Karnal News: करनाल के कुंजपुरा में एक अजीबोगरीब मामला सामने आया है, जहां एक परिवार को बिजली विभाग ने 1.45 करोड़ रुपये का बिल भेज दिया है. शुरूआत में यह मामला एक गड़बड़ी की तरह दिखाई दिया, लेकिन जब अधिकारियों ने मामले की जांच की, तो यह खुलासा हुआ कि यह दरअसल एक टाइपिंग एरर का परिणाम था. हालांकि, अब पीड़ित परिवार सिर्फ 14 लाख 51 हजार रुपये का बिल चुकाने को तैयार है, लेकिन बिजली कनेक्शन की बहाली का मामला अब भी लंबित है.
क्या है पूरा मामला?
कुंजपुरा के निवासी विनोद और उनके परिवार को हाल ही में बिजली विभाग से एक करोड़ 45 लाख 17 हजार 279 रुपये का बिल मिला. यह बिल बेहद अजीब था क्योंकि परिवार का कनेक्शन डेढ़ साल पहले ही काट दिया गया था, जब परिवार बिल नहीं चुका सका था. इस मामले को लेकर परिवार के सदस्य और बिजली विभाग के अधिकारी दोनों ही हलचल में हैं. विनोद का कहना है कि उनका परिवार 14 लाख 51 हजार 279 रुपये का बिल भरने के लिए तैयार है, लेकिन वे चाहते हैं कि उन्हें एक किलोवाट का कनेक्शन मिल जाए, ताकि बच्चों को गर्मी से राहत मिल सके. उनका कहना है कि यह न सिर्फ उनकी बल्कि उनके बच्चों की जरूरत है.
बिजली विभाग ने किया गलती को स्वीकार
जब इस मामले पर बिजली विभाग के अधिकारियों से पूछा गया, तो उन्होंने माना कि यह गलतफहमी और टाइपिंग एरर के कारण हुआ था. विभाग ने स्पष्ट किया कि 1.45 करोड़ रुपये का बिल गलत तरीके से सिस्टम में दर्ज हो गया था. असल में, परिवार का वास्तविक बिल 14 लाख 51 हजार रुपये था, जो पेंडिंग हो चुका था. करनाल के नेवल गांव में तैनात बिजली विभाग के अधिकारी तरुण जेन ने बताया कि मामला दरअसल 2015 से पहले का था, जब ज्ञान चंद के नाम पर कनेक्शन था और उस पर जुर्माना भी लगा था. जुर्माने को लेकर मामला कोर्ट में था, लेकिन करंट बिल न भरने के कारण यह बिल बढ़कर 14 लाख 51 हजार तक पहुंच गया.
पीड़ित परिवार का सरकारी मदद का आग्रह
पीड़ित परिवार ने बताया कि डेढ़ साल पहले बिजली विभाग ने उनका कनेक्शन काट लिया था और तब से वे बिना बिजली के रह रहे थे. अब, परिवार का कहना है कि अगर कोर्ट उन्हें आदेश देता है, तो वे 14 लाख 51 हजार रुपये का बिल चुकाने के लिए तैयार हैं. परिवार ने सोमवार को हरियाणा के ऊर्जा मंत्री अनिल विज से चंडीगढ़ में मुलाकात करने का फैसला किया है. वे चाहते हैं कि उन्हें एक किलोवाट का नया कनेक्शन मिले ताकि उनके बच्चों को बिजली की दिक्कत से राहत मिल सके.
बिजली विभाग की जवाबदेही
इस पूरे मामले ने एक बार फिर बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं. टाइपिंग एरर जैसी गलतियां अब ज्यादा गंभीर हो गई हैं, क्योंकि इससे नागरिकों को न सिर्फ मानसिक तनाव होता है, बल्कि रोजमर्रा की जिंदगी में भी परेशानी होती है. विभाग ने गलती को स्वीकार तो किया, लेकिन अब यह देखना होगा कि इस गलती को सुधारने के लिए वे आगे क्या कदम उठाते हैं और परिवार को न्याय मिलता है या नहीं.
ये भी पढ़ें: हरियाणा सरकार का बड़ा फैसला, प्रदेश के स्कूलों में अब प्रार्थना सभा में पढ़े जाएंगे गीता श्लोक