पहले सोना बेचा, अब हीरों की नीलामी... यूक्रेन जंग से रूस में आर्थिक संकट! खाली हो रही पुतिन की तिजोरी?

रूस और यूक्रेन के बीच लंबे समय से चल रही जंग का असर अब रूस की अर्थव्यवस्था पर दिखाई देने लगा है. आर्थिक दबाव से निपटने के लिए रूस सरकार ने पहले बड़ी मात्रा में सोना बेचा और अब सरकारी खजाने में रखे हीरों की नीलामी करने का फैसला किया है.

Economic crisis in Russia due to the Ukraine war set auction diamonds after sold gold
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रूस और यूक्रेन के बीच लंबे समय से चल रही जंग का असर अब रूस की अर्थव्यवस्था पर दिखाई देने लगा है. आर्थिक दबाव से निपटने के लिए रूस सरकार ने पहले बड़ी मात्रा में सोना बेचा और अब सरकारी खजाने में रखे हीरों की नीलामी करने का फैसला किया है.

रूस के वित्त मंत्रालय ने इसके लिए आधिकारिक सूचना जारी की है. इसके मुताबिक 9 सितंबर को मॉस्को में 2.16 ग्राम वजन के हीरों की नीलामी की जाएगी.

सरकारी खजाने में रखे हीरे बेचे जाएंगे

रूस सरकार के अनुसार ये हीरे सरकारी भंडार में रखे गए थे, जिन्हें अब नीलामी के जरिए बेचा जाएगा. इस नीलामी में केवल रूस के नागरिक हिस्सा ले सकेंगे. बोली लगाने के लिए 2500 डॉलर की टोकन राशि जमा करनी होगी. नीलामी में शामिल होने की आखिरी तारीख 20 अगस्त तय की गई है.

नीलामी पूरी होने के बाद खरीदार और सरकार के बीच एक अनुबंध तैयार किया जाएगा. इसी के आधार पर हीरे का मालिकाना हक दिया जाएगा.

रूस ने पहले बेचा था भारी मात्रा में सोना

रूस की आर्थिक स्थिति पर नजर रखने वाली रिपोर्टों के अनुसार, सरकार ने पिछले कुछ समय में अपने भंडार से बड़ी मात्रा में सोना बेचा है.

कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया है कि रूस ने पिछले एक साल में करीब 4 अरब डॉलर का सोना बेचा. वहीं, पिछले छह महीनों में सैकड़ों टन सोने की बिक्री की बात भी सामने आई है. रूसी सरकार ने इन आंकड़ों का खंडन नहीं किया है.

पहली बार बड़े वजन वाले हीरे की नीलामी

रूस में इससे पहले छोटे आकार के हीरों की बिक्री होती रही है, लेकिन अब पहली बार 2.16 ग्राम से ज्यादा वजन वाले हीरे को नीलामी के लिए रखा जा रहा है.

इसे रूस की आर्थिक जरूरतों से जोड़कर देखा जा रहा है.

यूक्रेन युद्ध से बढ़ा आर्थिक दबाव

रूस और यूक्रेन के बीच 2022 से युद्ध जारी है. इस दौरान रूस पर कई अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध लगाए गए हैं.

इन प्रतिबंधों के कारण रूस की तेल और गैस से होने वाली कमाई पर असर पड़ा है. वर्ष 2025 में रूस का तेल और गैस से मिलने वाला राजस्व करीब 24 प्रतिशत घट गया.

इसके अलावा रूस का बजट घाटा भी बढ़ा है. सरकारी आंकड़ों के अनुसार 2025 में रूस का बजट घाटा GDP का 2.6 प्रतिशत रहा, जो 2020 के बाद सबसे ज्यादा था.

तेल ठिकानों पर हमलों से बढ़ी परेशानी

हाल के समय में यूक्रेन ने रूस के तेल और गैस से जुड़े कई ठिकानों पर हमले किए हैं. इससे रूस की ऊर्जा आय पर और दबाव बढ़ा है.

विशेषज्ञों का मानना है कि आर्थिक चुनौतियों से निपटने के लिए रूस अपने सरकारी भंडार का इस्तेमाल कर रहा है.

सोने के बाद अब हीरों की बिक्री इसी रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है. हालांकि रूस के पास अभी भी बड़े प्राकृतिक संसाधन और भंडार मौजूद हैं, लेकिन लंबे युद्ध और प्रतिबंधों ने उसकी अर्थव्यवस्था पर दबाव जरूर बढ़ाया है.

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