17 देशों में ड्रोन हमले, 80 हजार का जखीरा… ईरान का गेमचेंजर हथियार बना खतरा, जानें पूरी डिटेल

Iran Drone Power: मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष अब और खतरनाक मोड़ ले चुका है. जंग के दूसरे दिन ईरान ने जवाबी कार्रवाई को और तेज करते हुए खाड़ी क्षेत्र के कई देशों और वहां मौजूद सैन्य व ऊर्जा ठिकानों को निशाना बनाया.

Drone attacks stockpile of 80 thousand Iran game changer weapon becomes a threat know full details
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Iran Drone Power: मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष अब और खतरनाक मोड़ ले चुका है. जंग के दूसरे दिन ईरान ने जवाबी कार्रवाई को और तेज करते हुए खाड़ी क्षेत्र के कई देशों और वहां मौजूद सैन्य व ऊर्जा ठिकानों को निशाना बनाया. कुवैत से लेकर सऊदी अरब तक हमलों की खबरों ने पूरे इलाके में दहशत का माहौल बना दिया है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने एक साथ कई स्थानों पर ड्रोन हमले कर क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ा दिया है.

कुवैत से सऊदी तक हमलों की श्रृंखला

ईरान ने सबसे पहले कुवैत स्थित सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया, जहां से अमेरिकी लड़ाकू विमान संचालित होते हैं. दावा किया जा रहा है कि कई विमानों को नुकसान पहुंचा है और एक फाइटर जेट के क्रैश होने का वीडियो भी सामने आया है. इसके बाद ईरान ने सऊदी अरब के अहम तेल ठिकानों पर हमला किया, जिसमें तनुरा रिफाइनरी को खास तौर पर टारगेट किया गया. यह रिफाइनरी क्षेत्र की ऊर्जा सप्लाई के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है.

इसी के साथ तुर्की, कतर और अन्य स्थानों पर भी हमलों की खबरें सामने आई हैं. बताया जा रहा है कि ईरान ने एक ही दिन में करीब 17 देशों या उनके सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया, जिससे पूरे क्षेत्र में अस्थिरता और बढ़ गई है.

पहले दिन भी बड़े पैमाने पर हमले

संघर्ष के पहले दिन भी ईरान ने बड़े स्तर पर ड्रोन हमले किए थे. अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स के अनुसार, करीब 1000 ड्रोन का इस्तेमाल किया गया, जिनमें से बड़ी संख्या दुबई की ओर भेजी गई थी. दूसरे दिन भी ईरान ने इसी रणनीति को जारी रखते हुए कुवैत और सऊदी अरब को निशाना बनाया, ताकि कम लागत में ज्यादा नुकसान पहुंचाया जा सके.

ईरान के ड्रोन बने सबसे बड़ा हथियार

इस पूरे संघर्ष में ईरान के ड्रोन सबसे प्रभावी हथियार के रूप में सामने आए हैं. ईरान के पास निगरानी, हमले और हथियार ले जाने वाले कई प्रकार के ड्रोन मौजूद हैं. इनमें ‘शाहेद-131’ और ‘शाहेद-136’ सबसे खतरनाक माने जाते हैं. ये ड्रोन लंबी दूरी तक उड़ान भर सकते हैं और लक्ष्य से टकराते ही विस्फोट कर देते हैं.

बताया जाता है कि ये ड्रोन लगभग 2000 किलोमीटर तक हमला करने में सक्षम हैं और कई घंटों तक हवा में सक्रिय रह सकते हैं. ईरान के पास बड़ी संख्या में ऐसे ड्रोन मौजूद हैं और वह हर साल हजारों नए ड्रोन बनाने की योजना पर काम कर रहा है.

ड्रोन रणनीति के पीछे की सोच

ईरान द्वारा ड्रोन हमलों पर जोर देना एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है. कम लागत वाले इन हथियारों के जरिए महंगे सैन्य ठिकानों को निशाना बनाना आसान हो जाता है. इसके अलावा ईरान अपने मिसाइल भंडार को बचाकर रखना चाहता है, ताकि जरूरत पड़ने पर उनका इस्तेमाल किया जा सके.

बढ़ती अस्थिरता से दुनिया चिंतित

लगातार हो रहे इन हमलों ने मिडिल ईस्ट को एक बड़े संकट की ओर धकेल दिया है. ऊर्जा ठिकानों और सैन्य अड्डों को निशाना बनाए जाने से वैश्विक स्तर पर भी असर पड़ने की आशंका है. आने वाले समय में यह संघर्ष और कितना फैलता है, इस पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है.

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