Saudi Arabia: सऊदी अरब की भौगोलिक स्थिति और जलवायु ऐसी है कि यहां पानी की कमी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है. रेतीली जमीन और गर्म मरुस्थलीय जलवायु के बीच यह देश विश्व के सबसे अमीर देशों में शुमार है, लेकिन पानी के मामले में सऊदी अरब को लगातार संघर्ष करना पड़ता है. इस लेख में जानेंगे कि आखिर सऊदी अरब पीने के लिए पानी कहां से लाता है और वह अपनी पानी की जरूरतों को कैसे पूरा करता है.
रेतीली जमीन और पानी की कमी
सऊदी अरब की ज़मीन का लगभग 99% हिस्सा रेतीला और बंजर है. खेती के लिए यहां केवल 1% जमीन उपयुक्त मानी जाती है, लेकिन वहां भी सीमित फसलें ही उगाई जा सकती हैं. गेहूं और धान जैसी भारी पानी मांगने वाली फसलों की खेती यहां संभव नहीं है. पहले एक बार गेहूं की खेती शुरू की गई थी, लेकिन जलस्रोतों की कमी के कारण इसे बंद करना पड़ा. इसलिए सऊदी अरब को अपना खाद्य पदार्थ अधिकतर विदेशों से आयात करना पड़ता है.
भूमिगत जल और कुओं की कहानी
सऊदी अरब के पास भूमिगत जल के स्रोत कम और गहरे हैं. सदियों तक यहां के कुएं इस जल स्रोत का उपयोग करते रहे हैं, लेकिन बढ़ती आबादी और बढ़ती मांग के कारण इन कुओं का जल स्तर तेजी से गिर गया है. कुछ कुएं तो पूरी तरह सूख भी चुके हैं. वैज्ञानिकों का अनुमान है कि आने वाले कुछ वर्षों में यह सीमित भूमिगत जल भी समाप्त हो सकता है.
बारिश की कमी और जल संरक्षण की समस्या
सऊदी अरब में वर्षा लगभग नगण्य है, साल भर में केवल एक-दो दिन ही बारिश होती है, जो आमतौर पर तूफानी होती है. इतनी कम और अनियमित बारिश से जल संचयन मुश्किल होता है. प्राकृतिक रूप से बारिश का पानी भूमिगत जल को पुनर्भरित नहीं कर पाता, जिससे जल संकट और गहरा जाता है.
विलवणीकरण की प्रक्रिया
सऊदी अरब अपनी पानी की मांग पूरी करने के लिए समुद्र के पानी को शुद्ध करता है. समुद्र के पानी में नमक की मात्रा अधिक होती है, जिसे हटाने के लिए डिसालिनेशन या विलवणीकरण तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है. इस प्रक्रिया में समुद्र के पानी से नमक निकाला जाता है ताकि वह पीने और उपयोग के लिए उपयुक्त बन सके.
पानी उत्पादन में भारी खर्च
तेल की आमदनी से सऊदी अरब इस विलवणीकरण प्रक्रिया पर भारी निवेश करता है. 2009 में एक क्यूबिक मीटर पानी से नमक निकालने का खर्च लगभग 2.57 सऊदी रियाल (करीब 50 रुपये) था, वहीं पानी के परिवहन पर 1.12 रियाल (20 रुपये से अधिक) खर्च आता था. वर्तमान में, बढ़ती मांग के कारण यह खर्च और बढ़ चुका होगा.
जल संकट की गंभीरता और भविष्य की चुनौतियां
2011 में सऊदी अरब के तत्कालीन पानी और बिजली मंत्री ने कहा था कि देश में पानी की मांग सालाना 7% की दर से बढ़ रही है. इससे साफ होता है कि जल संकट देश के लिए एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है. सीमित जल संसाधनों और बढ़ती आबादी के बीच सऊदी अरब को अपनी जल नीति और तकनीकी समाधानों पर लगातार काम करना होगा.
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