AI खा जाएगा नौकरियां? Goldman Sachs की बड़ी चेतावनी, इतने प्रतिशत कामों में नहीं होगा इंसान का रोल

Artificial Intelligence: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के तेजी से बढ़ते प्रभाव को लेकर दुनिया भर में चर्चा का माहौल बना हुआ है. जहां एक ओर इसे भविष्य की सबसे बड़ी तकनीकी क्रांति माना जा रहा है, वहीं दूसरी ओर इसके कारण नौकरियों पर क्या असर पड़ेगा, इस सवाल ने कई लोगों को चिंता में डाल दिया है.

Goldman Sachs warning for Artificial Intelligence TECH NEWS HINDI
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Artificial Intelligence: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के तेजी से बढ़ते प्रभाव को लेकर दुनिया भर में चर्चा का माहौल बना हुआ है. जहां एक ओर इसे भविष्य की सबसे बड़ी तकनीकी क्रांति माना जा रहा है, वहीं दूसरी ओर इसके कारण नौकरियों पर क्या असर पड़ेगा, इस सवाल ने कई लोगों को चिंता में डाल दिया है. Goldman Sachs की ताजा रिपोर्ट में इस बारे में चेतावनी दी गई है कि आने वाले समय में AI करीब 25% काम के घंटों को खुद से संभाल सकता है. हालांकि, यह भी कहा गया है कि इसका मतलब यह नहीं कि इंसान की नौकरियां पूरी तरह खत्म हो जाएंगी.

AI के प्रभाव का दायरा और काम करने के तरीके में बदलाव

Goldman Sachs के एनालिस्ट जोसेफ ब्रिग्स और सारा डोंग की अगुवाई में की गई रिसर्च के अनुसार, करीब 25% काम ऐसे हैं, जिनके लिए भविष्य में AI का उपयोग बढ़ सकता है. रिपोर्ट में अमेरिकी श्रम विभाग के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया गया है कि AI न सिर्फ काम करने के तरीके को बदल देगा, बल्कि यह विभिन्न सेक्टरों में जरूरी कौशल की परिभाषा भी बदलने वाला है.

किसे सबसे ज्यादा होगा असर?

AI का असर हर सेक्टर में समान नहीं होगा, बल्कि इसका सबसे ज्यादा प्रभाव व्हाइट-कॉलर जॉब्स पर पड़ेगा, जिनमें बार-बार दोहराए जाने वाले मानसिक कार्य शामिल हैं. जैसे कि डेटा एनालिसिस, कागजी काम, बेसिक कोडिंग, अकाउंटिंग और लीगल रिसर्च—इन सभी प्रोफेशन्स को AI जल्द प्रभावित कर सकता है.

AI से प्रोडक्टिविटी में इजाफा

Goldman Sachs का मानना है कि इतनी बड़ी ऑटोमेशन के बावजूद, इसका असर रोजगार पर पूरी तरह से नकारात्मक नहीं होगा. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि AI के इस्तेमाल से लेबर प्रोडक्टिविटी में लगभग 15% का इजाफा हो सकता है. जबकि शुरुआती दौर में करीब 6 से 7% नौकरियों पर असर पड़ सकता है, लेकिन समय के साथ सिस्टम खुद को संतुलित कर लेगा और नई नौकरियां भी पैदा हो सकती हैं.

बेरोजगारी में अस्थायी बढ़ोतरी

हालांकि रिपोर्ट यह भी बताती है कि ट्रांजिशन पीरियड के दौरान बेरोजगारी में अस्थायी बढ़ोतरी हो सकती है. जब पुराने काम खत्म होंगे और नए काम पूरी तरह से तैयार नहीं होंगे, तो कुछ समय के लिए नौकरी जाने का खतरा रहेगा. इस दौरान बेरोजगारी दर में लगभग 0.6 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हो सकती है, जिससे अनुमानित तौर पर 10 लाख लोग अस्थायी रूप से बेरोजगार हो सकते हैं.

तकनीकी बदलावों के इतिहास से AI का संबंध

Goldman Sachs ने AI के प्रभाव को तकनीकी बदलावों के लंबे इतिहास से जोड़ा है. रिपोर्ट में कहा गया है कि आज जो 40% लोग काम कर रहे हैं, वे वही पेशेवर हैं जो 85 साल पहले भी मौजूद थे. इससे यह स्पष्ट होता है कि तकनीक न केवल पुरानी नौकरियों को खत्म करती है, बल्कि नई नौकरियां भी पैदा करती है. उदाहरण के तौर पर, कंप्यूटर से जुड़ी नौकरी की श्रेणी 30-40 साल पहले नहीं थी, लेकिन आज लाखों लोग इस क्षेत्र में काम कर रहे हैं. इसी तरह, गिग इकॉनमी, ई-कॉमर्स, कंटेंट क्रिएशन और गेमिंग जैसे सेक्टर भी रोजगार के नए अवसरों को जन्म दे रहे हैं.

AI और मानव संसाधन का संतुलन

AI का असर सकारात्मक या नकारात्मक कैसे होगा, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि वर्कर्स, कंपनियां और सरकारें खुद को कितनी जल्दी इस बदलाव के अनुरूप ढाल पाती हैं. नई स्किल्स सीखना, एजुकेशन सिस्टम में बदलाव और AI से जुड़े नए प्रकार के रोजगार तैयार करना आगामी समय की सबसे बड़ी चुनौती होगी.

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