DGCA Ban Power Bank: हाल ही में नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने फ्लाइट में पावर बैंक और लिथियम बैटरी वाले डिवाइस के इस्तेमाल को लेकर कड़े नियम लागू किए हैं. इस कदम का मकसद यात्रियों की सुरक्षा बढ़ाना और फ्लाइट में आग लगने की घटनाओं को रोकना है. अधिकारियों के मुताबिक, दुनियाभर में पावर बैंक और रिचार्जेबल बैटरियों से आग लगने की कई घटनाओं के सामने आने के बाद यह कदम उठाना आवश्यक हो गया.
DGCA की नई गाइडलाइन के मुताबिक, अब पावर बैंक केवल हैंड लगेज या कैबिन बैग में ही ले जाने की अनुमति है. इसे चेक-इन बैगेज में रखना पूरी तरह से मना है. इसके अलावा, यात्रियों को फ्लाइट में पावर बैंक से अपने फोन या अन्य इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस चार्ज करने की इजाजत भी नहीं है.
✈️ Important flight update for India 🇮🇳
— Tech Signal (@TechSignalX) January 4, 2026
As per DGCA safety rules, power banks are treated as restricted items because they use lithium-ion batteries.
• Allowed only in hand baggage (not in check-in)
• Charging power banks on flights is not allowed
• Using a power bank to… pic.twitter.com/OvFewu38Cz
एयरलाइंस ने यात्रियों को इस नए नियम के बारे में जागरूक करने के लिए बोर्डिंग के दौरान अनाउंसमेंट और इनफ्लाइट ब्रीफिंग शुरू कर दी है. DGCA भविष्य में इस दिशा में और कड़े कदम भी उठा सकता है, जिससे यात्रा और अधिक सुरक्षित हो सके.
पावर बैंक क्यों बन रहे हैं खतरा
पिछले साल नवंबर में DGCA ने पावर बैंक और स्पेयर बैटरी को लेकर एक एडवाइजरी जारी की थी. इसमें स्पष्ट किया गया था कि पावर बैंक और अन्य रिचार्जेबल बैटरी केवल हैंड लगेज में ले जाई जा सकती हैं, और उन्हें ओवरहेड स्टोरेज या चेक-इन बैगेज में नहीं रखा जा सकता.
इसका मुख्य कारण यह है कि पावर बैंक और लिथियम बैटरी में ऊर्जा की मात्रा बहुत अधिक होती है. अगर इनमें आग लगती है, तो इसे कंट्रोल करना मुश्किल हो जाता है. एविएशन सेफ्टी विशेषज्ञों का कहना है कि विमान के केबिन में छोटी सी बैटरी में लगी आग भी तेजी से फैल सकती है और यात्रियों तथा क्रू मेंबर्स के लिए खतरनाक हो सकती है.
लिथियम बैटरी और पावर बैंक से आग लगने का कारण
DGCA ने अपने सर्कुलर में बताया कि आजकल पावर बैंक, पोर्टेबल चार्जर और अन्य रिचार्जेबल डिवाइस में लिथियम बैटरी का व्यापक इस्तेमाल हो रहा है. इन डिवाइस की संख्या बढ़ने के कारण फ्लाइट में आग लगने का जोखिम भी बढ़ गया है.
सर्कुलर में आगे कहा गया है कि ओवरहेड स्टोरेज डिब्बों या कैरी-ऑन बैग्स में रखी लिथियम बैटरी छिपी रह सकती है. ऐसी स्थिति में क्रू मेंबर या यात्री इन पर नजर नहीं रख सकते, जिससे आग या धुआं लगने की जानकारी देर से मिल सकती है. देर से प्रतिक्रिया होने पर फ्लाइट की सुरक्षा को गंभीर खतरा हो सकता है.
सुरक्षा की दृष्टि से जरूरी कदम
विशेषज्ञों के अनुसार, पावर बैंक और लिथियम बैटरी वाले डिवाइस को सिर्फ हैंड लगेज में रखना और फ्लाइट में चार्जिंग पर पाबंदी लगाना आवश्यक है. इससे किसी भी आकस्मिक आग की स्थिति में त्वरित कार्रवाई की जा सकती है और यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है.
DGCA के नियमों का पालन करना अब हर यात्री के लिए जरूरी है. एयरलाइंस और नियामक दोनों इस दिशा में यात्रियों को जागरूक कर रहे हैं ताकि कोई हादसा होने से पहले रोका जा सके. विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि ये नियम सही तरीके से लागू किए जाएं, तो फ्लाइट में आग लगने जैसी घटनाओं की संभावना काफी हद तक कम हो जाएगी.
ये भी पढ़ें- Back Pain Relief: पलभर में दूर हो जाएगा कमर दर्द, इस एक्ट्रेस के बताए तरीके आज ही अपनाएं; देखें वीडियो