंध जारी रहा, तो PTI समर्थकों द्वारा बड़े पैमाने पर प्रदर्शन और संघर्ष की स्थिति पैदा हो सकती है.

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