Middile East War: ईरान युद्ध से पाकिस्तान की हालत खस्ता, श्रीलंका और बांग्लादेश में भी बढ़ा तेल संकट

Middile East War: मध्य पूर्व में जारी युद्ध के कारण, विशेष रूप से अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच, अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों की आवाजाही प्रभावित हो रही है. इससे पूरी दुनिया में ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव बढ़ रहा है, और दक्षिण एशियाई देशों जैसे बांग्लादेश, पाकिस्तान और श्रीलंका पर इसका गहरा असर पड़ा है.

Impact of Global Crisis on Fuel Supplies in South Asia Bangladesh Pakistan and Sri Lanka
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Middile East War: मध्य पूर्व में जारी युद्ध के कारण, विशेष रूप से अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच, अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों की आवाजाही प्रभावित हो रही है. इससे पूरी दुनिया में ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव बढ़ रहा है, और दक्षिण एशियाई देशों जैसे बांग्लादेश, पाकिस्तान और श्रीलंका पर इसका गहरा असर पड़ा है. इन देशों की सरकारें ईंधन संकट से निपटने के लिए कई महत्वपूर्ण उपाय कर रही हैं. आइए जानते हैं, इन देशों ने इस संकट से निपटने के लिए क्या कदम उठाए हैं.

बांग्लादेश

बांग्लादेश में ईंधन की आपूर्ति पर संकट को देखते हुए सरकार ने कई बदलाव किए हैं. रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, बांग्लादेश सरकार ने दफ्तरों के काम करने के समय में बदलाव किया है और अब दफ्तर सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक खुले रहेंगे. इसके अलावा, बाजारों और शॉपिंग सेंटरों को भी जल्दी बंद करने के आदेश दिए गए हैं. सरकार ने अत्यधिक ऊर्जा की खपत को कम करने के लिए उद्योगों से अपील की है कि वे बिजली की खपत को नियंत्रित करें.

बांग्लादेश सरकार ने शिक्षा मंत्रालय से भी स्कूलों के समय में बदलाव और आंशिक ऑनलाइन क्लासेस के बारे में विचार करने के लिए कहा है, ताकि छात्रों के आने-जाने से होने वाली ऊर्जा खपत को कम किया जा सके. इसके अलावा, बांग्लादेश ने रूस से डीजल आयात करने के लिए अमेरिका से अस्थायी प्रतिबंध छूट (Waiver) की मांग की है, ताकि वैश्विक ऊर्जा बाजार पर बढ़ते दबाव को कम किया जा सके.

पाकिस्तान

पाकिस्तान ने भी ईरान युद्ध के कारण उत्पन्न तेल संकट से निपटने के लिए बड़े कदम उठाए हैं. अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान सरकार ने व्यापक मितव्ययिता (austerity) उपायों की घोषणा की है. वैश्विक तेल कीमतों में भारी वृद्धि के कारण, पाकिस्तान ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भी वृद्धि की है. 2 अप्रैल 2026 को, डीजल की कीमत में 54.9% और पेट्रोल की कीमत में 42.7% की बढ़ोतरी की गई.

हालांकि, इस भारी वृद्धि पर तीखी प्रतिक्रिया के बाद, प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने पेट्रोल की कीमत में 80 रुपये प्रति लीटर की कटौती की घोषणा की. इसके बावजूद, पाकिस्तान के लिए यह चुनौतीपूर्ण स्थिति बनी हुई है और सरकार विभिन्न उपायों पर विचार कर रही है ताकि ऊर्जा खपत को नियंत्रित किया जा सके और आर्थिक स्थिति को स्थिर किया जा सके.

श्रीलंका

श्रीलंका में भी ऊर्जा संकट के चलते कई कड़े कदम उठाए गए हैं. रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, सरकार ने बिजली की कीमतों में वृद्धि की है और प्रत्येक बुधवार को सरकारी छुट्टी की घोषणा की है, ताकि ईंधन की खपत को कम किया जा सके. इसके साथ ही, पेट्रोल पंपों पर कीमतों में 35% की बढ़ोतरी की गई है. श्रीलंका ने ईंधन आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए रूस, भारत और अमेरिका के साथ लगातार बातचीत जारी रखी है.

इसके अलावा, श्रीलंका सरकार ने सीलोन पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन से रिफाइंड ईंधन खरीदने के लिए 600 मिलियन डॉलर खर्च करने का भी निर्णय लिया है. यह संकट श्रीलंका के लिए विशेष रूप से चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि वह ईंधन की आयात पर निर्भर है और वैश्विक ऊर्जा बाजार की अस्थिरता ने स्थिति को और जटिल बना दिया है.

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