Data Recovery: आज के डिजिटल समय में हम हर दिन अपने फोन, लैपटॉप और क्लाउड स्टोरेज से कई फाइलें, फोटो, वीडियो और डॉक्यूमेंट हटाते रहते हैं. कई बार पुराने सोशल मीडिया अकाउंट या ऐप भी डिलीट कर देते हैं. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि Delete बटन दबाने के बाद आपका डेटा सच में खत्म हो जाता है या नहीं?
ज्यादातर लोगों को लगता है कि किसी फाइल को डिलीट करते ही वह हमेशा के लिए गायब हो जाती है. लेकिन ऐसा हमेशा नहीं होता. कई बार डिलीट किया गया डेटा सिस्टम में मौजूद रहता है और उसे दोबारा रिकवर भी किया जा सकता है.
क्या डेटा पूरी तरह खत्म किया जा सकता है?
डेटा को पूरी तरह मिटाना संभव है, लेकिन इसके लिए सिर्फ सामान्य Delete करना काफी नहीं होता. डेटा को पूरी तरह हटाने के लिए कुछ खास तरीकों का इस्तेमाल किया जाता है.
इसके लिए स्टोरेज डिवाइस को पूरी तरह साफ किया जाता है, पुराने डेटा के ऊपर कई बार नया डेटा लिखा जाता है या फिर डेटा को मजबूत एन्क्रिप्शन से सुरक्षित करके उसकी चाबी को हमेशा के लिए खत्म कर दिया जाता है.
हालांकि, हर जगह से डेटा हटाना आसान नहीं होता. खासकर क्लाउड स्टोरेज में डेटा कई सर्वर पर कॉपी के रूप में रखा जा सकता है, इसलिए उसे पूरी तरह मिटाना ज्यादा मुश्किल हो जाता है.
Delete और Erase में क्या अंतर है?
लोग अक्सर Delete और Erase को एक ही समझ लेते हैं, लेकिन दोनों में अंतर होता है. जब आप कोई फाइल Delete करते हैं तो ज्यादातर सिस्टम उस फाइल को तुरंत खत्म नहीं करते. वह सिर्फ उस जगह को खाली मान लेते हैं ताकि भविष्य में वहां नया डेटा सेव किया जा सके.
इसका मतलब है कि फाइल आपको दिखाई नहीं देती, लेकिन उसका असली डेटा स्टोरेज में मौजूद रह सकता है. जब तक उस जगह पर नया डेटा नहीं लिखा जाता, तब तक कई बार रिकवरी सॉफ्टवेयर की मदद से पुरानी फाइल वापस लाई जा सकती है.
सोशल मीडिया से डिलीट डेटा भी रह सकता है मौजूद
अगर आपने सोशल मीडिया पर कोई फोटो, पोस्ट या वीडियो डिलीट कर दिया है तो इसका मतलब यह नहीं है कि वह पूरी तरह खत्म हो गया. कई बार दूसरे लोगों के स्क्रीनशॉट, शेयर, कमेंट, रिप्लाई या इंटरनेट पर मौजूद रिकॉर्ड उस डेटा को लंबे समय तक बचाए रख सकते हैं. कुछ मामलों में डिलीट की गई जानकारी के कुछ हिस्सों का पता लगाया जा सकता है.
Zombie Account बन सकते हैं खतरा
बहुत से लोग किसी ऐप को फोन से हटा देते हैं और सोचते हैं कि उनका अकाउंट भी खत्म हो गया. लेकिन ऐसा हमेशा नहीं होता. ऐप हटाने के बाद भी आपका ऑनलाइन अकाउंट एक्टिव रह सकता है. ऐसे पुराने और इस्तेमाल नहीं किए जा रहे अकाउंट को Zombie Account कहा जाता है.
ऑनलाइन शॉपिंग, बैंकिंग, क्लाउड स्टोरेज और दूसरी सेवाओं पर मौजूद ऐसे पुराने अकाउंट साइबर अपराधियों के लिए खतरा बन सकते हैं, क्योंकि इनमें पुरानी निजी जानकारी मौजूद हो सकती है.
AI के समय में डेटा हटाना और मुश्किल
आज कई कंपनियां AI सिस्टम बनाने के लिए बड़ी मात्रा में डेटा का इस्तेमाल करती हैं. अगर किसी AI मॉडल को किसी जानकारी से ट्रेन किया गया है, तो बाद में उस डेटा का असर पूरी तरह हटाना आसान नहीं होता.
वैज्ञानिक इस समस्या को हल करने के लिए Machine Unlearning जैसी तकनीक पर काम कर रहे हैं, लेकिन अभी भी यह एक बड़ी चुनौती है. भविष्य में डेटा डिलीट करने का मतलब सिर्फ सर्वर से फाइल हटाना नहीं होगा, बल्कि AI सिस्टम से उस जानकारी के प्रभाव को हटाना भी जरूरी होगा.
लोग क्यों नहीं हटाते पुराना डेटा?
कई लोग जरूरी फोटो, वीडियो या फाइल गलती से डिलीट होने के डर से कुछ भी हटाना पसंद नहीं करते. इसकी वजह से उनके फोन और ऑनलाइन अकाउंट में कई साल पुराना डेटा जमा रहता है. अगर कभी साइबर हमला या डेटा लीक होता है तो यही पुरानी जानकारी गलत लोगों के हाथ लग सकती है.
डेटा सुरक्षित तरीके से हटाने का तरीका
विशेषज्ञों का कहना है कि कंपनियों को ऐसा सिस्टम बनाना चाहिए, जिसमें यूजर को साफ जानकारी मिले कि उसका डेटा कैसे और कब हटाया जा रहा है. यूजर्स को यह पता होना चाहिए कि कौन-सा डेटा हटेगा, वह कहां-कहां मौजूद है, उसे हटाने में कितना समय लगेगा और क्या उसे दोबारा रिकवर किया जा सकता है या नहीं. अगर कंपनियां डेटा हटाने की प्रक्रिया को ज्यादा पारदर्शी बनाएंगी तो लोगों का भरोसा बढ़ेगा और वे अपने डिजिटल डेटा को बेहतर तरीके से संभाल पाएंगे.
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