पेंशन निकालने पहुंचे, खाते में दिखे ₹7,40,68,72,895.78... बैंक बैलेंस देखकर हैरान रह गया परिवार

Harda News: मध्य प्रदेश के हरदा जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने न सिर्फ स्थानीय लोगों को बल्कि बैंकिंग व्यवस्था पर सवाल उठाने वालों को भी हैरान कर दिया है. जिन लोगों के खाते में हर महीने पेंशन या मजदूरी के कुछ हजार रुपये आते हैं, उनके बैंक खाते में अचानक 7 अरब रुपये से अधिक की राशि दिखाई देने लगी.

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Harda News: मध्य प्रदेश के हरदा जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने न सिर्फ स्थानीय लोगों को बल्कि बैंकिंग व्यवस्था पर सवाल उठाने वालों को भी हैरान कर दिया है. जिन लोगों के खाते में हर महीने पेंशन या मजदूरी के कुछ हजार रुपये आते हैं, उनके बैंक खाते में अचानक 7 अरब रुपये से अधिक की राशि दिखाई देने लगी. यह घटना देखते ही देखते पूरे गांव में चर्चा का विषय बन गई. अब सवाल यह है कि आखिर यह तकनीकी गड़बड़ी है, बैंकिंग सिस्टम की चूक है या फिर इसके पीछे कोई और वजह छिपी है. फिलहाल बैंक प्रशासन पूरे मामले की जांच में जुट गया है.

पैसे निकालने पहुंचे थे परिवार के सदस्य

हरदा जिले के खिरकिया विकासखंड के ग्राम देवपुर निवासी आदिवासी परिवार के बुजुर्ग गुलाब सिंह ठाकुर और उनकी भाभी रोजमर्रा की जरूरतों के लिए मिलने वाली वृद्धावस्था पेंशन और तेंदूपत्ता मजदूरी की राशि निकालने कियोस्क सेंटर पहुंचे थे. दोनों को उम्मीद थी कि खाते में सामान्य रकम ही होगी, लेकिन बैलेंस चेक करते ही सबकी आंखें खुली रह गईं.

कियोस्क संचालक ने जब खाते में दर्ज राशि देखी तो वह भी कुछ देर के लिए हैरान रह गया. खाते में करीब 7 अरब 40 करोड़ 68 लाख 72 हजार 895 रुपये दिखाई दे रहे थे. इतनी बड़ी रकम देखकर परिवार के सदस्य खुद भी विश्वास नहीं कर सके.

गांव में फैल गई अरबों रुपये वाले खाते की चर्चा

जैसे ही इस अनोखी घटना की जानकारी गांव में पहुंची, लोग बड़ी संख्या में परिवार के घर पहुंचने लगे. पूरे गांव में इसी बात की चर्चा होने लगी कि आखिर एक साधारण मजदूर परिवार के खाते में अरबों रुपये कैसे दिखाई देने लगे. कई लोगों ने इसे तकनीकी गड़बड़ी माना, जबकि कुछ लोगों के बीच तरह-तरह की अटकलें भी शुरू हो गईं. हालांकि परिवार खुद इस घटना को लेकर पूरी तरह अनजान है और उनका कहना है कि उन्होंने कभी इतनी बड़ी रकम का कोई लेन-देन नहीं किया.

परिवार ने क्या बताया?

परिवार का कहना है कि उनकी आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर है. वे डूब क्षेत्र से विस्थापित होकर ग्राम देवपुर में रह रहे हैं और आजीविका के लिए मजदूरी, तेंदूपत्ता संग्रह और सरकारी योजनाओं से मिलने वाली सहायता पर निर्भर हैं. उनके पास अपनी कृषि भूमि तक नहीं है. ऐसे में बैंक खाते में अरबों रुपये की एंट्री उनके लिए किसी रहस्य से कम नहीं है. खाताधारकों ने साफ कहा कि उन्हें इस रकम के बारे में कोई जानकारी नहीं है और न ही उन्होंने कभी इस तरह का कोई वित्तीय लेन-देन किया है.

बैंक ने शुरू की जांच

मामला सामने आने के बाद बैंक अधिकारियों ने इसे गंभीरता से लिया है. अधिकारियों का कहना है कि संबंधित खातों की पासबुक, ट्रांजैक्शन हिस्ट्री और बैंकिंग रिकॉर्ड की विस्तार से जांच की जाएगी. फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि इतनी बड़ी राशि तकनीकी त्रुटि की वजह से दिखाई दे रही है, किसी सिस्टम अपडेट की गलती है या इसके पीछे कोई अन्य कारण है. बैंक का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो पाएगी. फिलहाल खातों में दिखाई दे रही राशि को लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है.

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