चीन की विस्तारवादी नीति अब सिर्फ लद्दाख या दक्षिण चीन सागर तक सीमित नहीं रही, बल्कि छोटे और शांतिप्रिय देश भूटान की सीमाओं तक भी पहुँच चुकी है. पिछले कुछ सालों में भूटान के जिन इलाकों पर चीन दावा करता रहा है, उनमें अब एक नया नाम जुड़ गया है. सकतेंग वाइल्डलाइफ सेंचुरी. यह वही क्षेत्र है जो न तो तिब्बत की सीमा से सटा है, और न ही पारंपरिक रूप से कभी विवादित माना गया था.
साल 2020 में ग्लोबल एनवायरनमेंट फैसिलिटी (GEF) की एक बैठक के दौरान चीन ने पहली बार सकतेंग क्षेत्र को "विवादित" बताया. भूटान ने जब वहां पर्यावरणीय परियोजनाओं के लिए अंतरराष्ट्रीय सहायता की मांग की, तब चीनी प्रतिनिधियों ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस इलाके पर विवाद है और इस वजह से इसे फंडिंग नहीं दी जानी चाहिए. यह दावा हैरान करने वाला इसलिए भी था क्योंकि सकतेंग सेंचुरी न तो चीन की सीमा से सटी है और न ही इससे पहले किसी विवाद का हिस्सा रही है. लेकिन चीन की रणनीति कुछ और ही इशारा कर रही थी.
भूटान की सीमा पर चीन की "सलामी स्लाइसिंग" रणनीति
चीन की नीति स्पष्ट दिख रही है, धीरे-धीरे चरवाहों के नाम पर या फिर नागरिक निर्माण के बहाने ज़मीन पर कब्ज़ा करना. पहले वह अपने चरवाहों को भेजता है, फिर सेना की पेट्रोलिंग शुरू होती है, और जब सामने वाला देश प्रतिक्रिया देता है, तो बातचीत की मेज़ पर आकर कुछ पीछे हटने का नाटक करता है. लेकिन इसी बीच वह धीरे-धीरे अपना "फुटप्रिंट" बढ़ा देता है. डोकलाम का उदाहरण हमारे सामने है. साल 2017 में भारत और चीन के बीच डोकलाम में जो गतिरोध हुआ था, उसके बाद चीन ने उस क्षेत्र में अपनी मौजूदगी को और मज़बूत करना शुरू कर दिया है. खासकर तोरसा नदी के किनारे, जहां डोकलाम के पास जामफेरी रिज की ओर बढ़ते निर्माण कार्य देखे गए हैं.
भूटान की सीमाओं पर बढ़ते तनाव
रिपोर्ट्स के अनुसार, फरवरी 2025 में अमो-छू नदी के पास चीनी सेना (PLA) ने भूटान की सेना की पेट्रोलिंग पर आपत्ति जताई थी. यह वही इलाका है जो डोकलाम के पास है और जहां भूटान की सेना पारंपरिक रूप से पेट्रोलिंग करती रही है. भूटानी सेना को अपने ही इलाके में जाने से रोकने की यह चीन की सोची-समझी रणनीति मानी जा रही है. इतना ही नहीं, खुफिया रिपोर्टों के मुताबिक चीन ने तिब्बत से लगती भूटानी सीमा पर अपने चरवाहों की घुसपैठ बढ़ा दी है. जब भूटान की सेना ने इन्हें रोका, तो चीन ने उल्टा विरोध दर्ज कराते हुए कहा कि इन्हें "तिब्बती" नहीं बल्कि "चीनी" चरवाहा कहा जाए.
"थ्री-स्टेप रोडमैप" और भूटान पर बढ़ता दबाव
हालांकि अक्टूबर 2021 में चीन और भूटान के बीच एक समझौता हुआ था जिसे "थ्री-स्टेप रोडमैप" कहा गया, लेकिन जमीनी हकीकत इससे काफी अलग है. पिछले 8 वर्षों में चीन ने भूटान की जमीन पर 20 से अधिक गांव बसाए हैं. जिनमें डोकलाम क्षेत्र में ही 8 गांव शामिल हैं. यह सब उस वक्त हुआ जब दोनों देशों के बीच सीमाई वार्ताएं चल रही थीं.
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