यमुना सफाई को लेकर महाअभियान शुरू, 70% गंदगी खत्म करने के लिए नजफगढ़ नाले में उतरी फिनलैंड की ये मशीन

Najafgarh Drain Cleaning: दिल्ली में यमुना नदी की बदहाली का सबसे बड़ा कारण नजफगढ़ नाला माना जाता है. सालों से इसी नाले के जरिए भारी मात्रा में गंदा पानी यमुना में गिर रहा है, जिससे नदी की हालत लगातार खराब होती चली गई.

Delhi Yamuna cleaning campaign Finland machine lands in Najafgarh drain to remove 70% filth
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Najafgarh Drain Cleaning: दिल्ली में यमुना नदी की बदहाली का सबसे बड़ा कारण नजफगढ़ नाला माना जाता है. सालों से इसी नाले के जरिए भारी मात्रा में गंदा पानी यमुना में गिर रहा है, जिससे नदी की हालत लगातार खराब होती चली गई. अब इस गंभीर समस्या से निपटने के लिए दिल्ली सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है. नजफगढ़ ड्रेन की व्यापक सफाई के लिए शुक्रवार से फिनलैंड से आयात की गई आधुनिक एम्फीबियन वॉटर ड्रेजर मशीन को नाले में उतार दिया गया है.

इस हाईटेक मशीन का उद्घाटन दिल्ली सरकार में सिंचाई और बाढ़ विभाग के मंत्री प्रवेश साहिब सिंह ने किया. विभाग के अनुसार, यह पहल यमुना की सफाई की दिशा में एक निर्णायक कदम साबित हो सकती है.

यमुना के प्रदूषण में 60 से 70 प्रतिशत तक आ सकती है कमी

मंत्री प्रवेश साहिब सिंह ने बताया कि यमुना में गिरने वाली गंदगी का सबसे बड़ा स्रोत नजफगढ़ ड्रेन है. अगर इस 57 किलोमीटर लंबे नाले की पूरी तरह से सफाई कर दी जाती है, तो यमुना नदी में करीब 60 से 70 प्रतिशत तक प्रदूषण कम किया जा सकता है. 

लंबे समय से नाले में जमी गाद और कचरे के कारण पानी का बहाव बाधित हो रहा था, जिससे गंदा पानी सीधे यमुना में पहुंच रहा था. सरकार का मानना है कि ड्रेन की गहराई तक सफाई होने से न सिर्फ जल प्रवाह बेहतर होगा, बल्कि आसपास के इलाकों में बाढ़ और जलभराव की समस्या भी कम होगी.

जमीन और पानी दोनों में चलेगी एम्फीबियन ड्रेजर मशीन

नजफगढ़ नाले की सफाई के लिए लाई गई एम्फीबियन वॉटर ड्रेजर मशीन की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह जमीन और पानी दोनों में बिना किसी रुकावट के काम कर सकती है. यह मशीन 6 मीटर तक की गहराई से गाद निकालने में सक्षम है. इसमें चार मजबूत स्टेबलाइजर लगाए गए हैं, जिससे यह असंतुलित सतह पर भी स्थिर बनी रहती है.

मशीन में 80 डिग्री तक घूमने वाला लचीला एक्सवेटर आर्म लगाया गया है, जो संकरी जगहों पर भी आसानी से गाद निकाल सकता है. इसके साथ 600 लीटर क्षमता की बड़ी बकेट दी गई है, जिससे कम समय में ज्यादा मात्रा में गाद हटाई जा सकेगी.

हाई कैपेसिटी स्लज पंप और जीपीएस सिस्टम से लैस

यह ड्रेजर मशीन अत्याधुनिक तकनीक से लैस है. इसमें जीपीएस सिस्टम लगाया गया है, ताकि मशीन की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा सके. इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि सफाई का काम तय योजना के अनुसार ही हो.

विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, ड्रेजर की स्लज पंपिंग क्षमता 600 क्यूबिक मीटर प्रति घंटा है. यानी यह मशीन एक घंटे में बड़ी मात्रा में गाद निकाल सकती है और उसे करीब 1.5 किलोमीटर दूर तक पंप कर सकती है. इस मशीन की कुल लागत 8.03 करोड़ रुपये बताई जा रही है.

ऑटोमेटिक हॉपर बार्ज भी सफाई अभियान में शामिल

एम्फीबियन ड्रेजर मशीन के साथ-साथ गाद को हटाने और ढोने के लिए ऑटोमेटिक हॉपर बार्ज मशीनें भी तैनात की गई हैं. कुल तीन हॉपर बार्ज मंगाई गई हैं, जिनकी कुल लागत करीब 5.25 करोड़ रुपये है. प्रत्येक हॉपर बार्ज की लागत लगभग 1.75 करोड़ रुपये बताई गई है.

इन बार्ज की क्षमता 12 क्यूबिक मीटर प्रति ट्रिप है. ड्रेजर मशीन द्वारा निकाली गई गाद को इन हॉपर बार्ज के जरिए सुरक्षित तरीके से हटाया जाएगा, ताकि नाले में दोबारा गंदगी न फैले.

यमुना सफाई अभियान को मिल सकती है नई गति

नजफगढ़ नाले में इस अत्याधुनिक मशीनरी के उतरने से यमुना की सफाई को नई रफ्तार मिलने की उम्मीद है. लंबे समय से पर्यावरण विशेषज्ञ और सामाजिक संगठन इस नाले की सफाई को यमुना पुनर्जीवन की कुंजी बताते रहे हैं. सरकार का दावा है कि इस तकनीकी पहल से न सिर्फ नजफगढ़ ड्रेन की दशा सुधरेगी, बल्कि यमुना नदी को साफ करने की दिशा में भी बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा.

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