मनरेगा की जगह नया रोजगार कानून ला रही मोदी सरकार, सांसदों को बिल की कॉपी बांटी गई, क्या होगा फायदा?

केंद्र सरकार ग्रामीण रोजगार व्यवस्था में बड़े बदलाव की दिशा में कदम बढ़ा रही है. मौजूदा महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) की जगह एक नया कानून लाने की तैयारी की जा रही है.

Modi government is bringing new employment law in place of MNREGA
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नई दिल्ली: केंद्र सरकार ग्रामीण रोजगार व्यवस्था में बड़े बदलाव की दिशा में कदम बढ़ा रही है. मौजूदा महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) की जगह एक नया कानून लाने की तैयारी की जा रही है. सूत्रों के मुताबिक, सरकार ने इस प्रस्तावित कानून का ड्राफ्ट लोकसभा सांसदों को भेज दिया है, ताकि इस पर शुरुआती राय ली जा सके. यह पहल सरकार के ‘विकसित भारत @2047’ विजन से जुड़ी बताई जा रही है.

सरकार जिस नए कानून पर विचार कर रही है, उसका नाम ‘विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) बिल, 2025’ बताया जा रहा है. इस कानून के लागू होने पर मौजूदा मनरेगा अधिनियम को समाप्त किया जा सकता है. नए ढांचे का उद्देश्य सिर्फ रोजगार उपलब्ध कराना ही नहीं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका के टिकाऊ साधनों को बढ़ावा देना भी है.

रोजगार गारंटी में होगा इजाफा

मनरेगा के तहत ग्रामीण परिवारों को साल में 100 दिन का रोजगार देने की गारंटी है. प्रस्तावित नए कानून में इस सीमा को बढ़ाकर 125 दिन करने का सुझाव दिया गया है. यह रोजगार उन ग्रामीण परिवारों के लिए होगा, जिनके वयस्क सदस्य बिना विशेष कौशल वाले शारीरिक श्रम के काम करने के इच्छुक होंगे. सरकार का मानना है कि इससे ग्रामीण इलाकों में आय के अवसर बढ़ेंगे और पलायन पर भी कुछ हद तक रोक लगेगी.

‘विकसित भारत @2047’ से जुड़ा एजेंडा

मनरेगा को वर्ष 2005 में यूपीए सरकार ने लागू किया था और 2009 में इसका नाम महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम रखा गया. अब सरकार का तर्क है कि देश की बदलती जरूरतों और 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य के मद्देनज़र ग्रामीण रोजगार कानून को नए सिरे से डिजाइन करना जरूरी है. नया प्रस्ताव सशक्तिकरण, समन्वय, और योजनाओं के लाभ को हर ग्रामीण परिवार तक पहुंचाने पर जोर देता है.

सिर्फ मजदूरी नहीं, आजीविका पर भी फोकस

सूत्रों के अनुसार, नए कानून में केवल मजदूरी आधारित रोजगार तक सीमित न रहकर, ग्रामीण आजीविका के अन्य साधनों को भी शामिल करने की योजना है. इसमें कौशल विकास, स्थानीय संसाधनों के उपयोग और लंबे समय तक आय देने वाले कामों पर ध्यान दिया जा सकता है. सरकार का मानना है कि इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था ज्यादा मजबूत और आत्मनिर्भर बनेगी.

ड्राफ्ट बिल की प्रतियां सांसदों को भेजी जा चुकी हैं और सरकार की कोशिश है कि इसे आने वाले सत्र में संसद के पटल पर रखा जाए. इसके बाद इस पर विस्तृत चर्चा होगी और जरूरी संशोधनों के बाद इसे पारित किया जा सकता है. अगर यह कानून लागू होता है, तो ग्रामीण रोजगार गारंटी की व्यवस्था में एक बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा.

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