पाकिस्तान में तेल और गैस के विशाल भंडार की खोज को लेकर वर्षों से दावे किए जा रहे हैं, लेकिन हर बार उम्मीदों की नाव किनारे से पहले ही डूब जाती है. हर नई सरकार और नेता एक "ब्लैक गोल्ड" की उम्मीद जगाता है, लेकिन नतीजा वही—न निर्यात, न आत्मनिर्भरता. एक बार फिर ऐसी ही चर्चाएं गरमा रही हैं कि पाकिस्तान के समुद्री क्षेत्र में बहुत बड़ा तेल और गैस भंडार मिला है. लेकिन क्या इस बार वाकई कुछ हाथ लगा है, या फिर यह भी एक और राजनीतिक प्रपंच है?
2019 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इमरान खान ने जनता के सामने यह दावा किया कि कराची के तटीय क्षेत्र से सैकड़ों किलोमीटर दूर समुद्र में एक ऐसा तेल भंडार मिलने वाला है जो पाकिस्तान की किस्मत पलट देगा. उन्होंने कहा था कि पाकिस्तान तेल निर्यातक देशों की कतार में खड़ा होने जा रहा है, और जनता से दुआ करने की अपील भी की थी.
2019: इमरान खान की "तेल क्रांति" और उसका हश्र
इस परियोजना में अमेरिका की एक्सॉनमोबिल और इटली की ईएनआई जैसी दिग्गज कंपनियों ने केकरा-1 नामक ब्लॉक में ड्रिलिंग की. लेकिन कुछ ही समय बाद पेट्रोलियम मंत्रालय ने स्पष्ट कर दिया कि ड्रिलिंग से कुछ खास हासिल नहीं हुआ. पाकिस्तानी पेट्रोलियम अधिकारी मोईन रजा खान ने बाद में बताया कि "तेल नहीं, सिर्फ पानी मिला है"—यानि करोड़ों डॉलर डूब गए और सपने भी.
2024 की नई खोज और फिर वही सवाल
सितंबर 2024 में पाकिस्तानी मीडिया एक बार फिर "तेल-गैस के समंदर" की खबरों से भर गया. दावा किया गया कि समुद्र में दुनिया का चौथा सबसे बड़ा तेल और गैस भंडार पाया गया है, जिसे "नीला खजाना" नाम दिया गया. एक गुमनाम सहयोगी देश के साथ मिलकर किए गए सर्वे की यह खोज तीन वर्षों की मेहनत का नतीजा बताई गई.
लेकिन विशेषज्ञों ने इन दावों पर फिर से सवाल उठाए. Ogra के पूर्व अधिकारी मुहम्मद आरिफ ने कहा कि अभी भंडार का आकार और उसकी व्यावहारिकता को लेकर कुछ भी स्पष्ट नहीं है. इस तरह के प्रोजेक्ट में 5 अरब डॉलर से ज्यादा का निवेश और 4-5 साल का समय लगता है. और समुद्र से तेल निकालना एक अलग ही चुनौती है—टेक्नोलॉजी, संसाधन और सुरक्षा की दृष्टि से बेहद जटिल.
ट्रंप के मजाकिया वादे और पाकिस्तानी सोशल मीडिया का तंज
इसी संदर्भ में जब अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिका पाकिस्तान के "तेल खजाने" को विकसित करेगा और शायद भविष्य में पाकिस्तान भारत को भी तेल बेचेगा—तो सोशल मीडिया पर मीम्स की बाढ़ आ गई. लोगों ने कहा, "हमें तो ट्रंप के ट्वीट से ही पता चला कि हमारे पास तेल है." कई यूजर्स ने इमरान खान के पुराने वादों की याद दिलाई और कहा कि ये सब खोखले सपने हैं.
तेल का सच: आंकड़े क्या कहते हैं?
अब आइए, ठोस तथ्यों की बात करें. पाकिस्तान के पास 2016 तक करीब 35.35 करोड़ बैरल तेल भंडार था, जो वैश्विक भंडार का सिर्फ 0.021% है. इस आंकड़े के हिसाब से पाकिस्तान दुनिया में 52वें स्थान पर आता है. भारत की तुलना में यह आंकड़ा बहुत कमज़ोर है—भारत के पास 4.8 अरब बैरल कच्चा तेल और 1149 बिलियन क्यूबिक मीटर प्राकृतिक गैस का भंडार है.
2025 में पाकिस्तान का घरेलू उत्पादन घटकर 64,262 बैरल प्रतिदिन रहने का अनुमान है, जबकि देश की खपत लगभग 5.5 लाख बैरल प्रतिदिन है. यानी केवल 15-20% तेल की पूर्ति घरेलू स्रोतों से हो रही है, बाकी मध्य-पूर्व से आयात किया जा रहा है.
जमीनी हकीकत: निवेश, सुरक्षा और तकनीकी बाधाएं
पाकिस्तान ने कई बार खैबर पख्तूनख्वा, सिंध और बलूचिस्तान में तेल और गैस के भंडार की खोज का दावा किया है, लेकिन सुरक्षा कारणों, भारी निवेश की कमी और राजनीतिक अस्थिरता के चलते कोई भी प्रोजेक्ट आकार नहीं ले सका. 2015 में अमेरिकी ऊर्जा सूचना प्रशासन (EIA) ने अनुमान जताया था कि पाकिस्तान में 9.1 बिलियन बैरल "तकनीकी रूप से पुनर्प्राप्त करने योग्य" शेल ऑयल और 105 ट्रिलियन क्यूबिक फीट शेल गैस हो सकती है, लेकिन ये न तो सिद्ध भंडार हैं और न ही मौजूदा परिस्थितियों में व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य.
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