दुनिया पहले ही जलवायु परिवर्तन की मार झेल रही है. कहीं रिकॉर्ड तोड़ गर्मी लोगों की जान ले रही है तो कहीं बाढ़ और भारी बारिश सामान्य जीवन को अस्त-व्यस्त कर रही है. इसी बीच वैज्ञानिकों ने एक और गंभीर चेतावनी जारी की है. उनका कहना है कि प्रशांत महासागर में तेजी से विकसित हो रहा अल नीनो (El Niño) आने वाले महीनों में वैश्विक मौसम को और अधिक असंतुलित कर सकता है. इसका असर केवल तापमान तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सूखा, लू, जंगलों में आग, अत्यधिक बारिश और कृषि पर भी व्यापक प्रभाव देखने को मिल सकता है. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह प्रणाली अपने चरम पर पहुंचती है तो वर्ष 2027 तक दुनिया को अभूतपूर्व मौसमीय चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है.
क्या है अल नीनो और क्यों बढ़ रही है चिंता?
अल नीनो एक प्राकृतिक जलवायु प्रणाली है, जिसमें भूमध्य रेखा के पास प्रशांत महासागर की सतह का पानी सामान्य से अधिक गर्म हो जाता है. समुद्र के तापमान में यह असामान्य बढ़ोतरी पूरी दुनिया के मौसम चक्र को प्रभावित करती है. इससे कई देशों में सामान्य वर्षा का पैटर्न बदल जाता है, कहीं सूखा पड़ता है तो कहीं अत्यधिक बारिश और बाढ़ जैसी स्थितियां बन जाती हैं.
वैज्ञानिकों का कहना है कि इस बार अल नीनो ऐसे समय में सक्रिय हो रहा है, जब पृथ्वी पहले से ही ग्लोबल वार्मिंग के कारण रिकॉर्ड तापमान झेल रही है. ऐसे में दोनों का संयुक्त प्रभाव मौसम को और अधिक चरम बना सकता है.
WMO ने जारी की गंभीर चेतावनी
संयुक्त राष्ट्र की मौसम एजेंसी वर्ल्ड मेटियोरोलॉजिकल ऑर्गनाइजेशन (WMO) ने अपनी ताजा चेतावनी में कहा है कि अल नीनो तेजी से मजबूत हो रहा है और इसका असर आने वाले कई महीनों तक बना रह सकता है. एजेंसी का अनुमान है कि इसका प्रभाव वर्ष 2027 के वसंत तक महसूस किया जा सकता है.
डब्ल्यूएमओ के अनुसार, अल नीनो के कारण वैश्विक तापमान में और वृद्धि होगी. इससे दुनिया के कई हिस्सों में लू, सूखा, बाढ़ और जंगलों में आग जैसी चरम मौसमीय घटनाओं की संभावना बढ़ जाएगी. एजेंसी ने यह भी स्पष्ट किया है कि पृथ्वी पहले ही लगातार गर्म होती जा रही है और अल नीनो इस प्रक्रिया को और तेज करेगा.
समुद्र का बढ़ता तापमान बदलेगा मौसम का संतुलन
विशेषज्ञों के अनुसार, मध्य प्रशांत महासागर की सतह का तापमान सामान्य से लगभग 2.9 डिग्री सेल्सियस तक अधिक हो सकता है. समुद्र का गर्म पानी वायुमंडलीय दबाव और हवाओं के पैटर्न को प्रभावित करता है, जिससे पूरी दुनिया का मौसम बदल जाता है.
यही वजह है कि एक महासागर में होने वाला परिवर्तन हजारों किलोमीटर दूर स्थित देशों के मौसम को भी प्रभावित कर सकता है. वैज्ञानिकों का कहना है कि समुद्र की सतह जितनी अधिक गर्म होगी, मौसम की चरम घटनाओं की संभावना उतनी ही बढ़ेगी.
संयुक्त राष्ट्र प्रमुख ने जताई चिंता
संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने कहा कि कुछ समय पहले उन्होंने चेतावनी दी थी कि अल नीनो दुनिया के दरवाजे पर दस्तक दे रहा है, लेकिन अब यह पूरी तरह सक्रिय हो चुका है. उनके अनुसार, यह स्थिति बेहद चिंताजनक है क्योंकि दुनिया पहले ही रिकॉर्ड गर्मी और चरम मौसम का सामना कर रही है. उन्होंने कहा कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले वर्षों में जलवायु संकट और गंभीर रूप ले सकता है.
जलवायु परिवर्तन पर तुरंत कार्रवाई की जरूरत
एंटोनियो गुटेरेस ने जलवायु परिवर्तन को रोकने के लिए तत्काल वैश्विक कार्रवाई की आवश्यकता पर जोर दिया. उनका कहना है कि जीवाश्म ईंधन यानी कोयला, तेल और गैस का लगातार बढ़ता उपयोग इस संकट की सबसे बड़ी वजहों में से एक है. उन्होंने दुनिया के देशों से अपील की कि नए कोयला, तेल और गैस परियोजनाओं को रोका जाए और स्वच्छ ऊर्जा की ओर तेजी से बढ़ा जाए. उनका मानना है कि केवल इसी रास्ते से जलवायु परिवर्तन की गति को धीमा किया जा सकता है.
किन क्षेत्रों पर सबसे अधिक असर पड़ेगा?
डब्ल्यूएमओ के अनुसार, लगभग पूरी दुनिया के स्थलीय क्षेत्रों में सामान्य से अधिक तापमान दर्ज होने की संभावना है. हालांकि कुछ क्षेत्र ऐसे हैं जहां इसका प्रभाव अधिक गंभीर हो सकता है. इनमें अफ्रीका, दक्षिणी यूरोप, भारतीय उपमहाद्वीप, पूर्वी एशिया और दक्षिण अमेरिका प्रमुख हैं. इन क्षेत्रों में लंबे समय तक गर्मी, पानी की कमी, कृषि उत्पादन में गिरावट और प्राकृतिक आपदाओं का खतरा बढ़ सकता है.
भारत पर क्या होगा असर?
भारत पहले से ही जलवायु परिवर्तन के प्रभावों का सामना कर रहा है. पिछले कुछ वर्षों में देश ने रिकॉर्ड गर्मी, असामान्य मानसून, अचानक बाढ़ और लंबे सूखे जैसी घटनाएं देखी हैं. ऐसे में अल नीनो के मजबूत होने से मौसम और अधिक अनिश्चित हो सकता है.
विशेषज्ञों का मानना है कि मानसून की बारिश के वितरण में बदलाव देखने को मिल सकता है. कुछ राज्यों में सामान्य से कम बारिश हो सकती है, जबकि कुछ क्षेत्रों में बहुत कम समय में अत्यधिक वर्षा होने की संभावना बढ़ सकती है. इससे खेती, जल संसाधनों और आम जनजीवन पर व्यापक असर पड़ सकता है.
रिकॉर्ड तोड़ सकती है आने वाली गर्मी
वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि यदि अल नीनो अपने अनुमानित चरम स्तर तक पहुंचता है तो आने वाले समय में वैश्विक तापमान नए रिकॉर्ड बना सकता है. हालांकि कंप्यूटर मॉडल अभी भी अलग-अलग अनुमान दे रहे हैं, लेकिन अधिकांश वैज्ञानिक इस बात पर सहमत हैं कि दुनिया को सामान्य से अधिक गर्म मौसम का सामना करना पड़ सकता है. यही कारण है कि मौसम वैज्ञानिक लगातार अल नीनो की गतिविधियों पर नजर बनाए हुए हैं ताकि समय रहते सरकारों और लोगों को आवश्यक चेतावनी दी जा सके.
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