इस्लामाबाद: पाकिस्तान लंबे समय से भारत को अपनी सुरक्षा के लिए बड़ी चुनौती मानता रहा है. आर्थिक मुश्किलों के बावजूद पाकिस्तानी सेना लगातार अपनी सैन्य क्षमता बढ़ाने की कोशिश कर रही है. पिछले कुछ वर्षों में पाकिस्तान ने लड़ाकू विमान, टैंक, मिसाइल, ड्रोन, एयर डिफेंस और पनडुब्बियों जैसे हथियारों पर खास ध्यान दिया है.
इस सैन्य आधुनिकीकरण में चीन की भूमिका सबसे अहम है. पिछले पांच वर्षों में पाकिस्तान के हथियारों के आयात में 81 फीसदी से ज्यादा हिस्सा चीन का रहा है. चीन के अलावा पाकिस्तान तुर्की जैसे देशों से भी सैन्य तकनीक और हथियार हासिल कर रहा है.
पाकिस्तान की कोशिश सिर्फ विदेशों से हथियार खरीदने तक सीमित नहीं है. वह कई हथियारों और सैन्य तकनीकों का देश में निर्माण और अपग्रेड भी कर रहा है. इसका मकसद अपनी सेना को आधुनिक बनाना और भारत के मुकाबले मौजूद सैन्य अंतर को कम करना है.
टैंकों से लेकर एयर डिफेंस तक तैयारी
पाकिस्तानी सेना अपने बख्तरबंद बेड़े को मजबूत करने पर भी काम कर रही है. इसके लिए चीन से VT-4 टैंक लिए जा रहे हैं. पाकिस्तान ने 2019 में चीन के साथ 679 VT-4 टैंकों का समझौता किया था. इनमें से करीब 200 टैंक सेवा में बताए जाते हैं. इसी तकनीक पर आधारित टैंक को पाकिस्तान ने ‘हैदर’ नाम दिया है.
इसके साथ ही पाकिस्तान ने अपनी एयर डिफेंस क्षमता बढ़ाने के लिए चीनी सिस्टम पर भरोसा किया है. उसके पास HQ-9, HQ-16 और दूसरे चीनी एयर डिफेंस सिस्टम हैं. इनका मकसद दुश्मन के विमान और मिसाइलों से महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों की सुरक्षा करना है.
पाकिस्तान अपनी सेना के लिए Z-10ME अटैक हेलीकॉप्टर भी शामिल कर रहा है. इसके अलावा ड्रोन के क्षेत्र में भी वह तेजी से अपनी क्षमता बढ़ा रहा है. उसके पास चीन और तुर्की से मिले ड्रोन के साथ कुछ स्वदेशी ड्रोन भी हैं. इनमें निगरानी और हमले दोनों तरह के ड्रोन शामिल हैं.
इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर पर भी जोर
आधुनिक युद्ध में सिर्फ मिसाइल और लड़ाकू विमान ही काफी नहीं होते. दुश्मन के रडार, संचार और इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम को प्रभावित करना भी बेहद अहम हो गया है. इसी वजह से पाकिस्तान इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और कम्युनिकेशन इंटेलिजेंस से जुड़ी तकनीक पर भी निवेश कर रहा है.
पाकिस्तान में NRTC, DESTO और NASTP जैसे संस्थान इन तकनीकों के विकास में भूमिका निभा रहे हैं. पाकिस्तान की कोशिश ऐसे सिस्टम तैयार करने की है, जो युद्ध के दौरान संचार, निगरानी और इलेक्ट्रॉनिक गतिविधियों को बेहतर तरीके से संभाल सकें.
वायुसेना को और ताकतवर बनाने की कोशिश
पाकिस्तान अपनी वायुसेना के आधुनिकीकरण पर भी काफी जोर दे रहा है. उसके पास चीन के JF-17 और J-10C जैसे लड़ाकू विमान हैं. JF-17 के नए वर्जन और J-10C को लंबी दूरी की हवा से हवा में मार करने वाली PL-15 मिसाइलों से लैस किया गया है.
पाकिस्तान भविष्य में पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान हासिल करने की कोशिश भी कर रहा है. J-35A को लेकर भी उसकी दिलचस्पी की रिपोर्ट सामने आती रही है. इसके साथ ही एयरबोर्न अर्ली वार्निंग सिस्टम, रडार, ड्रोन और लंबी दूरी की मिसाइलों पर भी ध्यान दिया जा रहा है.
पाकिस्तान की वायुसेना नेटवर्क आधारित युद्ध क्षमता को भी मजबूत कर रही है. इसका मतलब है कि लड़ाकू विमान, रडार, एयर डिफेंस और दूसरे सिस्टम आपस में जुड़कर काम कर सकें. इस तरह पाकिस्तान अलग-अलग हथियारों को एक साथ इस्तेमाल करने की क्षमता बढ़ाने की कोशिश कर रहा है.
चीन पर सबसे ज्यादा भरोसा
पाकिस्तान की सैन्य खरीद में चीन की भूमिका लगातार बढ़ी है. लड़ाकू विमानों से लेकर टैंक, एयर डिफेंस सिस्टम और पनडुब्बियों तक कई अहम प्लेटफॉर्म चीन से मिले हैं. विशेषज्ञ विश्लेषण के मुताबिक आने वाले समय में भी चीन पाकिस्तान के रक्षा आयात का प्रमुख स्रोत बना रह सकता है.
इसके साथ पाकिस्तान तुर्की के साथ भी रक्षा सहयोग बढ़ा रहा है. तुर्की से ड्रोन और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर से जुड़ी तकनीक हासिल करने के अलावा दोनों देश कई रक्षा परियोजनाओं पर साथ काम कर रहे हैं.
नौसेना को भी बड़ा बनाने का प्लान
पाकिस्तान सिर्फ जमीन और आसमान में ही अपनी सैन्य ताकत बढ़ाने पर ध्यान नहीं दे रहा है. उसकी नौसेना भी बड़े आधुनिकीकरण कार्यक्रम से गुजर रही है.
इस योजना में चीन से मिलने वाली Hangor-class पनडुब्बियां सबसे अहम हैं. पाकिस्तान कुल आठ Hangor-class पनडुब्बियां हासिल कर रहा है. इनमें चार चीन में बन रही हैं, जबकि बाकी चार का निर्माण पाकिस्तान में किया जाना है.
इसके अलावा पाकिस्तान ने चीन से Type 054A/P फ्रिगेट भी हासिल किए हैं. तुर्की के साथ मिलकर MILGEM-class कार्वेट कार्यक्रम पर भी काम किया जा रहा है. यानी पाकिस्तान अपनी नौसेना में पनडुब्बियों, फ्रिगेट और दूसरे युद्धपोतों की संख्या बढ़ाकर समुद्र में अपनी क्षमता मजबूत करना चाहता है.
आर्थिक दबाव के बीच बढ़ रहा रक्षा खर्च
पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था लंबे समय से दबाव में है और देश पर कर्ज का बोझ भी है. इसके बावजूद सैन्य आधुनिकीकरण को प्राथमिकता दी जा रही है. ORF की 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान का कुल रक्षा खर्च करीब 12.6 अरब डॉलर बताया गया है, जबकि भारत का रक्षा बजट इससे काफी अधिक है.
यानी पाकिस्तान भारत के मुकाबले बजट में काफी पीछे होने के बावजूद कुछ खास क्षेत्रों में अपनी ताकत बढ़ाने पर ध्यान दे रहा है. लड़ाकू विमान, ड्रोन, एयर डिफेंस, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और पनडुब्बियां इसी रणनीति का हिस्सा हैं.
कुल मिलाकर पाकिस्तान की कोशिश ऐसी सैन्य क्षमता तैयार करने की है, जिसमें चीन की तकनीक, तुर्की के साथ सहयोग और घरेलू स्तर पर विकसित सिस्टम को एक साथ इस्तेमाल किया जा सके. इसका बड़ा उद्देश्य भारत के मुकाबले अपनी सैन्य क्षमता के अंतर को कुछ हद तक कम करना है.