Pakistan Earthquake: पाकिस्तान में भूकंप की गतिविधि एक बार फिर तेज़ हो गई है. तीन दिन के भीतर लगातार तीसरी बार सोमवार को भूकंप के तेज़ झटके महसूस किए गए. रिक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता 4.7 मापी गई, जबकि इसका केंद्र पृथ्वी की सतह से केवल 10 किलोमीटर नीचे था. कम गहराई पर आए ऐसे भूकंप अधिक खतरनाक माने जाते हैं क्योंकि ज़मीन में कंपन की तीव्रता अधिक होती है, जिससे इमारतों को नुकसान पहुंचने की आशंका बढ़ जाती है.
राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (एनसीएस) के अनुसार, सोमवार को आया भूकंप पिछले तीन दिनों में महसूस किए गए भूकंपों की श्रृंखला का हिस्सा है. इससे पहले शनिवार और रविवार को भी भूकंप के हल्के झटके महसूस किए गए थे, जिनकी तीव्रता 4.0 के आसपास थी. भले ही इन झटकों से अब तक किसी बड़े नुकसान की खबर नहीं है, लेकिन लगातार आ रहे कंपन ने आम लोगों के बीच चिंता और घबराहट फैला दी है.
Earthquake of 4.7 magnitude strikes Pakistan
— ANI Digital (@ani_digital) October 20, 2025
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सतह के करीब आने वाले झटकों का खतरा
विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान में इन दिनों जो भूकंप आ रहे हैं, वे अधिकतर शैलो (उथले) हैं. ऐसे भूकंप सतह के बेहद पास होते हैं, जिससे उनकी ऊर्जा जल्दी बाहर निकलती है और ज़मीन की सतह पर कंपन तीव्र हो जाता है. यही कारण है कि कम तीव्रता के बावजूद, ये भूकंप ज्यादा खतरनाक साबित हो सकते हैं, खासकर यदि वे घनी आबादी वाले क्षेत्रों में आएं.
क्यों भूकंप-प्रवण है पाकिस्तान?
भूगर्भीय दृष्टिकोण से पाकिस्तान एक अत्यधिक संवेदनशील क्षेत्र में स्थित है. यह इलाका यूरेशियन और भारतीय टेक्टोनिक प्लेटों के टकराव क्षेत्र में आता है. बलूचिस्तान, खैबर पख्तूनख्वा और गिलगित-बाल्टिस्तान जैसे क्षेत्र यूरेशियन प्लेट के किनारे पर बसे हैं, जबकि पंजाब और सिंध भारतीय प्लेट की सीमा से सटे हुए हैं. यही कारण है कि यहां भूकंपीय गतिविधियां अक्सर देखी जाती हैं.
अतीत में झेली है तबाही
पाकिस्तान का इतिहास भी भूकंप की विनाशकारी घटनाओं से भरा रहा है. वर्ष 1945 में बलूचिस्तान में आए 8.1 तीव्रता के भूकंप ने भारी तबाही मचाई थी. इसके बाद भी समय-समय पर देश के विभिन्न हिस्सों में भूकंप आते रहे हैं. हालांकि सिंध जैसे क्षेत्र अपेक्षाकृत कम संवेदनशील माने जाते हैं, फिर भी टेक्टोनिक प्लेटों की नज़दीकी इन्हें पूरी तरह सुरक्षित नहीं बनाती.
सतर्कता ही बचाव का रास्ता
भूकंप प्राकृतिक आपदा है, लेकिन इसकी भयावहता को कम किया जा सकता है, यदि समय रहते सतर्कता बरती जाए. विशेषज्ञों और आपदा प्रबंधन एजेंसियों का कहना है कि लगातार आ रही भूकंपीय गतिविधियां इस बात का संकेत हैं कि क्षेत्र में टेक्टोनिक तनाव बढ़ रहा है. ऐसे में स्थानीय प्रशासन को तैयारी रखनी होगी और आम नागरिकों को भूकंप से जुड़े सुरक्षा उपायों की जानकारी दी जानी चाहिए.
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