Trump Letter To Norway PM: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनास गहर स्टॉर को एक चिट्ठी भेजी है, जिसमें उन्होंने नोबेल शांति पुरस्कार न मिलने के बाद अपनी नई नीति का इशारा किया है. ट्रंप ने इस पत्र में साफ किया कि अब वह अमेरिकी हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देंगे, क्योंकि उन्हें इस प्रतिष्ठित पुरस्कार से नवाजा नहीं गया. हाल ही में वेनेजुएला की विपक्षी नेता मारिया कोरिना मचाडो ने ट्रंप को नोबेल शांति पुरस्कार सौंपा था, लेकिन नॉर्वे की नोबेल समिति ने इसके बाद स्पष्ट किया कि पुरस्कार के निर्णय को न तो बदला जा सकता है और न ही किसी अन्य को सौंपा जा सकता है.
ट्रंप बोले - अब मिली है पूरी आज़ादी
इस चिट्ठी में ट्रंप ने नॉर्वे के प्रधानमंत्री से कहा कि उन्हें अब अमेरिकी हितों के लिए काम करने की पूरी स्वतंत्रता मिल गई है. ट्रंप ने विशेष रूप से ग्रीनलैंड पर डेनमार्क की संप्रभुता पर सवाल उठाए, यह तर्क देते हुए कि कोपेनहेगन रूस या चीन से इस क्षेत्र की रक्षा करने में सक्षम नहीं है. उन्होंने डेनिश स्वामित्व के ऐतिहासिक तर्कों को भी चुनौती दी. ट्रंप का यह बयान उनके लिए एक स्पष्ट संदेश था कि अब वे शांति की बजाय अमेरिका के राष्ट्रीय हितों को अधिक महत्व देंगे.
ग्रीनलैंड और NATO का महत्व
ट्रंप ने यह भी कहा कि उन्होंने NATO की स्थापना के बाद से इस संगठन के लिए सबसे अधिक काम किया है. उनका मानना था कि अब NATO को भी इस दिशा में और प्रयास करने चाहिए. चिट्ठी में ट्रंप ने स्पष्ट किया, "जब तक ग्रीनलैंड पर हमारा पूरा और कुल नियंत्रण नहीं होगा, तब तक दुनिया सुरक्षित नहीं है." यह बयान दुनिया भर में सुरक्षा और अंतर्राष्ट्रीय राजनीति के संदर्भ में ट्रंप की सोच को दर्शाता है.
टैरिफ वॉर और नॉर्वे की प्रतिक्रिया
ट्रंप का यह बयान नॉर्वे के प्रधानमंत्री द्वारा उनके टैरिफ फैसले की आलोचना के बाद आया था. जोनास गहर स्टॉर ने ट्रंप की ओर से लगाए गए टैरिफ को लेकर चिंता व्यक्त की थी, और यह कहा था कि सहयोगियों के बीच धमकियां नहीं होनी चाहिए. नॉर्वे उन आठ यूरोपीय देशों में से एक है, जो इन नए टैरिफ से प्रभावित होंगे. ट्रंप ने यह भी कहा कि इन शुल्कों को तब तक लागू किया जाएगा जब तक ग्रीनलैंड की "पूरी और कुल खरीद" के लिए कोई समझौता नहीं हो जाता.
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