UP Minister Oath Ceromany: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सरकार में रविवार को बड़ा कैबिनेट विस्तार किया गया. लखनऊ के लोकभवन में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कई नेताओं को मंत्री पद की शपथ दिलाई. इस विस्तार को 2027 विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी की बड़ी राजनीतिक रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है.
शपथ लेने वालों में भूपेंद्र चौधरी, कृष्णा पासवान, हंसराज विश्वकर्मा, मनोज पांडे, कैलाश राजपूत और सुरेंद्र दिलेर जैसे नए चेहरे शामिल रहे. इसके अलावा सोमेंद्र तोमर और अजीत सिंह पाल को प्रमोशन देते हुए मंत्री पद की शपथ दिलाई गई.
सीएम योगी और राज्यपाल की मुलाकात के बाद खत्म हुई अटकलें
यह शपथ ग्रहण समारोह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल से मुलाकात के एक दिन बाद आयोजित किया गया. लंबे समय से यूपी मंत्रिमंडल में फेरबदल और विस्तार की चर्चा चल रही थी. आखिरकार रविवार को हुए इस विस्तार के साथ उन अटकलों पर विराम लग गया. भाजपा संगठन और सरकार दोनों स्तर पर पिछले कुछ समय से नए चेहरों को मौका देने और आगामी चुनावों को ध्यान में रखते हुए सामाजिक समीकरण मजबूत करने पर काम किया जा रहा था.
#WATCH | Lucknow: BJP leader Bhupendra Singh takes oath as a minister in the state cabinet led by CM Yogi Adityanath. pic.twitter.com/HIkAaeS3ZL
— ANI (@ANI) May 10, 2026
भूपेंद्र चौधरी को मिली बड़ी जिम्मेदारी
भूपेंद्र चौधरी पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भाजपा के बड़े जाट चेहरों में गिने जाते हैं. वह मुरादाबाद से आते हैं और लंबे समय से संघ और भाजपा संगठन में सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं.
वह पहली बार 2016 में विधान परिषद सदस्य बने थे और फिलहाल भी एमएलसी हैं. 2017 में भाजपा सरकार बनने के बाद उन्हें पंचायती राज राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) बनाया गया था. बाद में 2019 में उन्हें कैबिनेट मंत्री का दर्जा मिला. भाजपा संगठन में भी उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है.
मनोज पांडे की एंट्री से ब्राह्मण राजनीति को साधने की कोशिश
मनोज पांडे रायबरेली की ऊंचाहार विधानसभा सीट से विधायक हैं. वह पहले समाजवादी पार्टी में रहे और 2012 से 2017 तक सपा सरकार में कैबिनेट मंत्री भी रह चुके हैं. 2022 विधानसभा चुनाव में वह सपा के टिकट पर विधायक चुने गए थे. उन्हें अवध और पूर्वांचल क्षेत्र का बड़ा ब्राह्मण चेहरा माना जाता है. विधानसभा में वह सपा के चीफ व्हिप भी रह चुके हैं. भाजपा में उनकी एंट्री को ब्राह्मण वोट बैंक के लिहाज से अहम माना जा रहा है.
संघर्ष से राजनीति तक पहुंचीं कृष्णा पासवान
कृष्णा पासवान फतेहपुर जिले की खागा विधानसभा सीट से भाजपा विधायक हैं. उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत बेहद साधारण परिस्थितियों से की थी. कभी आंगनवाड़ी कार्यकर्ता रहीं कृष्णा पासवान आज जिले की प्रमुख दलित महिला नेताओं में गिनी जाती हैं. वह चार बार विधायक और दो बार जिला पंचायत सदस्य रह चुकी हैं. भाजपा संगठन में उन्हें भरोसेमंद महिला चेहरे के तौर पर देखा जाता है.
सुरेंद्र दिलेर का मजबूत राजनीतिक परिवार
सुरेंद्र दिलेर अलीगढ़ जिले की खैर विधानसभा सीट से विधायक हैं. वह भाजपा के युवा दलित नेताओं में शामिल हैं. उनका परिवार लंबे समय से राजनीति में सक्रिय रहा है. उनके पिता राजवीर सिंह दिलेर पूर्व सांसद और विधायक रह चुके हैं, जबकि उनके दादा किशन लाल दिलेर छह बार विधायक और चार बार सांसद रहे थे. भाजपा ने सुरेंद्र दिलेर को आगे बढ़ाकर दलित समाज में अपनी पकड़ मजबूत करने का संकेत दिया है.
हंसराज विश्वकर्मा की संगठन में मजबूत पकड़
हंसराज विश्वकर्मा भाजपा के एमएलसी हैं और पिछड़े वर्ग की राजनीति में उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है. वह पिछले तीन दशक से ज्यादा समय से राजनीति में सक्रिय हैं. उन्होंने 1989 में बूथ स्तर से अपना राजनीतिक सफर शुरू किया था. राम मंदिर आंदोलन में भी उन्होंने सक्रिय भूमिका निभाई थी. वाराणसी क्षेत्र में भाजपा की चुनावी रणनीति को मजबूत करने में उनका योगदान अहम माना जाता है.
कई दलों में रह चुके हैं कैलाश सिंह राजपूत
कैलाश सिंह राजपूत कन्नौज जिले की तिर्वा विधानसभा सीट से विधायक हैं. उन्होंने 1996 में पहली बार भाजपा के टिकट पर चुनाव जीतकर विधानसभा में एंट्री की थी. बाद में वह बसपा में शामिल हुए और 2007 में BSP के टिकट पर भी चुनाव जीते. हालांकि 2017 में उन्होंने फिर भाजपा का दामन थाम लिया और विधानसभा पहुंचे. 2022 में भी उन्होंने जीत दर्ज की.
2027 चुनाव से पहले भाजपा का बड़ा संदेश
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस कैबिनेट विस्तार के जरिए भाजपा ने साफ संकेत दिया है कि पार्टी अब 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारी में पूरी तरह जुट चुकी है.
क्षेत्रीय और जातीय संतुलन साधने के साथ-साथ पार्टी ने ऐसे नेताओं को मौका दिया है जिनकी अपने-अपने इलाकों और समाज में मजबूत पकड़ मानी जाती है. इससे भाजपा संगठन और सरकार दोनों स्तर पर नए समीकरण बनाने की कोशिश करती नजर आ रही है.
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