Houthi Attack Saudi US: सऊदी अरब के समर्थन में अमेरिका यमन के हूती विद्रोहियों के खिलाफ सैन्य कार्रवाई कर सकता है. सऊदी राजधानी रियाद पर हूतियों के हमले के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कैंप डेविड में अपना वीकेंड प्रवास बीच में ही खत्म कर दिया और शनिवार को वॉशिंगटन लौट आए. यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ है, जब ट्रंप प्रशासन के यमन में हूतियों के खिलाफ सैन्य विकल्पों पर विचार करने की खबरें सामने आ रही हैं. हूतियों और सऊदी अरब के बीच करीब एक महीने से तनाव और संघर्ष जारी है.
व्हाइट हाउस की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप को रविवार तक कैंप डेविड में रहना था, लेकिन वह एक दिन पहले ही वापस लौट आए. वह रात करीब 8 बजे से कुछ समय पहले एलिप्स पर पहुंचे. उनकी अचानक वापसी ऐसे वक्त हुई, जब सऊदी अरब ने पुष्टि की कि हूतियों ने बैलिस्टिक मिसाइल से रियाद को निशाना बनाया था. हालांकि, सऊदी रक्षा व्यवस्था ने मिसाइल को हवा में ही रोक दिया.
यमन पर हमले का विचार
रिपोर्ट्स के मुताबिक, कैंप डेविड में ट्रंप की बैठक के दौरान यमन में हूतियों के खिलाफ संभावित सैन्य कार्रवाई के विकल्पों पर चर्चा और समीक्षा की गई. CNN के राष्ट्रीय सुरक्षा विश्लेषक एलेक्स प्लिटसास ने सोशल मीडिया पोस्ट में दावा किया कि उन्हें जानकारी मिली थी कि बैठक का मुख्य उद्देश्य यमन पर हमले के विकल्पों की समीक्षा करना था.
प्लिटसास ने लिखा कि उन्हें पहले ही बताया गया था कि कैंप डेविड में राष्ट्रपति की बैठक यमन पर हमले के विकल्पों पर चर्चा के लिए हो रही है. उन्होंने यह भी कहा कि मध्य पूर्व के कई देशों में मौजूद अमेरिकी दूतावासों ने सुरक्षा चेतावनी जारी की है, क्योंकि अमेरिकी ठिकानों या दूतावासों पर जवाबी हमले का खतरा हो सकता है.
सऊदी अरब के मुताबिक, रियाद को निशाना बनाने वाली मिसाइल को रोक दिया गया. इसके अलावा यानबू, ताइफ, बायश और फरासान समेत अन्य जगहों पर हुए हमलों को भी नाकाम करने की बात कही गई है.
यमन पर हमले से बच रहे हैं ट्रंप
डोनाल्ड ट्रंप का प्रशासन अब तक हूतियों के खिलाफ सीधे सैन्य हमले से बचता रहा है. अमेरिका ने सऊदी अरब को मुख्य रूप से खुफिया जानकारी और टारगेट से जुड़ी मदद दी है. महीने की शुरुआत में अमेरिकी अधिकारियों ने एबीसी न्यूज को बताया था कि वॉशिंगटन की तत्काल सीधे हमला करने की योजना नहीं है.
हालांकि, अगर लाल सागर में जहाजों के लिए खतरा बढ़ता है तो अमेरिका अपना रुख बदल सकता है. ऐसे में अब नजर इस बात पर है कि सऊदी अरब पर हूतियों के हमले के बाद अमेरिका यमन को लेकर क्या फैसला करता है.
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