सौर मंडल के पास मिला पृथ्वी जैसा ग्रह, सतह पर पानी होने की भी उम्मीद, क्या यहां रह सकता है इंसान?

खगोलविदों ने सौर मंडल से करीब 25 प्रकाश-वर्ष दूर एक ऐसे नए ग्रह की खोज की है, जो पृथ्वी जैसा बताया जा रहा है. यह ग्रह धरती के बाहर जीवन की तलाश के लिए एक अहम टारगेट बन सकता है.

Earth like planet discovered near the solar system potential for surface water
प्रतिकात्मक तस्वीर/ AI

वॉशिंगटन: खगोलविदों ने सौर मंडल से करीब 25 प्रकाश-वर्ष दूर एक ऐसे नए ग्रह की खोज की है, जो पृथ्वी जैसा बताया जा रहा है. यह ग्रह धरती के बाहर जीवन की तलाश के लिए एक अहम टारगेट बन सकता है. नासा के मुताबिक, GJ 3378b नाम का यह ग्रह चट्टानी हो सकता है और अपने तारे के हैबिटेबल जोन यानी रहने लायक इलाके में चक्कर लगा रहा है. यहां तापमान ऐसा हो सकता है कि ग्रह की सतह पर तरल पानी मौजूद रह सके.

द एस्ट्रोफिजिकल जर्नल में प्रकाशित इस खोज से पता चलता है कि सूर्य के आसपास रहने लायक ग्रह पहले लगाए गए अनुमान से ज्यादा हो सकते हैं. 25 प्रकाश-वर्ष की दूरी काफी ज्यादा लगती है, लेकिन खगोलविदों के मुताबिक GJ 3378b धरती के सबसे नजदीकी संभावित रहने लायक ग्रहों में से एक है.

ऐसे हुई GJ 3378b की खोज

इस रिसर्च टीम के प्रमुख और यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया इरविन में एस्ट्रोनॉमी के एसोसिएट प्रोफेसर पॉल रॉबर्टसन ने बताया कि यह ग्रह हमारे सबसे नजदीकी कॉस्मिक पड़ोसियों में से एक है. 25 प्रकाश-वर्ष सुनने में बहुत बड़ी दूरी लगती है, लेकिन हमारी मिल्की वे आकाशगंगा करीब 1 लाख प्रकाश-वर्ष चौड़ी है. इस लिहाज से यह ग्रह हमारे काफी पास है. हालांकि, इसे सामान्य बड़े टेलीस्कोप से सीधे देख पाना संभव नहीं है. GJ 3378b और इसका होस्ट रेड ड्वार्फ स्टार कैमेलोपार्डालिस नाम के उत्तरी तारामंडल में मौजूद हैं.

रेड ड्वार्फ काफी ठंडे तारे होते हैं और ये हमारी आकाशगंगा के करीब 70 फीसदी तारों का हिस्सा हैं. यही वजह है कि सौर मंडल के बाहर जीवन की खोज में इन तारों को काफी अहम माना जाता है. GJ 3378 जैसे रेड ड्वार्फ छोटे और कम रोशनी वाले होते हैं, इसलिए इनके आसपास घूम रहे ग्रहों को ढूंढना आसान नहीं होता.

वैज्ञानिकों ने ग्रह की खोज के लिए रेडियल वेलोसिटी तरीके का इस्तेमाल किया. इसमें टेलीस्कोप तारे की हल्की सी गति या डगमगाहट को पकड़ते हैं. यह हलचल उस ग्रह के गुरुत्वाकर्षण के कारण होती है, जो अपने तारे के चारों ओर घूम रहा होता है. इस हलचल से ग्रह के वजन और उसकी कक्षा के बारे में जानकारी हासिल की जा सकती है.

वैज्ञानिक बोले- पानी के पीछे चलो

पॉल रॉबर्टसन के मुताबिक, वैज्ञानिकों का ध्यान सबसे पहले पानी की तलाश पर रहता है. धरती पर मौजूद हर ज्ञात जीव के लिए पानी जरूरी है. इसलिए जब वैज्ञानिक किसी दूसरे ग्रह पर जीवन के लिए सही परिस्थितियां तलाशते हैं तो पानी को सबसे अहम संकेत माना जाता है.

‘पानी के पीछे चलो’

GJ 3378b अपने तारे के हैबिटेबल जोन में मौजूद है. ऐसे में इसकी सतह पर तरल पानी होने की संभावना हो सकती है. हालांकि, अभी यह साफ नहीं है कि ग्रह पर ऐसा वातावरण मौजूद है या नहीं, जो लंबे समय तक स्थिर सतह की स्थिति बनाए रख सके.

यह ग्रह उस सीमा के करीब है जिसे वैज्ञानिक कॉस्मिक शोरलाइन कहते हैं. यह वह क्षेत्र है जहां तारे से निकलने वाला तेज रेडिएशन धीरे-धीरे ग्रह के वातावरण को नुकसान पहुंचा सकता है. वैज्ञानिकों का मानना है कि अरबों साल पहले मंगल ग्रह के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ होगा.

अब GJ 3378b को बेहतर तरीके से समझने के लिए ज्यादा आधुनिक अंतरिक्ष टेलीस्कोप की जरूरत होगी. इनकी मदद से ग्रह के वातावरण का सीधे अध्ययन किया जा सकेगा. अगर वहां जीवन के लिए सही वातावरण मिला, तो GJ 3378b भविष्य में दूसरी दुनिया में जीवन की खोज के लिए एक मजबूत उम्मीदवार बन सकता है.

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