'दिमागी हालत ठीक कराएं...', दरिया में खून बहेगा वाले बयान पर भारत ने बिलावल भुट्टो को दिखा दी औकात

केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) के प्रमुख बिलावल भुट्टो-जरदारी पर सीधा हमला करते हुए उनके बयानों को "गैर-जिम्मेदाराना" बताया है.

Hardeep Singh Puri statement on Bilawal Bhutto
हरदीप सिंह पुरी | Photo: ANI

भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु जल संधि को लेकर बढ़ते तनाव के बीच अब राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है. केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) के प्रमुख बिलावल भुट्टो-जरदारी पर सीधा हमला करते हुए उनके बयानों को "गैर-जिम्मेदाराना" बताया है. पुरी ने बिलावल की मानसिक स्थिति पर सवाल उठाते हुए कहा कि अब भारत का धैर्य जवाब दे रहा है.

"अब और बर्दाश्त नहीं": हरदीप पुरी का दो टूक

न्यूज एजेंसी ANI से बातचीत में पुरी ने कहा, "बिलावल को अपनी मानसिक स्थिति की जांच करानी चाहिए. वह जिस तरह की भाषा का प्रयोग कर रहे हैं, वह बेहद खतरनाक और गैर-जिम्मेदाराना है. अब बहुत हो चुका है, भारत अब और सहन नहीं करेगा. कुछ दिन और इंतजार कीजिए."

उनकी यह प्रतिक्रिया बिलावल भुट्टो के उस उग्र बयान के बाद आई है जिसमें उन्होंने भारत को "सिंधु या खून" जैसे शब्दों से धमकी दी थी.

बिलावल भुट्टो का दावा और उग्र लहजा

पाकिस्तान के सुक्कुर में एक जनसभा को संबोधित करते हुए बिलावल भुट्टो ने कहा था कि सिंधु नदी पाकिस्तान की है और उस पर कोई समझौता नहीं होगा. उन्होंने भारत पर संधि को एकतरफा निलंबित करने का आरोप लगाते हुए कहा, "या तो इस सिंधु से हमारा पानी बहेगा या तुम्हारा खून." बिलावल के इस बयान के बाद भारतीय राजनीति में तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिली हैं.

पीयूष गोयल का भी हमला

केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने भी बिलावल के बयान की निंदा करते हुए कहा कि "ऐसे नेताओं का दुनिया में होना दुर्भाग्यपूर्ण है. पाकिस्तान की प्राथमिकता केवल आतंक फैलाना रह गई है." उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान के आम नागरिक अपने नेताओं की इस भाषा से सहमत नहीं हो सकते.

भारत का कड़ा रुख

22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 भारतीय नागरिकों की मौत के बाद भारत सरकार ने सिंधु जल संधि को निलंबित करने का फैसला किया. इस हमले के पीछे पाकिस्तान से संचालित आतंकी समूहों की भूमिका मानी जा रही है, जिससे भारत में आक्रोश और कठोर कार्रवाई की मांग और तेज हो गई है.

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