यूरोपीय संघ की एक शीर्ष नेता उस वक्त हैरान रह गईं जब उनका विमान अचानक नेविगेशन इंटरफेरेंस का शिकार हो गया. मामला केवल तकनीकी खराबी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि एक बड़ी भू-राजनीतिक चेतावनी में तब्दील हो गया.
यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन का विमान जब बुल्गारिया के आसमान से गुजर रहा था, तभी उसका GPS और रडार सिस्टम अचानक बाधित हो गया. यह घटना उस समय हुई जब वे एक राजनयिक दौरे पर थीं, जिसका उद्देश्य EU की पूर्वी सीमाओं पर सहयोग और सुरक्षा को मज़बूत करना था.
क्या हुआ उस दिन?
EU प्रवक्ता एरिआना पोडेस्टा ने मीडिया को बताया कि जैसे ही विमान प्लोवदीव एयरपोर्ट के समीप पहुंचा, GPS सिग्नल पूरी तरह जाम हो गया. हालांकि, पायलटों ने परिस्थिति को नियंत्रित करते हुए विमान की सुरक्षित लैंडिंग कराई. इसमें उल्लेखनीय यह रहा कि उन्होंने पेपर मैप्स (मैनुअल चार्ट्स) का इस्तेमाल किया, जो आज के अत्याधुनिक एविएशन युग में दुर्लभ स्थिति है.
बुल्गारियाई अधिकारियों ने संकेत दिया कि यह "स्पष्ट हस्तक्षेप" (Blatant Interference) हो सकता है, जिसके पीछे रूस का हाथ होने की आशंका है. उनके अनुसार, ऐसा व्यवस्थित और ताकतवर जामिंग केवल राज्य प्रायोजित हस्तक्षेप ही कर सकता है.
रूस पर क्यों है शक?
यूरोपीय विशेषज्ञों और रक्षा अधिकारियों का मानना है कि रूस पहले भी बाल्टिक, स्कैंडिनेवियाई, और पूर्वी यूरोपीय देशों के हवाई क्षेत्र में इसी तरह की गतिविधियों में शामिल रहा है. शोधकर्ताओं की ताजा रिपोर्टों के अनुसार, रूस की “शैडो फ्लीट” और कैलिनिनग्राद जैसे सैन्य ठिकानों से इन सिग्नलों में व्यवस्थित हस्तक्षेप किया जाता रहा है.
यह भी ज्ञात है कि GPS जैमिंग और साइबर युद्ध रूस की "हाइब्रिड वॉरफेयर" रणनीति का हिस्सा रहे हैं. यानी हथियारों से नहीं, बल्कि तकनीक, सूचना और नेटवर्क के माध्यम से युद्ध जैसी स्थिति पैदा करना.
उर्सुला वॉन डेर लेयेन की प्रतिक्रिया
घटना के बाद वॉन डेर लेयेन ने बुल्गारिया में प्रेस को संबोधित करते हुए रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को “एक शिकारी” करार दिया. उन्होंने दो टूक कहा कि ऐसे खतरों को रोकने के लिए केवल मजबूत नीतियां और सक्रिय निरोध (Deterrence) ही समाधान है.
उन्होंने इस घटना को एक उदाहरण बताते हुए कहा कि आज के समय में यूरोप केवल सैन्य खतरे नहीं, बल्कि प्रौद्योगिकीय खतरे भी झेल रहा है. ऐसे में EU को एकजुट होकर न सिर्फ़ सुरक्षा बढ़ानी होगी, बल्कि तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में भी आगे बढ़ना होगा.
क्या यह एक राजनीतिक संदेश था?
यह घटना केवल तकनीकी नहीं थी, बल्कि राजनीतिक चेतावनी भी मानी जा रही है. हाल ही में वॉन डेर लेयेन अमेरिका में आयोजित “यूक्रेन समिट” में शामिल हुई थीं, जहां उन्होंने कीव को अधिक समर्थन देने की वकालत की थी. माना जा रहा है कि यह विमान इंटरफेरेंस उसी का प्रतिक्रिया स्वरूप हो सकता है.
यह भी ध्यान देने योग्य है कि रूस लंबे समय से EU और NATO के खिलाफ सॉफ्ट और हाइब्रिड वॉरफेयर को एक हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रहा है. इस घटना से यह संकेत भी जाता है कि यूरोप के नेता भी अब सीधे निशाने पर हैं.
कागज़ी नक्शों से कराई लैंडिंग
विमान की लैंडिंग को लेकर सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि जब सभी डिजिटल नेविगेशन सिस्टम फेल हो गए, तब पायलटों ने पुराने तरीकों पेपर मैप्स का सहारा लिया. CNN की रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ कि संपूर्ण विमान नियंत्रण मैनुअल मोड में चला गया था, जिससे पता चलता है कि हालात कितने गंभीर थे.
यह केवल एक एयर ट्रैफिक घटना नहीं थी, बल्कि यह सवाल भी खड़ा करती है कि यदि इतना उन्नत विमान ऐसी दिक्कतों में फंस सकता है, तो बाकी नागरिक उड्डयन प्रणाली कितनी असुरक्षित है?
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