दिल्ली से सटे फरीदाबाद से सामने आई एक दिल दहला देने वाली घटना ने पूरे समाज को झकझोर कर रख दिया है. जहां एक तरफ माता-पिता बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए मेहनत करते हैं, वहीं यहां “पढ़ाई” के दबाव ने एक मासूम की जान ले ली. सेक्टर-58 थाना क्षेत्र में एक पिता ने अपनी ही चार साल की बेटी की बेरहमी से पिटाई कर दी, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई. वजह सिर्फ इतनी थी कि बच्ची 1 से 50 तक गिनती सही ढंग से नहीं लिख पाई थी. यह घटना 21 जनवरी की है, लेकिन पुलिस जांच के बाद शुक्रवार को इसका भयावह सच सामने आया.
पुलिस के अनुसार, आरोपी की पहचान 31 वर्षीय कृष्णा जायसवाल के रूप में हुई है, जो मूल रूप से उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले का रहने वाला है. वह अपनी पत्नी और दो बच्चों के साथ फरीदाबाद में रह रहा था. दंपती दोनों निजी कंपनियों में काम करते थे. पत्नी दिन की शिफ्ट में नौकरी करती थी, जबकि कृष्णा घर पर रहकर बच्चों की देखभाल करता था. इसी दौरान वह अपनी चार साल की बेटी को घर पर ही पढ़ाया करता था. घटना वाले दिन कृष्णा बच्ची को कागज पर गिनती लिखने के लिए कह रहा था. छोटी उम्र के कारण बच्ची यह काम ठीक से नहीं कर सकी. बताया जा रहा है कि इसी बात पर कृष्णा का गुस्सा बेकाबू हो गया और उसने मासूम पर हाथ उठा दिया. गुस्से में उसने बच्ची को इतनी बेरहमी से पीटा कि वह बेहोश होकर जमीन पर गिर पड़ी.
मासूम की चीखें भी नहीं पिघला सकीं दिल
पुलिस पूछताछ में सामने आया है कि बच्ची लगातार रोती-चिल्लाती रही, लेकिन आरोपी का दिल नहीं पसीजा. सिर और शरीर के अन्य हिस्सों में गंभीर चोटें लगने के कारण बच्ची ने दम तोड़ दिया. घटना के बाद आरोपी घबरा गया और किसी को इसकी जानकारी नहीं दी.
मां के सामने टूटी दुनिया
शाम को जब बच्ची की मां काम से घर लौटी, तो उसने अपनी बेटी को अचेत अवस्था में पड़ा देखा. बेटी की हालत देखकर उसके पैरों तले जमीन खिसक गई. घर के हालात और पति के बर्ताव से उसे शक हुआ, जिसके बाद उसने तुरंत पुलिस को सूचना दी. पुलिस मौके पर पहुंची और बच्ची के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा.
आरोपी गिरफ्तार, जांच जारी
फरीदाबाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी कृष्णा जायसवाल को गिरफ्तार कर लिया है. उसे अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे एक दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया. पुलिस अब यह जांच कर रही है कि क्या इससे पहले भी बच्ची के साथ मारपीट की जाती थी और क्या आरोपी को किसी तरह की मानसिक समस्या थी.यह घटना न सिर्फ एक परिवार की त्रासदी है, बल्कि समाज के लिए भी एक कड़ा सवाल छोड़ जाती है कि पढ़ाई और अनुशासन के नाम पर बच्चों पर बढ़ता दबाव आखिर कब रुकेगा.
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