Share Market: सप्ताह के पहले कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार में जोरदार बिकवाली देखने को मिली. शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स करीब 800 अंक तक टूट गया, जबकि निफ्टी 250 अंकों से अधिक फिसलकर 23,100 के आसपास कारोबार करता नजर आया. बाजार में कमजोरी का असर लगभग सभी सेक्टरों में देखने को मिला और निवेशकों के बीच सतर्कता बढ़ गई.
बाजार में बढ़ती अस्थिरता का संकेत देने वाला इंडिया VIX भी करीब 8 फीसदी चढ़ गया, जिससे निवेशकों की चिंता और बढ़ गई.
आईटी और ऑटो शेयरों पर दबाव
निफ्टी के कमजोर प्रदर्शन करने वाले प्रमुख शेयरों में विप्रो, टीसीएस और महिंद्रा एंड महिंद्रा शामिल रहे. इन कंपनियों के शेयरों में 2 से 4 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई. इसके अलावा कई अन्य सेक्टरों में भी बिकवाली का दबाव बना रहा.
कच्चे तेल की कीमतों ने बढ़ाई चिंता
वैश्विक बाजारों में तनाव बढ़ने के बीच कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला है. पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण तेल आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका बढ़ी है.
रिपोर्टों के अनुसार ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 3.5 प्रतिशत बढ़कर 96.5 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गई. तेल महंगा होने से भारत जैसे आयात-निर्भर देशों पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव बढ़ने की आशंका रहती है, जिसका असर शेयर बाजार पर भी दिखाई देता है.
रुपये में कमजोरी
सोमवार को भारतीय मुद्रा भी दबाव में रही. रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले कमजोर होकर खुला और पिछले कारोबारी सत्र की तुलना में गिरावट दर्ज की गई.
विशेषज्ञों का मानना है कि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, वैश्विक बाजारों में कमजोरी और विदेशी निवेशकों की निकासी रुपये पर दबाव बना रही हैं.
मध्य पूर्व का तनाव बना बड़ी वजह
पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव ने भी निवेशकों की चिंता बढ़ाई है. ईरान और इजरायल के बीच हालिया घटनाक्रम के बाद वैश्विक निवेशक जोखिम वाले एसेट्स से दूरी बनाते दिखाई दे रहे हैं.
क्षेत्र में बढ़ती अनिश्चितता का असर अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर भी देखने को मिला है, जिसका सीधा प्रभाव भारतीय शेयर बाजार पर पड़ा.
विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली
भारतीय बाजार में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की लगातार बिकवाली भी गिरावट की प्रमुख वजहों में शामिल है.
हाल के कारोबारी सत्रों में विदेशी निवेशकों ने लगातार भारतीय शेयरों से पैसा निकाला है. शुक्रवार को भी बड़ी मात्रा में बिकवाली दर्ज की गई, जिससे बाजार की धारणा कमजोर हुई. विदेशी पूंजी के लगातार बाहर जाने से निवेशकों का भरोसा प्रभावित हुआ है और बाजार पर दबाव बना हुआ है.
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