एर्दोगन का दोहरा चेहरा हुआ एक्सपोज, जिस नेतन्याहू को बताया था हिटलर; उसे चोरी-छुपे भेज रहा ये सामान

Turkey Netanyahu Oil Deal: इजरायल पर तीखे बयानों और फिलिस्तीन के समर्थन की खुली वकालत के बीच अब तुर्की की असलियत पर सवाल उठने लगे हैं. तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप एर्दोगन ने हाल ही में प्रधानमंत्री नेतन्याहू की तुलना हिटलर से की थी और गाजा पर इजरायल के हमलों की तीखी आलोचना की थी.

Erdogan Netanyahu whom he called Hitler This stuff is being sent to him secretly
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Turkey Netanyahu Oil Deal: इजरायल पर तीखे बयानों और फिलिस्तीन के समर्थन की खुली वकालत के बीच अब तुर्की की असलियत पर सवाल उठने लगे हैं. तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप एर्दोगन ने हाल ही में प्रधानमंत्री नेतन्याहू की तुलना हिटलर से की थी और गाजा पर इजरायल के हमलों की तीखी आलोचना की थी. लेकिन अब एक नई रिपोर्ट सामने आई है जो तुर्की के कथित ‘नैतिक स्टैंड’ पर गंभीर प्रश्नचिन्ह लगाती है.

ब्रिटेन की प्रतिष्ठित वेबसाइट Middle East Eye की रिपोर्ट के मुताबिक, तुर्की के जेहान बंदरगाह से एक तेल टैंकर “Nissos Tinos” ने इजरायल को कच्चा तेल पहुंचाया है. और यह कोई पहली बार नहीं हुआ है. रिपोर्ट में बताया गया है कि यह टैंकर इससे पहले भी इजरायल के अशकेलॉन बंदरगाह पर दो बार तेल उतार चुका है.

गुपचुप रवाना होते हैं टैंकर

AIS (Automatic Identification System) डेटा और सैटेलाइट इमेज से पता चलता है कि जैसे ही ये टैंकर जेहान से निकलते हैं, वे अपने ट्रैकिंग सिस्टम बंद कर देते हैं ताकि उनके गंतव्य की जानकारी छिपी रह सके. लेकिन जानकार रिसर्चर्स ने इनकी गतिविधियों को सैटेलाइट से ट्रैक किया और पाया कि ये सीधे इजरायल पहुंचते हैं.

इसी तरह का एक और मामला सामने आया है टैंकर “Kimolos” का, जो 27 सितंबर को जेहान से निकला, बताया कि वह मिस्र के पोर्ट सईद जा रहा है, लेकिन बाद में उसका ट्रैकर बंद हो गया और सैटेलाइट इमेज में वह सीधे इजरायली तट पर दिखाई दिया.

बयानबाजी बनाम हकीकत

तुर्की ने मई 2024 में इजरायल पर व्यापार प्रतिबंध लगाने का दावा किया था, जिसमें इजरायली जहाजों को बंदरगाहों से रोकने और हवाई क्षेत्र बंद करने जैसे फैसले भी शामिल थे. लेकिन “No Harbor for Genocide” और “Palestinian Youth Movement” जैसे संगठनों की जांच में सामने आया है कि इस प्रतिबंध के बावजूद कच्चा तेल लगातार इजरायल पहुंचाया जा रहा है.

यह भी खुलासा हुआ है कि इजरायल अपनी कुल कच्चे तेल की जरूरत का लगभग 30% हिस्सा तुर्की के जेहान बंदरगाह से प्राप्त करता है, जहां BP की संचालित Baku-Tbilisi-Ceyhan (BTC) पाइपलाइन से अजरबैजान का तेल आता है.

सिर्फ एक जहाज नहीं, पूरी व्यवस्था

शोधकर्ताओं का कहना है कि यह केवल एक शिपमेंट नहीं है. हर महीने तुर्की से इजरायल को कई टन कच्चा तेल भेजा जा रहा है, जिसे ट्रैकर बंद करके गुप्त रखा जाता है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, बिना इस तेल के इजरायली सेना के लड़ाकू विमान और सैन्य उपकरण ऑपरेट करना मुश्किल हो सकता है. अगर अंतरराष्ट्रीय अदालत (ICJ) यह साबित करती है कि गाजा में नरसंहार हो रहा है, तो तुर्की की यह भूमिका अंतरराष्ट्रीय कानूनों का सीधा उल्लंघन मानी जा सकती है.

तुर्की सरकार का क्या कहना है?

तुर्की के ऊर्जा मंत्रालय का दावा है कि मई के बाद से कोई भी टैंकर इजरायल नहीं भेजा गया है. लेकिन यह भी सच है कि बंदरगाह अधिकारियों को मौखिक रूप से निर्देश दिए गए हैं कि वे ऐसे जहाजों को मंजूरी न दें, कोई लिखित दस्तावेज मौजूद नहीं है. वहीं, संयुक्त राष्ट्र के व्यापार आंकड़ों के अनुसार, तुर्की 2024 में इजरायल का पांचवां सबसे बड़ा निर्यातक देश रहा, जबकि उस वक्त तुर्की सरकार 'पूर्ण प्रतिबंध' का दावा कर रही थी.

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