ढ़ाका: 5 अगस्त 2024- यह दिन बांग्लादेश के इतिहास में हमेशा दर्ज रहेगा. देश की सड़कों पर हिंसा, प्रदर्शन और उथल-पुथल का माहौल था. प्रधानमंत्री शेख हसीना का आवास ‘गणभवन’ गुस्साई भीड़ से घिर चुका था. सरकारी अधिकारी उन्हें सुरक्षित निकालने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन हसीना ने देश छोड़ने से साफ इंकार कर दिया था. ठीक दोपहर 1 बजकर 30 मिनट पर भारत से आया एक फोन कॉल वह क्षण बना जिसने उनकी ज़िंदगी हमेशा के लिए बदल दी.
यह चौंकाने वाला खुलासा नई किताब ‘इंशाल्लाह बांग्लादेश: द स्टोरी ऑफ़ एन अनफिनिश्ड रिवोल्यूशन’ में किया गया है, जिसे पत्रकार दीप हलदर, जयदीप मजूमदार और साहिदुल हसन खोकन ने लिखा है. किताब को जगरनॉट प्रकाशन द्वारा प्रकाशित किया जा रहा है.
बांग्लादेश में हिंसा और बढ़ता खतरा
किताब के अनुसार, अगस्त 2024 के शुरुआती सप्ताह में बांग्लादेश में भारी राजनीतिक अस्थिरता थी. राजधानी ढाका समेत कई शहरों में सरकार विरोधी प्रदर्शन हिंसक रूप ले चुके थे. प्रदर्शनकारी प्रधानमंत्री हसीना के इस्तीफे की मांग कर रहे थे और हजारों लोग गणभवन की ओर कूच कर रहे थे.
सेना और पुलिस ने हालात पर काबू पाने की कोशिश की, लेकिन भीड़ बेकाबू हो चुकी थी. उस समय बांग्लादेश के तीनों सेनाओं के प्रमुख आर्मी चीफ जनरल वाकर-उज-जमान, नेवी चीफ और एयरफोर्स चीफ लगातार प्रधानमंत्री से सुरक्षित स्थान पर जाने की गुज़ारिश कर रहे थे.
फिर भी हसीना अड़ी रहीं. उन्होंने कहा कि वह अपने देश को छोड़कर नहीं जाएंगी. उन्होंने अपने पिता शेख मुजीबुर रहमान की याद करते हुए कहा कि "अगर मौत ही किस्मत में है तो मैं अपने देश की मिट्टी में मरना पसंद करूंगी."
भारत से आया कॉल जिसने सब बदल दिया
हालात बिगड़ते जा रहे थे. सुरक्षा एजेंसियां स्थिति को संभालने में नाकाम हो रही थीं. इसी बीच, 1:30 बजे दोपहर, एक कॉल गणभवन के सुरक्षित लाइन पर आया, वह कॉल भारत से था.
किताब में यह नहीं बताया गया है कि फोन करने वाला कौन था, लेकिन लेखक लिखते हैं कि वह भारत के शीर्ष सुरक्षा अधिकारी थे और शेख हसीना से उनके निजी व कूटनीतिक संबंध थे.
कॉल कुछ ही मिनटों का था, लेकिन उसका प्रभाव गहरा था. उस अधिकारी ने कहा, "बहुत देर हो चुकी है. भीड़ किसी भी पल अंदर घुस सकती है. अगर आप अभी नहीं निकलतीं तो हालात काबू से बाहर हो जाएंगे. आपको जिंदा रहना जरूरी है, क्योंकि लड़ाई खत्म नहीं हुई है."
इन शब्दों ने शेख हसीना का मन बदल दिया. उन्होंने पहली बार देश छोड़ने पर हामी भरी.
गणभवन से निकलने का रोमांचक पल
किताब में लिखा है कि, "2:42 बजे तेजगांव से विमान ने उड़ान भरी. आसमान में हल्की बारिश हो रही थी और बादल छाए थे. बीस मिनट बाद विमान पश्चिम बंगाल के मालदा जिले के ऊपर से गुजरते हुए भारतीय सीमा में प्रवेश कर गया."
भारत ने पहले ही बना रखी थी आपात योजना
‘इंशाल्लाह बांग्लादेश’ के अनुसार, भारत सरकार पहले से ही इस संभावना को लेकर तैयार थी कि बांग्लादेश की स्थिति नियंत्रण से बाहर हो सकती है. भारतीय वायुसेना को ‘ऑपरेशन सेफ हेवन’ नामक एक आपात योजना तैयार रखने का निर्देश दिया गया था.
जब बांग्लादेशी विमान भारतीय सीमा में प्रवेश करता है, तब भारतीय हवाई यातायात नियंत्रण (ATC) उसे सीधा पश्चिम बंगाल एयरस्पेस से उत्तर प्रदेश के हिंडन एयरबेस तक गाइड करता है. शाम तक हसीना का विमान गाजियाबाद के हिंडन एयरबेस पर उतरता है, जहां खुद राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल मौजूद थे.
अजीत डोभाल ने हसीना का स्वागत किया और उन्हें दिल्ली के एक सुरक्षित सरकारी आवास में पहुंचाया गया. यहीं से उन्होंने बाद में अपने राजनीतिक भविष्य पर विचार शुरू किया.
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