बिहार चुनाव से पहले एक्शन में ECI, 474 राजनीतिक दलों का रजिस्ट्रेशन किया खत्म, जानें क्यों हुई कार्रवाई?

भारत के लोकतंत्र को मजबूत बनाने की दिशा में चुनाव आयोग ने कमर कस ली है. शुक्रवार को जारी प्रेस नोट के जरिए आयोग ने खुलासा किया कि लगातार छह साल तक कोई चुनाव न लड़ने वाली 474 गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक पार्टियों का पंजीकरण रद्द कर दिया गया है.

ECI deregisters 474 political parties for election inactivity
Image Source: Social Media

नई दिल्ली: भारत के लोकतंत्र को मजबूत बनाने की दिशा में चुनाव आयोग ने कमर कस ली है. शुक्रवार को जारी प्रेस नोट के जरिए आयोग ने खुलासा किया कि लगातार छह साल तक कोई चुनाव न लड़ने वाली 474 गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक पार्टियों का पंजीकरण रद्द कर दिया गया है. यह दूसरे चरण की कार्रवाई है, जिससे अगस्त 2025 से अब तक कुल 808 ऐसी पार्टियां लिस्ट से गायब हो चुकी हैं. 

334 पार्टियां अगस्त में ही साफ

यह सफाई का सिलसिला नया नहीं है. 9 अगस्त 2025 को पहले चरण में 334 रजिस्टर्ड अनरेकग्नाइज्ड पॉलिटिकल पार्टियों (आरयूपीपी) को बाहर का रास्ता दिखाया गया था. दोनों चरण मिलाकर पिछले दो महीनों में 808 पार्टियां लिस्ट से हट चुकी हैं. पहले कुल 2,520 ऐसी पार्टियां थीं, अब सिर्फ 2,046 बची हैं. राष्ट्रीय स्तर पर 6 मान्यता प्राप्त पार्टियां और 67 राज्य पार्टियां बाकी हैं. आयोग का मकसद निष्क्रिय पार्टियों को हटाकर सिस्टम को चुस्त-दुरुस्त बनाना है.

छह साल बिना चुनाव, तो अलविदा!

जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 29ए के तहत राजनीतिक दलों को पंजीकरण पर चुनाव चिह्न और टैक्स छूट जैसे फायदे मिलते हैं. लेकिन दिशानिर्देश सख्त हैं अगर कोई पार्टी लगातार छह साल तक कोई चुनाव नहीं लड़ती, तो उसका नाम रजिस्टर से कटना ही है. यही नियम इन 474 पार्टियों पर लागू हुआ. आयोग का कहना है कि इससे चुनावी प्रक्रिया पारदर्शी बनेगी और फर्जी या निष्क्रिय संगठनों पर अंकुश लगेगा.

यूपी सबसे ऊपर, 121 पार्टियां गायब

18 सितंबर को हुई डीलिस्टिंग में उत्तर प्रदेश ने सबसे ज्यादा 121 पार्टियों को खोया, उसके बाद महाराष्ट्र (44), तमिलनाडु (42) और दिल्ली (40). पंजाब (21), मध्य प्रदेश (23), बिहार (15) और आंध्र प्रदेश (17) जैसे राज्य भी इस सूची में प्रमुख हैं. ये आंकड़े बताते हैं कि उत्तर भारत में निष्क्रिय पार्टियों का जमावड़ा ज्यादा था. आयोग की यह कार्रवाई पूरे देश में चुनावी हलचल को सकारात्मक दिशा देगी. 

359 पार्टियों पर नकेल

सिर्फ डीलिस्टिंग ही नहीं, आयोग ने 359 अन्य आरयूपीपी पर भी शिकंजा कसा है. ये पार्टियां 2021-22 से 2023-24 तक तीन सालों के लिए सालाना ऑडिटेड अकाउंट्स जमा नहीं कर पाईं, और चुनाव लड़ने के बावजूद खर्च की अनिवार्य रिपोर्ट भी नहीं दी. ये 23 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में फैली हैं, जहां उत्तर प्रदेश (127), तमिलनाडु (39) और दिल्ली (41) सबसे ज्यादा जिम्मेदार हैं. आयोग ने इनके खिलाफ सख्त कदम उठाने का ऐलान किया है. 

कारण बताओ नोटिस

किसी भी पार्टी को बिना वजह नुकसान न हो, इसलिए आयोग ने संबंधित राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों (सीईओ) को निर्देश दिए हैं कि इन 359 पार्टियों को कारण बताओ नोटिस जारी करें. इसके बाद सुनवाई का मौका मिलेगा, जहां पार्टियां अपनी बात रख सकेंगी. आयोग ने साफ कहा, "ईसीआई सीईओ की रिपोर्ट के आधार पर ही किसी आरयूपीपी को लिस्ट से हटाने का अंतिम फैसला लेगा." यह कदम निष्पक्षता सुनिश्चित करता है. 

ये भी पढ़ें: ट्रंप को 'डेड इकोनॉमी' का करारा जवाब, 5 महीने में तीसरी बार दुनिया ने माना लोहा, बढ़ी भारत की ताकत!