Harish Rawat Resigns: उत्तराखंड की राजनीति में उस वक्त हलचल बढ़ गई, जब पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कांग्रेस में अपने प्रमुख संगठनात्मक पदों से इस्तीफा देने का ऐलान कर दिया. रावत ने यह कदम अपने पुराने सहयोगी और PA चंदन सिंह जीना के ठिकानों पर ED की छापेमारी के एक दिन बाद उठाया है. सोशल मीडिया पर पोस्ट के जरिए अपने फैसले की जानकारी देते हुए रावत ने कहा कि वह नहीं चाहते कि उनकी वजह से कांग्रेस के भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रहे संघर्ष पर किसी तरह का सवाल खड़ा हो.
सामने टीवी पर खबर आ रही है कि देहरादून में हरीश रावत के पीए के पास भारी मात्रा में कैश और ज्वैलरी आदि पकड़ी गई या पकड़ाई गई, इस तथ्य का खुलासा तो आने वाले समय में होगा और यह सत्य है कि श्री जीना मेरे ओएसडी रहे हैं और मैं जितने भी पदों पर रहा, चाहे पार्टी में रहा या सरकार में रहा,… pic.twitter.com/Z6rZYcVev0
— Harish Rawat (@harishrawatcmuk) September 11, 2026
ED की रेड के बाद सामने आया मामला
दरअसल, प्रवर्तन निदेशालय ने 2016 की ग्राम पंचायत विकास अधिकारी परीक्षा में कथित गड़बड़ी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में देहरादून समेत कई स्थानों पर छापेमारी की थी. इनमें चंदन सिंह जीना का ठिकाना भी शामिल था. ED के मुताबिक, तलाशी के दौरान करीब 32 लाख रुपये की बेहिसाबी नकदी, लगभग 200.5 ग्राम सोना और 12 लग्जरी घड़ियां बरामद हुईं. इसके अलावा जीना और उनके परिवार के बैंक खातों में मौजूद करीब 52.16 लाख रुपये भी फ्रीज किए गए हैं.
चंदन सिंह जीना हरीश रावत के मुख्यमंत्री कार्यकाल में OSD रह चुके हैं और फिलहाल उनके PA के तौर पर काम कर रहे हैं. रावत ने कहा कि उनके सहयोगी के घर से नकदी और जेवर मिलने को लेकर टीवी पर जो दावे किए जा रहे हैं, उनकी वास्तविकता जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगी. उन्होंने जीना को अपना पुराना सहयोगी बताते हुए कहा कि अगर भर्ती परीक्षा में गड़बड़ी से जुड़े आरोप साबित होते हैं, तो यह उनके लिए भी शर्मिंदगी की बात होगी. हालांकि, उन्होंने फिलहाल इन आरोपों पर विश्वास नहीं जताया है.
इसलिए लिया फैसला
हरीश रावत ने अपने इस्तीफे के पीछे पार्टी की साख को अहम वजह बताया. उनका कहना है कि चुनाव से पहले माहौल को प्रभावित करने और एक नया नैरेटिव खड़ा करने के लिए उनके बजाय उनके सहयोगी के ठिकाने पर कार्रवाई की गई है. रावत ने साफ किया कि वह नहीं चाहते कि उनके किसी सहयोगी से जुड़ी जांच के कारण कांग्रेस के भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रहे अभियान पर सवाल उठे. इसी वजह से उन्होंने प्रदेश कांग्रेस कार्यकारिणी और कांग्रेस कार्यसमिति, दोनों से अलग होने का फैसला किया है.
भर्ती घोटाले पर भी रावत ने रखी अपनी बात
2016 की ग्राम पंचायत विकास अधिकारी परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर रावत ने अपने मुख्यमंत्री कार्यकाल का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि उनके तीन साल के कार्यकाल में 42 हजार से अधिक सरकारी पदों पर भर्तियां निकाली गई थीं. उनका कहना है कि नियुक्तियों की प्रक्रिया में अगर अनजाने में भी कोई गलती हुई है, तो वह इसके लिए प्रदेश के लोगों से माफी मांगते हैं.
रावत ने भर्ती आयोग के तत्कालीन अध्यक्ष की नियुक्ति को लेकर भी अपना पक्ष रखा. उन्होंने कहा कि शिकायत सामने आने के बाद संबंधित अधिकारी को हटा दिया गया था. उनके मुताबिक, नियुक्ति पुराने सेवा रिकॉर्ड और मेरिट के आधार पर की गई थी. उन्होंने इस मामले में पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूरी की सलाह का भी जिक्र किया और कहा कि भविष्य में कोई व्यक्ति क्या गलती करेगा, इसका अंदाजा पहले से लगाना संभव नहीं है.
ED जांच के घेरे में 2016 की परीक्षा
ED की कार्रवाई 2016 की ग्राम पंचायत विकास अधिकारी परीक्षा में कथित अनियमितताओं से जुड़ी मनी लॉन्ड्रिंग जांच का हिस्सा है. एजेंसी ने मामले में तत्कालीन UKSSSC चेयरमैन, सचिव, परीक्षा नियंत्रक, OMR शीट की प्रोसेसिंग करने वाली निजी कंप्यूटर एजेंसी के मालिक और कुछ कथित बिचौलियों से जुड़े ठिकानों पर भी तलाशी ली है.
जांच एजेंसी का आरोप है कि परीक्षा की OMR शीट में कथित तौर पर बदलाव किए गए और कुछ अभ्यर्थियों की जानकारी निजी लोगों तक पहुंचाई गई. इसके बाद उत्तरों में हेरफेर किए जाने का आरोप है. ED नकदी के लेनदेन और बरामद रकम के स्रोत की भी जांच कर रही है. एजेंसी ने चंदन सिंह जीना का मोबाइल फोन भी जब्त किया है, जिसकी फोरेंसिक जांच की जाएगी.
सबूत हैं तो जांच एजेंसियों को दें- रावत
अपने बयान के आखिर में हरीश रावत ने कहा कि अगर किसी के पास नियुक्तियों में उनके हस्तक्षेप से जुड़ा कोई ठोस सबूत है, तो उसे सीधे CBI, ED या पुलिस को सौंपा जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि अगर जाने-अनजाने में उनसे ऐसी कोई चूक हुई है, जिससे युवाओं के भविष्य पर असर पड़ा हो, तो वह इसके लिए हाथ जोड़कर माफी मांगने को तैयार हैं. साथ ही उन्होंने कहा कि अगर उनकी कोई गलती साबित होती है, तो कानून जो भी सजा देगा, वह उसे भुगतने के लिए तैयार हैं.
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