इस्लामाबाद/रावलकोट: पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में हालात एक बार फिर तनावपूर्ण बताए जा रहे हैं. स्थानीय संगठनों ने आरोप लगाया है कि सुरक्षाबलों की कार्रवाई में कई प्रदर्शनकारियों की जान चली गई. घटना के बाद पूरे क्षेत्र में माहौल काफी गर्म हो गया है और विभिन्न संगठनों ने इसकी निंदा की है.
प्रदर्शनों का नेतृत्व कर रही जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) का आरोप है कि रावलकोट में एक प्रदर्शनकारी के जनाजे के दौरान बड़ी संख्या में लोग एकत्रित हुए थे. बताया गया कि शाहजेब हबीब नामक व्यक्ति की मौत के बाद लोग अंतिम प्रार्थना सभा में शामिल होने पहुंचे थे.
कमेटी के अनुसार, कार्यक्रम के दौरान मौजूद लोग पाकिस्तान सरकार और सुरक्षा एजेंसियों के खिलाफ नारेबाजी कर रहे थे. इसी बीच सुरक्षाबलों और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव बढ़ गया और हालात बिगड़ गए.
कई लोगों के मारे जाने का दावा
जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी का कहना है कि सुरक्षा बलों की गोलीबारी में कम से कम 27 लोगों की मौत हुई है. वहीं कुछ स्थानीय सूत्र इससे अधिक लोगों के हताहत होने का दावा कर रहे हैं. हालांकि स्वतंत्र रूप से इन आंकड़ों की पुष्टि नहीं हो सकी है.
घटना में घायल और लापता लोगों की संख्या को लेकर भी अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं.
बड़ी संख्या में हिरासत की बात
कमेटी ने आरोप लगाया है कि कार्रवाई के बाद अस्पताल परिसर और आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोगों को हिरासत में लिया गया. संगठन का कहना है कि कई लोगों का अब तक पता नहीं चल पाया है.
इसके अलावा यह भी दावा किया गया है कि मृतकों के शवों को सुरक्षा एजेंसियों ने अपने नियंत्रण में ले लिया है. हालांकि इन आरोपों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है.
लंबे समय से जारी है असंतोष
पीओके में पिछले कुछ सप्ताहों से राजनीतिक और प्रशासनिक मुद्दों को लेकर विरोध प्रदर्शन जारी हैं. स्थानीय संगठनों का आरोप है कि क्षेत्र में लोगों के अधिकारों और नागरिक स्वतंत्रताओं से जुड़े कई सवाल लंबे समय से अनसुलझे हैं.
इसी वजह से विभिन्न इलाकों में समय-समय पर प्रदर्शन और रैलियां आयोजित की जा रही हैं. हाल के दिनों में प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच कई बार टकराव की घटनाएं भी सामने आई हैं.
चुनावी माहौल के बीच बढ़ा तनाव
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब गिलगित-बाल्टिस्तान में हाल ही में चुनावी प्रक्रिया संपन्न हुई है. राजनीतिक गतिविधियों और विरोध प्रदर्शनों के बीच क्षेत्र में तनाव पहले से ही बना हुआ था.
स्थानीय संगठनों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है. वहीं क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है और हालात पर नजर रखी जा रही है.
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