बांग्लादेश में नहीं लौट पाएगी शेख हसीना की सरकार! इलेक्शन कमिशन के एक्शन के बाद गिरी गाज

बांग्लादेश में आगामी आम चुनावों से पहले एक बड़ा राजनीतिक भूचाल आ गया है. देश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना और उनके करीबी रिश्तेदारों के राष्ट्रीय पहचान पत्र (NID) को चुनाव आयोग ने अवैध घोषित कर दिया है, जिसके चलते अब वे वोट डालने के अधिकार से वंचित हो गई हैं.

Election Commission Blocked Nid of sheikh hasina and her family can not caste vote in february
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बांग्लादेश में आगामी आम चुनावों से पहले एक बड़ा राजनीतिक भूचाल आ गया है. देश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना और उनके करीबी रिश्तेदारों के राष्ट्रीय पहचान पत्र (NID) को चुनाव आयोग ने अवैध घोषित कर दिया है, जिसके चलते अब वे वोट डालने के अधिकार से वंचित हो गई हैं.

इस आश्चर्यजनक फैसले की पुष्टि खुद चुनाव आयोग के सचिव अख्तर अहमद ने की. उन्होंने कहा कि जिन व्यक्तियों का NID लॉक किया जाता है, वे विदेश में रहकर भी चुनाव में हिस्सा नहीं ले सकते. इसका मतलब है कि शेख हसीना और उनके परिवारजन अब 2026 में होने वाले आम चुनाव में मतदान नहीं कर पाएंगे.

परिवार समेत कई प्रमुख नाम शामिल, सख्ती से लिया गया फैसला

चुनाव आयोग के अधिकारियों के अनुसार, यह कदम सिर्फ शेख हसीना तक सीमित नहीं रहा. उनके पूरे परिवार के साथ-साथ कुछ पूर्व सहयोगियों के NID भी ब्लॉक कर दिए गए हैं. सूत्रों के अनुसार जिनके पहचान पत्र निष्क्रिय किए गए हैं, उनमें शामिल हैं. शेख हसीना की बहन शेख रेहाना, उनका बेटा सजीब वाजेद जॉय, उनकी बेटी साइमा वाजेद पुतुल, रेहाना के बच्चे, पूर्व सुरक्षा सलाहकार रिटायर्ड मेजर जनरल तारिक सिद्दीकी और उनके परिवार के सदस्य, हालांकि इस पूरे घटनाक्रम पर आयोग के सचिव अख्तर अहमद ने अतिरिक्त टिप्पणी करने से परहेज़ किया.

NID: प्रवासी वोटरों के लिए अहम दस्तावेज

बांग्लादेश में राष्ट्रीय पहचान पत्र (NID) न केवल एक पहचान का माध्यम है, बल्कि यह उन प्रवासी नागरिकों को भी वोटिंग का अधिकार देता है जो विदेशों में रह रहे हैं. अख्तर अहमद ने जानकारी दी कि यदि किसी व्यक्ति का NID लॉक कर दिया जाता है, तो वह व्यक्ति देश से बाहर रहते हुए भी मतदान करने के अधिकार से वंचित हो जाता है. आयोग का तर्क है कि जिन लोगों पर गंभीर आरोप हों या जो न्याय से बचने के लिए देश से भागे हों, उनके वोटिंग अधिकारों को निलंबित किया जा सकता है.

पिछले साल की घटनाएं बनीं कारण

गौरतलब है कि 2024 में बांग्लादेश में हिंसक छात्र आंदोलन और राजनीतिक उथल-पुथल के बाद शेख हसीना को देश छोड़कर भारत जाना पड़ा था. इसके बाद उनकी सरकार गिर गई और डॉ. मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व में एक अंतरिम सरकार का गठन किया गया. यही नहीं, यूनुस सरकार ने शेख हसीना और उनके सहयोगियों के खिलाफ मानवता विरोधी अपराधों में मुकदमे भी दर्ज किए, और आवामी लीग पार्टी की सभी गतिविधियां निलंबित कर दी गईं. अब चुनाव से पहले NID लॉक कर दिए जाने का निर्णय इसी श्रृंखला का अगला बड़ा कदम माना जा रहा है.

राजनीतिक संकेत और संभावित असर

विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला बांग्लादेश की राजनीति में एक नए युग की शुरुआत का संकेत है, जहां पुराने सत्ता केंद्रों को न्यायिक और संस्थागत प्रक्रियाओं के जरिए चुनौती दी जा रही है. लेकिन विपक्षी दल इस कार्रवाई को राजनीतिक प्रतिशोध के रूप में देख सकते हैं. यदि यह टकराव बढ़ा तो बांग्लादेश की चुनावी प्रक्रिया पर भी सवाल उठ सकते हैं.

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