PM Modi Birthday: भारत में डिजिटल तकनीक अब सिर्फ शहरों और बड़े कारोबार तक सीमित नहीं रही. सड़क किनारे चाय की दुकान पर लगा QR कोड, मोबाइल में मौजूद डिजिटल डॉक्यूमेंट और फोन से मिलने वाली सरकारी सेवाएं इस बदलाव की रोजमर्रा की तस्वीर बन चुकी हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में Digital India को एक व्यापक कार्यक्रम के रूप में आगे बढ़ाया गया, जिसका उद्देश्य डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और ई-गवर्नेंस के जरिए नागरिक सेवाओं की पहुंच बढ़ाना रहा है. Digital India कार्यक्रम 1 जुलाई 2015 को शुरू किया गया था.
UPI ने बदल दिया पैसे भेजने का तरीका
डिजिटल भुगतान की दुनिया में UPI ने एक बड़ा बदलाव किया. NPCI के मुताबिक, UPI का पायलट लॉन्च 11 अप्रैल 2016 को हुआ था. इसके जरिए अलग-अलग बैंक खातों को एक इंटरफेस से जोड़कर मोबाइल के माध्यम से तत्काल भुगतान की सुविधा उपलब्ध कराई गई. आज UPI ID, मोबाइल नंबर और QR कोड के जरिए भुगतान करना आम हो चुका है.
UPI के साथ BHIM और RuPay जैसे डिजिटल पेमेंट माध्यमों ने भी डिजिटल लेनदेन के विस्तार में योगदान दिया. इसका इस्तेमाल अब दुकानों, परिवहन, ऑनलाइन खरीदारी और रोजमर्रा के छोटे-बड़े भुगतानों में देखा जा सकता है.
DigiLocker ने दस्तावेजों को मोबाइल तक पहुंचाया
कागजों का फोल्डर लेकर घूमने की जरूरत को कम करने में DigiLocker ने अहम भूमिका निभाई है. 2015 में शुरू हुआ यह प्लेटफॉर्म Digital India के तहत नागरिकों को प्रमाणित डिजिटल दस्तावेज उपलब्ध कराने के लिए बनाया गया है. इसमें ड्राइविंग लाइसेंस, शैक्षणिक प्रमाणपत्र और दूसरे जरूरी दस्तावेजों को डिजिटल रूप में एक्सेस, शेयर और वेरिफाई किया जा सकता है. यानी जिस दस्तावेज के लिए पहले फाइल और कागज संभालकर रखने पड़ते थे, वही रिकॉर्ड अब जरूरत पड़ने पर मोबाइल स्क्रीन से हासिल किया जा सकता है.
जन-धन योजना ने बैंकिंग से जोड़ा
प्रधानमंत्री जन-धन योजना की शुरुआत 2014 में हुई थी. इसका उद्देश्य बैंकिंग सेवाओं से दूर लोगों को औपचारिक वित्तीय व्यवस्था से जोड़ना था. बैंक खाते आगे चलकर सरकारी लाभ और अन्य वित्तीय सेवाओं की पहुंच का महत्वपूर्ण माध्यम बने. डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ बैंक खातों, पहचान और मोबाइल कनेक्टिविटी के मेल ने वित्तीय सेवाओं की डिजिटल पहुंच को भी बढ़ाया.
UMANG से मोबाइल पर सरकारी सेवाएं
सरकारी कामकाज को मोबाइल के जरिए नागरिकों तक पहुंचाने के लिए UMANG ऐप को 2017 में लॉन्च किया गया. इसका उद्देश्य केंद्र और राज्य सरकारों की विभिन्न सेवाओं को एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराना है. समय के साथ इसमें सरकारी सेवाओं की संख्या भी बढ़ती गई.
पेंशन, पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस, यूटिलिटी बिल, DigiLocker और कई दूसरी सेवाओं तक मोबाइल या वेब के जरिए पहुंच ने सरकारी कामों के लिए भौतिक रूप से दफ्तर पहुंचने की जरूरत को कई मामलों में कम किया है.
डिजिटल हेल्थ से स्वास्थ्य सेवाओं का नया ढांचा
स्वास्थ्य क्षेत्र में भी डिजिटल तकनीक के इस्तेमाल को बढ़ाने की कोशिश हुई है. आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन का उद्देश्य स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए डिजिटल ढांचा तैयार करना है. इसके तहत ABHA जैसी डिजिटल स्वास्थ्य पहचान और सहमति आधारित स्वास्थ्य रिकॉर्ड साझा करने की व्यवस्था विकसित की गई है. प्रधानमंत्री ने इसके लॉन्च के दौरान डिजिटल तकनीक को स्वास्थ्य और नागरिक सेवाओं से जोड़ने पर जोर दिया था. इस व्यवस्था का मकसद स्वास्थ्य से जुड़े रिकॉर्ड और सेवाओं को डिजिटल माध्यम से अधिक व्यवस्थित और पोर्टेबल बनाना है.
DBT ने सरकारी लाभ पहुंचाने का तरीका बदला
डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर यानी DBT की शुरुआत 2013 में हुई थी, लेकिन बाद के वर्षों में इसका बड़े स्तर पर विस्तार हुआ. इसके तहत विभिन्न सरकारी योजनाओं के लाभ सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों तक पहुंचाने की व्यवस्था की गई. बैंक खाते, आधार और मोबाइल जैसी डिजिटल व्यवस्थाओं के साथ DBT सरकारी भुगतान प्रणाली का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बना.
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